बिहार में सरकारी कर्मियों की लेटलतीफी पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: देरी से आए तो कटेगा वेतन, मुख्य सचिव का सख्त फरमान

बिहार की सरकारी कार्य संस्कृति को सुधारने के लिए राज्य सरकार ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अख्तियार किया है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी विभागों, प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि जो कर्मचारी समय पर कार्यालय नहीं आएंगे, उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। नए आदेश के तहत, ड्यूटी से गायब रहने या देरी से आने पर अब सीधे ‘वेतन कटौती’ की गाज गिरेगी।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सभी निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (DDO) अब कर्मचारियों की उपस्थिति विवरणी (Attendance Sheet) की गहन जांच के बाद ही वेतन बिल तैयार करेंगे। यदि कोई कर्मचारी निर्धारित समय के बाद कार्यालय पहुंचता है, तो उसकी देरी की अवधि को पहले उसके ‘अवकाश खाते’ (Leave Account) से समायोजित किया जाएगा। यदि कर्मचारी के पास कोई छुट्टी शेष नहीं है, तो उतने समय का वेतन काट लिया जाएगा।

कार्यालय की नई समय-सारणी : एक नजर में
मुख्य सचिव ने कार्यालयों की कार्यविधि को स्पष्ट करते हुए समय सीमा तय कर दी है:

सचिवालय एवं संलग्न कार्यालय: सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक। (दोपहर 1:00 से 1:30 बजे तक लंच ब्रेक)।

नियमित महिला कर्मी (सचिवालय): सुबह 9:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक।

क्षेत्रीय कार्यालय (नवंबर से फरवरी): सुबह 10:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक।

अन्य क्षेत्रीय कार्यालय: सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक (छह दिवसीय कार्य सप्ताह)।

केवल उपस्थिति नहीं, ‘काम’ भी जरूरी
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि कई कर्मचारी कार्यालय में मौजूद तो रहते हैं, लेकिन अपने सरकारी दायित्वों का निर्वहन पूरी ईमानदारी या मनोयोग से नहीं करते। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि कर्मचारी न केवल समय पर आएं, बल्कि कार्यालय अवधि की समाप्ति के बाद ही अपनी सीट छोड़ें।

आम जनता को मिलेगी बड़ी राहत
सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों की लेटलतीफी के कारण आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दूर-दराज से आने वाले ग्रामीण अक्सर खाली कुर्सियां देखकर वापस लौट जाते थे, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता था। इस सख्ती से अब दाखिल-खारिज, प्रमाणपत्र और अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।

औचक निरीक्षण का चक्रव्यूह
प्रशासनिक पकड़ मजबूत करने के लिए सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यालयों का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) करने को कहा गया है। मुख्य सचिव ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले कर्मियों पर नियमानुसार तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। केवल विशेष परिस्थितियों में ही विभागाध्यक्षों को आवश्यक छूट देने का अधिकार होगा।