न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार सरकार ने राज्य में औद्योगिक क्रांति को नया जीवन देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। वर्षों से अटके हुए अनुदानों के कारण आर्थिक तंगी झेल रहे उद्यमियों के लिए अब ‘अच्छे दिन’ आने वाले हैं। उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल की घोषणा के अनुसार, मार्च 2026 तक सभी लंबित भुगतानों का निपटारा कर दिया जाएगा।
जानिए कि क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
अभी तक उद्योग विभाग के पास अनुदान के लिए पर्याप्त बजट नहीं था। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केवल 500 करोड़ रुपये का प्रावधान था, जो कि दावों की तुलना में ऊँट के मुँह में जीरा जैसा था। अब बिहार आकस्मिकता निधि (BCF) से 1700 करोड़ रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था होने से फंड की कमी पूरी तरह खत्म हो गई है।
इस फैसले से होने वाले 5 मुख्य फायदे:
कार्यशील पूंजी (Working Capital) में वृद्धि: छोटे और मध्यम स्तर के उद्यमियों (MSMEs) के लिए नकदी का प्रवाह सबसे बड़ी चुनौती होती है। सब्सिडी का पैसा मिलने से वे अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकेंगे और पुराने कर्ज चुका सकेंगे।
निवेशकों का भरोसा (Investor Confidence): जब सरकार अपने वादे पूरे करती है, तो नए निवेशकों में विश्वास जगता है। इस कदम से “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” की रैंकिंग में सुधार होगा और बाहरी निवेशक बिहार की ओर आकर्षित होंगे।
लालफीताशाही का अंत: सरकार ने स्पष्ट किया है कि उद्यमियों को अब दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। भुगतान एक ‘एकमुश्त कार्यक्रम’ (Single event/Bulk payment) के जरिए किया जाएगा, जिससे भ्रष्टाचार और देरी की संभावना कम होगी।
औद्योगिक इकोसिस्टम की मजबूती: 2016 की नीति के तहत जिन्होंने रिस्क लेकर फैक्ट्रियां लगाई थीं, उन्हें आर्थिक संबल मिलने से राज्य में बंद पड़ी इकाइयां फिर से शुरू हो सकती हैं।
रोजगार के नए अवसर: जब उद्योगों के पास फंड होगा, तो उत्पादन बढ़ेगा। उत्पादन बढ़ने का सीधा अर्थ है—स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों के नए मौके।
































