परबत्ता (खगड़िया)।नगर पंचायत परबत्ता में मंगलवार को भारतरत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई।यह शोभा यात्रा अनुसूचित टोला सिराजपुर से प्रारंभ होकर करना चौक तक गई तथा वहां से लौटते हुए प्रखंड कार्यालय स्थित बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ संपन्न हुई।पूरे शोभायात्रा के दौरान जय भीम का नारों से वातावरण गुंजायमान रहा। इस शोभा यात्रा के समापन के बाद एक परिचर्चा कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।जिसमें वक्ताओं ने बाबा साहेब के विचारों, उनके संघर्ष और समाज में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।इस अवसर पर नगर सभापति प्रतिनिधि रंजीत कुमार साह, प्रखंड विकास पदाधिकारी संतोष कुमार पंडित, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी प्रदीप कुमार, राजद नेता अखिलेश्वर दास, भाकपा माले नेता अरुण दास,राजद नेता नारद यादव, शिक्षक राजेश दास, शंकर दास,अभय दास,सिकंदर दास, युगल किशोर साह, मणिकांत साह, मकसूद आलम, प्रमोद साह,वार्ड पार्षद पिंटू ठाकुर, वार्ड पार्षद नवीन कुमार,वार्ड पार्षद प्रतिनिधि विकास कुमार,राजीव कुमार उर्फ विशोख मंडल, संजय पासवान, अंजय शर्मा,राजीव दास,पूर्व सरपंच किशोर दास सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर, जिन्हें बाबा साहब कहा जाता है, का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में एक दलित परिवार में हुआ।

बचपन से ही उन्होंने जातिगत भेदभाव का सामना किया, पर शिक्षा को ही मुक्ति का रास्ता माना। उन्होंने मुंबई, अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा ली।अर्थशास्त्र और कानून में डॉक्टरेट करने वाले वे पहले भारतीयों में थे। भारत लौटकर उन्होंने दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष शुरू किया। 1927 का महाड़ सत्याग्रह और 1930 का नासिक काला राम मंदिर प्रवेश आंदोलन सामाजिक समानता की दिशा में बड़े कदम थे।स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री के तौर पर बाबा साहब को संविधान सभा की प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने ऐसा संविधान दिया जो समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व पर टिका है। महिला अधिकार,श्रम कानून और हिंदू कोड बिल में भी उनका योगदान अहम रहा। 14 अक्टूबर 1956 को उन्होंने लाखों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया और सामाजिक क्रांति की नई राह खोली। 6 दिसंबर 1956 को उनका परिनिर्वाण हुआ। बाबा साहब का जीवन अन्याय के खिलाफ ज्ञान, संघर्ष और करुणा की मिसाल है। उन्हें 1990 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।मौके पर उपस्थित लोगों ने बाबा साहेब के आदर्शों पर चलने और सामाजिक समानता एवं शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया।
































