बिहार: 4 मई के बाद ‘सम्राट कैबिनेट’ का मेगा विस्तार, बंगाल चुनाव के नतीजों से जुड़ा है खास कनेक्शन

बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार अब अपने मंत्रिमंडल के विस्तार के लिए ‘मिशन मोड’ में है। हालांकि, इस विस्तार के लिए 4 मई की तारीख बेहद अहम मानी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी नेतृत्व वाले इस कैबिनेट विस्तार के पीछे बंगाल चुनाव की रणनीतियां और पार्टी का ‘सेलिब्रेशन प्लान’ एक बड़ी वजह है।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बीजेपी के शीर्ष नेता फिलहाल पश्चिम बंगाल, असम और दक्षिण के राज्यों में चुनावी प्रचार में व्यस्त हैं। बीजेपी चाहती है कि बिहार के इस पहले ‘बीजेपी नेतृत्व वाले’ शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय नेतृत्व की मौजूदगी रहे, जो फिलहाल बंगाल चुनाव के चलते संभव नहीं है। बीजेपी को उम्मीद है कि 4 मई को असम के साथ-साथ बंगाल के नतीजों में भी पार्टी शानदार प्रदर्शन करेगी। ऐसे में बिहार मंत्रिमंडल का विस्तार एक ‘विक्ट्री सेलिब्रेशन’ की तरह आयोजित करने की योजना है। एनडीए चाहती है कि जब नए मंत्री शपथ लें, तो मंच पर गठबंधन की एकजुटता और ताकत साफ दिखे, जो चुनावी नतीजों के बाद एक नए उत्साह के साथ संभव होगी।

कैसा होगा नई कैबिनेट का स्वरूप?
नई सरकार के गठन में ‘निरंतरता’ और ‘नवाचार’ का संतुलन देखने को मिलेगा :-
पुराने चेहरों पर भरोसा: संभावना है कि नीतीश कुमार के पिछले मंत्रिमंडल के लगभग 70% मंत्रियों को उनके अनुभव के आधार पर बरकरार रखा जाएगा।
30% नए समीकरण: शेष 30 फीसदी पदों पर नए चेहरों को जगह दी जाएगी, जिसमें जातीय समीकरण और क्षेत्रीय बैलेंस का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
विभागों में फेरबदल: हालांकि पुराने मंत्री वापस आएंगे, लेकिन उनके विभागों में बड़े बदलाव हो सकते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और वित्त जैसे भारी-भरकम विभागों के बंटवारे पर मंथन जारी है।

सहयोगियों के बीच सत्ता का गणित
सम्राट चौधरी की कैबिनेट में बीजेपी के साथ-साथ छोटे दलों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण होगी :-
एलजेपी (रामविलास): चिराग पासवान की पार्टी को 2 मंत्री पद मिलने की उम्मीद है।
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM): जीतनराम मांझी की पार्टी को 1 पद।
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM): उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को 1 पद।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि अब बिहार में सिर्फ एक मॉडल नहीं, बल्कि “मोदी और नीतीश मॉडल” की साझा नीति पर सरकार चलेगी। साथ ही, कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए किसी भी मंत्री को दो से अधिक विभाग नहीं दिए जाने का नियम भी लागू हो सकता है।