बिहार का ‘एक्सप्रेसवे क्रांति’ मिशन: यूपी मॉडल पर आधारित विकास की नई पटकथा

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना

बिहार सरकार ने अपने ‘सात निश्चय-3’ के तहत राज्य में 5 बड़े एक्सप्रेसवे बनाने का निर्णय लिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके लिए केंद्र पर निर्भर रहने के बजाय राज्य सरकार खुद कर्ज लेकर और निजी साझेदारी (PPP) के जरिए इसका निर्माण कराएगी। 2030 तक इन एक्सप्रेसवे को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बिहार सरकार का यह कदम राज्य को ‘कंजम्पशन इकोनॉमी’ से ‘प्रोडक्शन इकोनॉमी’ की ओर ले जाने की कोशिश है। यदि सरकार समय सीमा (2030) के भीतर इसे पूरा कर लेती है, तो यह बिहार के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में बड़ी वृद्धि का कारक बनेगा। हालांकि, चुनौती समय पर जमीन अधिग्रहण और टोल दरों को तर्कसंगत बनाए रखने की होगी।

  1. पाँच प्रस्तावित कॉरिडोर: बिहार के भविष्य की रेखाएँ
    पटना-पूर्णिया: राजधानी को सीमांचल से जोड़ेगा।

बक्सर-भागलपुर: पश्चिम बिहार को पूर्वी बिहार से सीधे जोड़ेगा।

गोरखपुर-सिलीगुड़ी: उत्तर बिहार के लिए लाइफलाइन बनेगा।

रक्सौल-हल्दिया: नेपाल सीमा को सीधे बंदरगाह (Port) से जोड़ेगा।

वाराणसी-कोलकाता: राज्य के दक्षिणी हिस्से को दो बड़े व्यापारिक महानगरों से जोड़ेगा।

  1. मॉडल और कार्यप्रणाली
    स्वतंत्र प्राधिकार (UPEIDA की तर्ज पर): यूपी की तर्ज पर बिहार भी एक स्वतंत्र अथॉरिटी बना सकता है जो केवल एक्सप्रेसवे के निर्माण और प्रबंधन पर ध्यान देगी।

वित्तीय मॉडल: राज्य सरकार अपनी गारंटी पर वित्तीय संस्थानों से कर्ज लेगी। लागत की वसूली नेशनल हाईवे की तरह ‘टोल टैक्स’ के जरिए की जाएगी, ताकि खजाने पर बोझ न पड़े।

आम आदमी को ‘सीधे’ क्या फायदा होगा?
इस परियोजना के धरातल पर उतरने से आम आदमी की जिंदगी में ये 5 बड़े बदलाव आएंगे:

  1. सफर के समय में भारी कटौती: एक्सप्रेसवे की डिजाइन रफ्तार 120 किमी/घंटा होगी। उदाहरण के लिए, बक्सर से भागलपुर या पटना से पूर्णिया जाने में अभी जो 8-10 घंटे लगते हैं, वह घटकर 4-5 घंटे रह जाएंगे। यह आम यात्री के लिए समय और ईंधन दोनों की बचत है।
  2. किसानों और छोटे व्यापारियों की वैश्विक पहुंच: बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है। रक्सौल-हल्दिया और वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे बनने से बिहार के फल, सब्जियाँ और अनाज (जैसे मखाना या जर्दालु आम) चंद घंटों में बंदरगाहों या बड़े शहरों की मंडियों तक पहुँच सकेंगे। खराब होने वाले सामानों (Perishables) के लिए यह वरदान साबित होगा।
  3. औद्योगिक गलियारा और रोजगार: रिपोर्ट के अनुसार, एक्सप्रेसवे का मकसद केवल सड़क बनाना नहीं बल्कि औद्योगिक वातावरण को बेहतर करना है। इन सड़कों के किनारे ‘इंडस्ट्रियल क्लस्टर’ विकसित होंगे। इससे स्थानीय युवाओं को अपने ही राज्य में फैक्ट्रियों और लॉजिस्टिक हब में नौकरियां मिलेंगी, जिससे पलायन रुकेगा।
  4. रियल एस्टेट और जमीन की कीमतों में उछाल: जिन इलाकों से ये 6 या 8 लेन के एक्सप्रेसवे गुजरेंगे, वहां की जमीनों की कीमतें बढ़ेंगी। ग्रामीण इलाकों में छोटे-छोटे टाउनशिप और होटल/रेस्टोरेंट जैसे व्यवसाय पनपेंगे, जिससे स्थानीय लोगों की आय बढ़ेगी।
  5. सुरक्षित और आधुनिक यात्रा: ये एक्सप्रेसवे ‘एक्सेस कंट्रोल्ड’ (प्रवेश और निकास के लिए विशेष रैंप) होंगे। इससे आम सड़कों के मुकाबले दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी। साथ ही, इन पर यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं (विश्राम गृह, पेट्रोल पंप, ट्रॉमा सेंटर) उपलब्ध होंगी।