बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र में सरकार द्वारा लिए गए फैसले और पारित किए गए कानून सीधे तौर पर राज्य के आम नागरिकों, युवाओं, शिक्षकों, गरीबों और मरीजों से जुड़े हुए हैं। सदन में राजनीतिक बहस और विपक्ष के हंगामे के बीच कई ऐसे नीतिगत फैसले लिए गए हैं, जो आम आदमी के रोजमर्रा के जीवन, जेब और उनके अधिकारों पर सीधा असर डालेंगे।
न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
आइए आसान और सरल भाषा में समझते हैं कि इस विधानसभा सत्र से आम जनता के लिए क्या-क्या महत्वपूर्ण बातें निकलकर आई हैं:
- युवाओं और शिक्षकों के लिए खुशखबरी: इस महीने भर्ती, जुलाई अंत तक तबादला पोर्टल
शिक्षक अभ्यर्थियों और राज्य में कार्यरत शिक्षकों के लिए यह सत्र तीन बड़ी राहत लेकर आया है:
इसी महीने TRE-4 भर्ती: राज्य सरकार ने घोषणा की है कि चौथे चरण की शिक्षक भर्ती (TRE-4) के लिए अधिसूचना इसी चालू महीने में जारी कर दी जाएगी। इससे लाखों बेरोजगार युवाओं को नौकरी पाने का अवसर मिलेगा।
शिक्षकों का ट्रांसफर आसान: अपनी पदस्थापना का इंतजार कर रहे कार्यरत शिक्षकों के लिए जुलाई के अंत तक विशेष ट्रांसफर पोर्टल खोल दिया जाएगा, जिससे वे अपने मनचाहे जिले या क्षेत्र में तबादले के लिए आवेदन कर सकेंगे।
पेड़ों के नीचे चल रहे 2,996 स्कूलों को अपनी जमीन: राज्य के लगभग 3,000 प्राथमिक, मध्य और उच्च माध्यमिक स्कूल जो फिलहाल बिना इमारत के या पेड़ों के नीचे चल रहे हैं, उन्हें अगले 6 महीने में जमीन मुहैया कराई जाएगी।
15 अगस्त तक कंप्यूटर चालू होंगे: स्कूलों में रखे धूल फांक रहे कंप्यूटरों को 15 अगस्त तक चालू करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए बीपीएससी को 1,038 पदों की अधियाचना भेजी गई है। जब तक स्थायी बहाली नहीं होती, 1 महीने में प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) से शिक्षकों की तैनाती होगी। - ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप रखने पर अब जेल और जुर्माना, 1867 का पुराना कानून खत्म
सरकार ने 1867 के पुराने जुआ कानून को खत्म कर ‘बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक 2026’ पास किया है।
आम परिवार पर असर: अब मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी डिजिटल डिवाइस में सट्टेबाजी या ऑनलाइन जुए का ऐप (Online Gambling App) रखना और चलाना कानूनन अपराध होगा। इससे ऑनलाइन गेमिंग की लत में फंसकर बर्बाद हो रहे युवाओं और परिवारों को वित्तीय व मानसिक क्षति से बचाया जा सकेगा। - जमीन का म्यूटेशन आसान, 15 अगस्त को 30 हजार बेघर गरीबों को मिलेगी जमीन
जमीन-जायदाद से जुड़े दो बड़े फैसले आम लोगों के हित में लिए गए हैं:
30 हजार गरीबों को जमीन का पर्चा: आगामी 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) को राज्य के करीब 30 हजार भूमिहीन गरीब परिवारों को अपना घर बनाने के लिए वास भूमि का सरकारी पर्चा बांटा जाएगा।
गरीबों का म्यूटेशन बिल्कुल फ्री: राज्य में जमीन का दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) कराने के लिए ₹200 का मामूली शुल्क तय किया गया है। हालांकि, सरकार द्वारा गरीबों को बांटी जाने वाली जमीन के म्यूटेशन के लिए कोई पैसा नहीं (₹0) लिया जाएगा। - फैक्ट चेक: क्या गांवों में गरीबों पर लगा नया टैक्स? जानिए पूरी सच्चाई
सदन के भीतर विपक्ष के हंगामे के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उप-मुख्यमंत्री विजय चौधरी ने ग्रामीण टैक्स पर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है:
गरीबों से कोई नया होल्डिंग टैक्स नहीं: गांवों में गरीबों से किसी भी तरह का नया टैक्स लेने की बात पूरी तरह अफवाह और निराधार है।
पानी और कचरा शुल्क पुराना ही है: गांवों में नल-जल योजना और कचरा उठाने (सफाई) के लिए पहले से लिया जा रहा ₹30-₹30 का शुल्क ही लिया जा रहा है। इसमें एक भी रुपये की बढ़ोतरी नहीं की गई है।
कमर्शियल भवनों का प्रस्ताव: होल्डिंग टैक्स का नया प्रस्ताव केवल ₹5,000 तक टैक्स देने की क्षमता वाले बड़े व्यावसायिक या संपन्न भवनों के लिए है, आम गरीब ग्रामीणों के लिए नहीं।
सदन में चर्चा के बिना लागू नहीं: सरकार ने भरोसा दिलाया है कि ग्रामीण मकानों व दुकानों पर शुल्क का कोई भी विषय बिना विधानसभा में पूरी चर्चा और संशोधन के लागू नहीं होगा। - बाहर के विशेषज्ञ डॉक्टरों को बिहार में काम की छूट, मरीजों को मिलेगा बेहतर इलाज
अस्पतालों में डॉक्टरों और नर्सों की कमी दूर करने के लिए दो नए मेडिकल बिल पास किए गए हैं:
बाहरी डॉक्टरों को सीधी छूट: दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड विशेषज्ञ डॉक्टरों और नर्सों को बिहार में बिना नए पंजीकरण के काम करने की छूट दे दी गई है। इससे बिहार के सरकारी व निजी अस्पतालों में अच्छे डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी और आम मरीजों को इलाज के लिए बाहर नहीं भागना पड़ेगा।
नर्सों के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन: नर्सिंग पेशेवरों को अब कागजी झंझटों से मुक्ति मिलेगी, वे केवल ऑनलाइन सेल्फ-अटेस्टेड आवेदन जमा कर सकेंगे। - तीन बंद चीनी मिलें जल्द शुरू होंगी, 25 नई मिलों के लिए जमीन की तलाश
किसान और मजदूरों के रोजगार के लिए उत्तर बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने का फैसला लिया गया है:
गोपालगंज, सकरी और रैयाम चीनी मिलें: केंद्र सरकार की संस्था ‘इंडियन पोटाश लिमिटेड’ (IPL) के साथ करार कर बंद पड़ी गोपालगंज, सकरी और रैयाम चीनी मिलों को दोबारा चालू किया जा रहा है।
25 नई चीनी मिलें: राज्य भर में 25 नई चीनी मिलें लगाने के लिए जिलाधिकारियों (DM) से जमीन की रिपोर्ट मांगी गई है। इससे गन्ना किसानों को फसल का सही दाम मिलेगा और स्थानीय युवाओं को नौकरी के लिए पलायन नहीं करना पड़ेगा। - नल-जल योजना की देखरेख फिर से वार्ड सदस्यों के हाथ में देने पर विचार
गांवों में नल-जल योजना के सही संचालन और टूटी पाइपलाइनों को ठीक कराने की जिम्मेदारी फिर से पंचायतों के वार्ड सदस्यों को सौंपने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए पंचायती राज और पीएचईडी विभाग मिलकर निर्णय लेंगे ताकि ग्रामीण जनता को पीने का साफ पानी नियमित मिलता रहे।
































