बिहार : सृजन घोटाले के आरोपी पर बड़ा एक्शन, CBI की चार्जशीट के बाद सरकार ने जब्त की पूर्व अधिकारी की पेंशन

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार के बहुचर्चित सृजन घोटाले (Srijan Scam) की फाइलें अभी बंद नहीं हुई हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘करप्शन पर जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत सामान्य प्रशासन विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। सरकार ने भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड के तत्कालीन बीडीओ (BDO) और अब सेवानिवृत्त अधिकारी चंद्रशेखर झा की पेंशन को जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई सीबीआई (CBI) की चार्जशीट और विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद की गई है।

साढ़े चार करोड़ से ज्यादा के गबन का आरोप मामला 2017 में उजागर हुए सृजन घोटाले से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि चंद्रशेखर झा जब पीरपैंती में प्रखंड विकास पदाधिकारी के पद पर तैनात थे, तब उन्होंने सरकारी पद का दुरुपयोग किया। आरोप है कि उन्होंने साजिश के तहत सरकारी खजाने से 4 करोड़ 52 लाख 88 हजार 246 रुपये की भारी-भरकम राशि अवैध तरीके से डायवर्ट की। यह पैसा अलग-अलग सरकारी मदों से चेक के जरिए ‘सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड, सबौर’ के बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया, जबकि सृजन संस्था को बैंकिंग लेन-देन का कोई अधिकार नहीं था।

पत्नी के नाम गाजियाबाद में खरीदा फ्लैट सीबीआई की जांच में यह बात भी सामने आई कि सरकारी पैसे की इस लूट का इस्तेमाल निजी संपत्ति बनाने में किया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, तत्कालीन बीडीओ ने घोटाले की रकम से अपनी पत्नी बबीता झा के नाम पर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (वसुंधरा) में एक फ्लैट बुक कराया और उसका भुगतान किया। सरकारी पैसे का यह निजी उपयोग जांच में एक अहम सबूत बना।

CBI की चार्जशीट बनी कार्रवाई का आधार इस मामले में सीबीआई ने साल 2018 में केस दर्ज किया था। लंबी जांच के बाद सीबीआई ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। पिछले साल 4 अक्टूबर को बिहार के कानून विभाग ने अभियोजन की मंजूरी दी थी। इसके बाद, भागलपुर के जिलाधिकारी ने 12 जुलाई को जांच रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग को सौंपी। विभाग ने आरोपी पूर्व अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन जवाब संतोषजनक न होने और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अब उनकी पेंशन रोकने (जब्त करने) का कड़ा फैसला लिया गया है।

नोटिस जारी सरकार के इस आदेश की कॉपी सीबीआई, भागलपुर डीएम और आरोपी चंद्रशेखर झा के धनबाद स्थित वर्तमान आवास पर भेज दी गई है। इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि सृजन घोटाले में शामिल अधिकारियों को रिटायरमेंट के बाद भी बख्शा नहीं जाएगा।