बिहार में ‘सिस्टम रिबूट’ की तैयारी : क्या मंत्रियों के बच्चे भी अब सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे?

बिहार की सियासत में ‘बदलाव’ अब केवल नारों तक सीमित नहीं रहने वाला है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा में विश्वास मत के दौरान जो खाका खींचा है, वह राज्य की प्रशासनिक और शैक्षिक व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन के स्पष्ट संकेत दे रहा है। शिक्षा में वीआईपी संस्कृति के खात्मे से लेकर 5 लाख करोड़ के निवेश तक, सरकार अब ‘सख्त और ठोस’ फैसलों के मोड में नजर आ रही है।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
सरकार शिक्षा में समानता वाली व्यवस्था की तैयारी में है। क्या ‘बाध्यता’ वाले फार्मूले से बदलाव लाएगी सरकार? मुख्यमंत्री का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला संकेत सरकारी शिक्षा को लेकर है। सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि राज्य में शिक्षा का स्तर ऐसा बनाया जाएगा कि मंत्रियों और आला अधिकारियों के बच्चे भी सरकारी स्कूलों में पढ़ने को बाध्य हों। सरकार की योजना जुलाई तक 209 प्रखंडों में डिग्री कॉलेजों को शुरू करने की है। छात्राओं के लिए ‘पुलिस दीदी’ की तैनाती का फैसला महिला सशक्तिकरण और शैक्षणिक सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

सरकार की प्राथमिकता निवेश और रोजगार है। पलायन रोकने पर भी सरकार का मास्टर प्लान तैयार है। बिहार में उद्योगों की कमी और पलायन हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। इसे एड्रेस करते हुए सीएम ने नवंबर तक 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। पिछली सरकार के कार्यकाल में 1.36 लाख करोड़ का निवेश हुआ था, लेकिन अब लक्ष्य चार गुना से भी ज्यादा है। प्राथमिकता साफ है, बिहार का पैसा और बिहार का युवा, दोनों बिहार में ही रहें।

सीधे सीएमओ की नजर
अक्सर देखा जाता है कि सरकारी योजनाएं प्रखंड (ब्लॉक) और थानों के स्तर पर दम तोड़ देती हैं। इसे दुरुस्त करने के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय (CMO) को सीधे इन इकाइयों की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है। जन समस्याओं के निपटारे में होने वाली देरी पर अब सीधा डंडा चलेगा। साथ ही, सड़क दुर्घटनाओं में मुआवजे की राशि बढ़ाकर 8 लाख रुपये (बीमा + सरकारी सहायता) कर सरकार ने एक संवेदनशील चेहरा भी पेश किया है।

कैबिनेट विस्तार के बाद दिखेगा ‘असली ट्रेलर’
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ये घोषणाएं केवल ट्रेलर हैं। कैबिनेट विस्तार के बाद सम्राट चौधरी कई और कड़े फैसले ले सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि सीएम प्रशासनिक फेरबदल के जरिए एक ‘क्लीन और सख्त’ गवर्नेंस का संदेश देना चाहते हैं, जिससे राज्य में निवेश का माहौल बने और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो।