न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, कहलगांव
शुक्रवार को कहलगांव की सड़कों पर अफ़रातफ़री, गुस्सा और बर्बरता का नज़ारा देखने को मिला। करीब पांच घंटे तक चला भीषण ट्रैफिक जाम शहर की पूरी व्यवस्था को ठप कर गया और जब लोग परेशान थे, तब पुलिस का असली चेहरा सामने आया।
10 किलोमीटर लंबा जाम : मरीज, स्कूली बच्चे, ऑफिस जाने वाले सब फंसे
जाम की शुरुआत सुबह 11 बजे त्रिमुहान से एकचारी के बीच एशा डाइक रोड पर हुई। सड़क संकरी थी, आवाजाही अव्यवस्थित, और ट्रैफिक को कंट्रोल करने वाला कोई नजर नहीं आया। रेलवे स्टेशन से लेकर एनएच-80 तक लगभग 10 किलोमीटर लंबी लाइन लग गई। हैरानी की बात ये कि 112 नंबर की पुलिस गाड़ी भी उसी जाम में घंटों फंसी रही, लेकिन उसे निकालने के लिए पुलिस ने जो किया, वो शर्मनाक है।
पुलिस की बर्बरता :टोटो चालक को बीच सड़क पर पीटा
जब एक टोटो चालक पुलिस गाड़ी को साइड नहीं दे पाया, तो गुस्साए पुलिसकर्मी ने डंडा उठाया और बीच सड़क पर उसकी पिटाई कर दी। वीडियो वायरल हो चुका है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि कैसे पुलिस ने अपनी नाकामी का गुस्सा एक गरीब चालक पर उतारा। लोगों ने रोकने की कोशिश की, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। ये वही पुलिस है जो कानून की रक्षा करने की शपथ खाती है।
जनता का फूटा गुस्सा : “ट्रैफिक ठीक करो, लाठी नहीं चलाओ”
स्थानीय लोगों का कहना है कि कहलगांव की सड़कें महीनों से बदहाल हैं। एक दुकानदार ने बताया, ना सिग्नल, ना ट्रैफिक पुलिस, बस लाठी लेकर जनता पर टूट पड़ने वाले वर्दीवाले है।
प्रशासन की चुप्पी : एसडीपीओ ने फोन उठाना बंद किया
जब इस पूरे मामले में एसडीपीओ कल्याण आनंद से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने पहले कहा –”वीडियो देखकर बताऊंगा”। लेकिन उसके बाद उन्होंने कॉल रिसीव करना ही बंद कर दिया।
बड़ा सवाल… क्या ट्रैफिक कंट्रोल के नाम पर पुलिस अब आतंक बन चुकी है?
इस घटना ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि “क्या पुलिस कानून का पालन करवा रही है, या खुद कानून हाथ में ले रही है?” “कहलगांव में ट्रैफिक समस्या के समाधान के बजाय लाठियों से हुकूमत क्यों की जा रही है?”

































