बिहार मंत्रिमंडल की हालिया बैठक में राज्य के विकास, प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण और जनकल्याण को लेकर 27 ऐतिहासिक प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में लिए गए इन निर्णयों को बिहार में ‘ढांचागत सुधार’ और ‘लक्ष्यित विकास’ का एक महापैकेज माना जा रहा है। इस विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में हम कैबिनेट के तीन सबसे बड़े फैसलों और उनके दूरगामी सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का विस्तृत मूल्यांकन करेंगे।
न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
सबसे पहले बात करते हैं सरकारी कर्मियों व पेंशनरों को कैशलेस इलाज की। इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा सुधार होगा। बिहार सरकार ने अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को स्वास्थ्य के मोर्चे पर अब तक की सबसे बड़ी सौगात दी है। नए प्रावधान के तहत अब राज्य सरकार के नियमित अधिकारियों, कर्मचारियों, सेवानिवृत्त पेंशनधारियों, विधायकों, पूर्व विधायकों, अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों और उनके आश्रितों को अस्पताल में भर्ती होने पर कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी।
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा प्रभाव यह होगा कि लाभार्थियों को आपातकालीन स्थिति में अस्पताल में भर्ती होते समय तत्काल अपनी जेब से मोटी रकम खर्च नहीं करनी पड़ेगी। इससे न केवल चिकित्सा प्रक्रिया आसान और पारदर्शी बनेगी, बल्कि मध्यमवर्गीय परिवारों को गंभीर बीमारियों के समय होने वाले अचानक वित्तीय संकट से बड़ी राहत मिलेगी।
इसी फैसले के पूरक के तौर पर पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (PMCH) की स्वास्थ्य सुविधाओं को भी अपग्रेड किया जा रहा है। इसके तहत अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में एक स्वतंत्र ‘स्पाइन सब-स्पेशियलिटी यूनिट’ स्थापित करने को मंजूरी दी गई है। रीढ़ की हड्डी से जुड़ी गंभीर बीमारियों के बेहतर इलाज के लिए इस नई यूनिट में 39 नए पदों के सृजन को भी हरी झंडी दी गई है, जिससे अब बिहार के लोगों को जटिल स्पाइन सर्जरी के लिए दिल्ली या अन्य राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा।
दूसरा है शहरी भू-सर्वेक्षण। डिजिटल खतियान और नक्शे से भू-माफियाओं पर नकेल कसी जा सकेगी। बिहार सरकार ने पुराने जटिल कानूनों और साल 2012 की पुरानी नियमावली को हटाकर ‘बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त (संशोधन) नियमावली 2026’ को मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब ग्रामीण क्षेत्रों की तरह राज्य के सभी शहरी क्षेत्रों में भी अत्याधुनिक डिजिटल भू-सर्वेक्षण कराया जाएगा।
इसकी आवश्यकता इसलिए महसूस की जा रही थी क्योंकि पुराने कानूनों के कारण शहरी जमीनों की नापी में लगातार मानवीय गड़बड़ियां और विसंगतियां हो रही थीं, जिससे अदालती मुकदमों और भूमि विवादों की संख्या लगातार बढ़ रही थी। साथ ही शहरी क्षेत्रों में भू-माफिया बेहद सक्रिय थे और जमीनों का कोई आधुनिक पारदर्शी रिकॉर्ड मौजूद नहीं था।
सरकार के इस नए कदम से शहरों में नया डिजिटल खतियान और आधुनिक नक्शा तैयार होगा, जिससे भूमि रिकॉर्ड्स में पूर्ण पारदर्शिता आएगी। जानकारों और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस डिजिटल भू-सर्वेक्षण के लागू होने से जमीन संबंधी आपसी विवादों और मुकदमों में 80% तक की भारी कमी आने का अनुमान है, जिससे अंततः रियल एस्टेट सेक्टर को भी गति मिलेगी।.
तीसरा है रैयती भूमि के लिए नई नीति। बाजार दर से चार गुना तक मुआवजा का प्रावधान रखा गया है। कैबिनेट का तीसरा सबसे बड़ा और दूरगामी फैसला ‘बिहार रैयती भूमि क्रय नीति, 2026’ को लागू करना है. केंद्रीय और राज्य परियोजनाओं जैसे सड़क, पुल, अस्पताल और स्कूल के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए सरकार ने यह ऐतिहासिक कदम उठाया है। इसके तहत यदि आपसी सहमति के आधार पर रैयतों यानी किसानों और निजी जमीन मालिकों से सीधे जमीन खरीदी जाती है, तो उन्हें भारी-भरकम मुआवजा दिया जाएगा।
मुआवजे के नए नियमों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में जमीन का मूल्य बाजार मूल्य या सर्किल रेट (MVR) में से जो भी अधिक होगा, उसके दो गुना के बराबर तय किया जाएगा। और इसके साथ ही 10% अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए जमीन का मूल्य बाजार मूल्य या सर्किल रेट में से जो भी अधिक होगा, उसका चार गुना तक भुगतान किया जाएगा। इस नीति को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए सरकार ने इस तरह खरीदी जाने वाली निजी जमीनों को स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क से पूरी तरह मुक्त रखने का फैसला किया है।
इसका विश्लेषणात्मक पहलू यह है कि भूमि अधिग्रहण में होने वाले प्रशासनिक और कानूनी विलंब के कारण राज्य की कई बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं वर्षों तक लटकी रहती थीं। इस नई और आकर्षक मुआवजे की नीति से किसान और जमीन मालिक स्वेच्छा से अपनी जमीन देने को तैयार होंगे, जिससे अदालती मामले घटेंगे और सरकारी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अभूपूर्व तेजी आएगी।
इन तीन बड़े फैसलों के अलावा कैबिनेट ने बुनियादी ढांचे और न्याय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई अन्य अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी है। सड़क नेटवर्क के विस्तार के तहत BSHP-IV परियोजना के अंतर्गत राज्य में सड़कों का जाल बिछाने और पांच स्टेट हाईवे के निर्माण के लिए 3,744 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिसमें मधुबनी, सीतामढ़ी, सहरसा और बक्सर आदि जिलों में सड़कों का चौड़ीकरण शामिल है। रोजगार व कौशल विकास के मोर्चे पर ‘युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग’ को पूरी तरह सक्रिय करते हुए युवाओं और दिव्यांगों को स्वरोजगार व विशेष ट्रेनिंग देने के लिए कुल 112 नए पदों का सृजन किया गया है।
न्यायिक क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए पूर्णिया, भागलपुर और गया में एनडीपीएस (ड्रग्स) मामलों की सुनवाई के लिए तीन विशेष कोर्ट तथा मधुबनी और दरभंगा के बेनीपुर में शराबबंदी मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए दो नए विशेष कोर्ट बनाए जाएंगे। सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत बेगुसराय में नई उप-जेल निर्माण के लिए 21 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। शेखपुरा और गोपालगंज में खुफिया विभाग (IB) के कार्यालय बनेंगे, तथा पटना हाईकोर्ट के जजों के लिए 3.70 करोड़ रुपये की लागत से 10 नई इलेक्ट्रिक व हाइब्रिड गाड़ियां खरीदी जाएंगी। जल संसाधन के क्षेत्र में पश्चिमी कोसी सिंचाई योजनाओं की पुनर्स्थापना और आधुनिकीकरण के लिए 606 करोड़ रुपये तथा झंझारपुर शाखा नहर के लिए 218 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
सिस्टम-सुरक्षा-सहूलियत का मास्टरस्ट्रोक
कुल मिलाकर, बिहार कैबिनेट के ये 27 फैसले सरकार की सुशासन नीति की दिशा को स्पष्ट करते हैं। सरकार का सीधा फोकस अब ‘सिस्टम की शुद्धि’ और ‘त्वरित डिलीवरी’ पर टिक गया है। जटिल पुरानी नियमावलियों को बदलकर 2026 के नए संशोधनों को लाना यह साफ तौर पर दर्शाता है कि सरकार जमीन संबंधी धोखाधड़ी को पूरी तरह समाप्त कर भू-माफियाओं पर नकेल कसना चाहती है। आम जनता को जहां जमीन विवादों से मुक्ति मिलेगी, वहीं सरकारी कर्मियों को स्वास्थ्य सुरक्षा और युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। यह नए बिहार के आर्थिक और सामाजिक विकास की दिशा में एक बेहद संतुलित और साहसिक कदम है।
































