न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार में जमीन का विवाद सिर्फ़ दो भाइयों या दो पड़ोसियों के बीच की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक नासूर है जिसने दशकों से अदालतों को मुकदमों और गाँवों को रंजिशों से भर रखा है। हाल के दिनों में राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा के फैसलों और उनके सख्त तेवरों ने राज्य की प्रशासनिक मशीनरी और सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
विजय सिन्हा की यह सक्रियता केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है। बिहार में जमीन से जुड़ी जटिलताओं को सुलझाकर सरकार ‘सुशासन’ के दावों को नई मजबूती देना चाहती है। हालांकि, अधिकारियों का विरोध यह संकेत देता है कि सुधारों का रास्ता कांटों भरा है।
विजय सिन्हा ने साफ कर दिया है कि वे ‘पॉपुलैरिटी’ के लिए नहीं बल्कि ‘प्योरिटी’ (शुचिता) के लिए काम कर रहे हैं। लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब ये डिजिटल सुधार जमीनी स्तर पर बिना किसी ‘सुविधा शुल्क’ के लागू होंगे।
- ‘पारिवारिक बंटवारा’ अब एक क्लिक की दूरी पर
मंत्री के हालिया पोस्ट और बयानों में सबसे बड़ी घोषणा पारिवारिक दाखिल-खारिज (Mutation) को लेकर रही है। 27 दिसंबर 2025 को लागू की गई नई व्यवस्था के अनुसार:
एक आवेदन, पूरा समाधान: अब परिवार के सभी हिस्सेदारों को अलग-अलग दाखिल-खारिज कराने के लिए अंचल कार्यालयों (CO Office) के चक्कर नहीं काटने होंगे। एक ही साझा आवेदन के जरिए पूरे परिवार की जमीन की जमाबंदी अलग-अलग हो जाएगी।
मध्यस्थों का अंत: यह कदम सीधे तौर पर उन बिचौलियों और भ्रष्ट कर्मियों पर प्रहार है जो बंटवारे की प्रक्रिया को जटिल बनाकर जनता से अवैध वसूली करते थे।
- ‘राजस्व सेवा संघ’ बनाम ‘मंत्री’: संवैधानिक मर्यादा या भ्रष्टाचार पर पर्दा?
विजय सिन्हा के ‘जन-संवाद’ कार्यक्रमों और ऑन-द-स्पॉट कार्रवाई ने विभाग के अधिकारियों (BiRSA – Bihar Revenue Service Association) के साथ सीधा टकराव पैदा कर दिया है।
अधिकारियों की शिकायत: बिहार राजस्व सेवा संघ ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर मंत्री की भाषा और ‘पब्लिक हियरिंग’ में अधिकारियों को अपमानित करने का आरोप लगाया है। उनका तर्क है कि भूमि विवाद सदियों पुरानी समस्या है और इसके लिए केवल वर्तमान अधिकारियों को दोषी ठहराना गलत है।
विजय सिन्हा का रुख: मंत्री ने दो टूक कहा है—”जो गलत करेंगे, वे बचेंगे नहीं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘अराजकता’ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह लड़ाई अब ‘जनता की सहूलियत’ बनाम ‘सिस्टम की सुस्ती’ के बीच का संग्राम बन गई है।
- ‘लैंड बैंक’ और भविष्य की योजना
विकास के पहिये को रफ्तार देने के लिए मंत्री ने ‘लैंड बैंक’ (Land Bank) की अवधारणा को धरातल पर उतारा है। इसके तहत सरकारी ज़मीन से अतिक्रमण हटाकर उसे उद्योगों, सड़कों और स्कूलों के लिए सुरक्षित किया जा रहा है। साथ ही, 1 जनवरी 2026 से राजस्व अभिलेखों की सत्यापित नकल (Certified Copy) केवल ऑनलाइन मिलने की शुरुआत एक बड़ा डिजिटल माइलस्टोन साबित होगी।
मुख्य चुनौतियाँ:
ब्यूरोक्रेटिक रेजिस्टेंस : क्या मंत्री निचले स्तर के राजस्व कर्मचारियों (हल्का कर्मचारी) और सीओ के सिंडिकेट को तोड़ पाएंगे?
डिजिटल डिवाइड: ग्रामीण जनता के लिए पोर्टल का उपयोग करना अभी भी एक चुनौती है।
न्यायिक बोझ : ज़मीन के पुराने केस अभी भी लंबित हैं, जिनके समाधान के लिए केवल प्रशासनिक तेजी काफी नहीं होगी।

































