भागलपुर में ‘भारत की प्रतिनिधि लघुकथाएं’ का लोकार्पण, लघुकथा पाठ और समीक्षा से सजा साहित्यिक आयोजन

न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, भागलपुर
साहित्यिक नगरी भागलपुर में लघुकथा विधा को समर्पित एक महत्वपूर्ण आयोजन में देश-विदेश के लेखकों की चर्चित पुस्तक ‘भारत की प्रतिनिधि लघुकथाएँ’ का लोकार्पण किया गया। संतनगर बरारी स्थित बाबा छोटेलाल दास आश्रम में आयोजित इस कार्यक्रम में लघुकथा पाठ, समीक्षा और साहित्यिक विमर्श का समृद्ध वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित बिहार अंगिका अकादमी, पटना के निवर्तमान अध्यक्ष एवं प्रतिष्ठित समालोचक साहित्यकार प्रो. (डॉ.) लखनलाल सिंह ‘आरोही’ ने कहा कि लघुकथा भारतीय मिट्टी की उपज है और इसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों तक में मिलता है। उन्होंने बताया कि अग्नि पुराण में ‘लघुकथानिका’ का उल्लेख मिलता है, जबकि आधुनिक दौर में 20वीं सदी में हिंदी साहित्य ने इसे व्यापक रूप से अपनाया।
उन्होंने कहा कि मराठी लघुकथाकार माधव राव सिप्रे ने हिंदी की पहली लघुकथा ‘टोकरी भर मिट्टी’ लिखी, जो 1937 में प्रकाशित हुई। डॉ. आरोही ने कहा कि 1980 के दशक में वरिष्ठ साहित्यकार पारस कुंज ने लघुकथा आंदोलन को नई दिशा दी और आज उसी प्रयास का साकार रूप यह महत्वपूर्ण संकलन है। उन्होंने कहा-“पारस कुंज भागलपुर के जयशंकर प्रसाद हैं।”
यह पुस्तक लायंस पब्लिकेशन, ग्वालियर से प्रकाशित हुई है और इसमें देश-विदेश के सौ स्थापित तथा नवोदित लेखकों की कुल 113 लघुकथाएँ संकलित हैं। पुस्तक का संपादन वरिष्ठ लघुकथाकार, कवि और पत्रकार पारस कुंज ने किया है, जिन्हें हाल ही में ‘आनन्द शंकर माधवन साहित्य रत्न’ सम्मान से भी नवाजा गया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आध्यात्मिक साहित्य के प्रख्यात रचनाकार छोटेलाल दास ने की। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में देशभर में सर्वाधिक प्रकाशित लघुकथाकार-कवयित्री सपना चन्द्रा, सम्मानित लघुकथाकार-कवि अंजनी कुमार शर्मा, बगुला मंच की संस्थापिका उषा राही तथा लघुकथाकार-कवयित्री रीता मिश्रा तिवारी उपस्थित रहीं। सभी वक्ताओं ने पुस्तक की साहित्यिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए संपादक पारस कुंज के योगदान की सराहना की।
इस अवसर पर आयोजित लघुकथा पाठ सत्र में छोटेलाल दास, अभय कुमार भारती, अंजनी कुमार शर्मा, डॉ. कुमार गौरव, कुमार सम्भव, पारस कुंज, माधवी चौधरी, महेंद्र प्रसाद निशाकर, रीता मिश्रा तिवारी, डॉ. लखनलाल सिंह ‘आरोही’, डॉ. विभु रंजन, शितांशु अरुण, शिवाक्षी कौशिक, शिवानी साह, डॉ. सुजाता कुमारी, सपना चन्द्रा, सुनील कुमार मिश्र और सिन्हा वीरेन्द्र सहित कई रचनाकारों ने अपनी लघुकथाओं का पाठ किया।
कार्यक्रम का संयोजन वरिष्ठ लघुकथाकार सुनील कुमार मिश्र ने किया, जबकि संचालन युवा साहित्यकार शिवाक्षी कौशिक और सिन्हा वीरेन्द्र ने किया।
साहित्यप्रेमियों से खचाखच भरे इस आयोजन में लघुकथा विधा की परंपरा, विकास और समकालीन संभावनाओं पर सारगर्भित चर्चा हुई। उपस्थित साहित्यकारों ने कहा कि ऐसे आयोजन साहित्यिक संवाद को नई ऊर्जा देते हैं और नई पीढ़ी को लेखन के लिए प्रेरित करते हैं।