बिहार के सरकारी अस्पतालों में इलाज की सूरत बदलेगी : 7 दिनों में शुरू होगी ICU सेवा, बिना ठोस कारण मरीजों को नहीं कर सकेंगे रेफर

बिहार की सम्राट सरकार ने राज्य की आम जनता को स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए एक ऐतिहासिक और बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी जिला अस्पतालों को आगामी 7 दिनों के भीतर हर हाल में आईसीयू (ICU) और 24 घंटे इमरजेंसी सेवाएं सुचारू रूप से शुरू करने का सख्त निर्देश दिया है।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
इसके साथ ही, अब सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को बिना किसी पर्याप्त या ठोस कारण के उच्च संस्थानों (जैसे PMCH, NMCH या AIIMS) के लिए रेफर नहीं किया जा सकेगा। स्वास्थ्य विभाग के इस कड़े फैसले का सबसे बड़ा फायदा राज्य के उन गरीब और मध्यमवर्गीय आम नागरिकों को मिलेगा, जिन्हें मामूली दिक्कतों या आपातकालीन स्थिति में तुरंत बड़े शहरों की ओर भागना पड़ता था।

आम नागरिकों को होने वाले 5 बड़े फायदे
स्थानीय स्तर पर मिलेगा वेंटिलेटर और ICU का इलाज:
अब तक जिला अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं न होने के कारण गंभीर मरीजों को तुरंत पटना रेफर कर दिया जाता था, जिससे रास्ते में ही कई मरीजों की जान पर बन आती थी। अब 7 दिनों के भीतर जिला स्तर पर ही ICU सेवाएं शुरू होने से दिल का दौरा, एक्सीडेंट या अन्य गंभीर स्थितियों में मरीजों को अपने ही जिले में जीवन रक्षक इलाज मिल सकेगा।

अनावश्यक ‘रेफरल’ के मानसिक और आर्थिक शोषण से मुक्ति:
अक्सर देखा जाता है कि जिला अस्पतालों के डॉक्टर जिम्मेदारी से बचने के लिए मरीजों को रेफर कर देते हैं। सरकार के नए नियम के मुताबिक, अब डॉक्टर अपनी मर्जी से रेफर नहीं कर पाएंगे। उन्हें मरीज को रेफर करने से पहले स्पष्ट और लिखित कारण दर्ज करना होगा कि संबंधित इलाज या विशेषज्ञ उनके अस्पताल में क्यों उपलब्ध नहीं है। इससे मरीजों का समय और पैसा दोनों बचेगा।

डिजिटल ट्रैकिंग से बढ़ेगी पारदर्शिता:
अब मरीजों का पंजीकरण, ओपीडी (OPD), आईपिडी (IPD), जांच, दवा और रेफरल का पूरा विवरण ‘भाव्या’ पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज होगा। मरीजों का एक इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (EHR) बनेगा। डिजिटल मॉनिटरिंग होने से डॉक्टरों की मनमानी रुकेगी और मरीजों को निश्चित रूप से दवाइयाँ और इलाज मिलेगा।

24 घंटे तैनात रहेंगे डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ:
अस्पतालों में डॉक्टरों की ड्यूटी रोस्टर की ऑनलाइन एंट्री अनिवार्य कर दी गई है। इससे आम जनता को अस्पताल पहुंचने पर ‘डॉक्टर साहब गायब हैं’ जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। 24 घंटे इमरजेंसी वार्ड में स्वास्थ्य कर्मी मुस्तैद रहेंगे।

मरीजों की यात्रा पर रखी जाएगी नजर:
यदि किसी मरीज को बेहद गंभीर स्थिति में रेफर किया भी जाता है, तो उसकी पूरी पेशेंट यात्रा की कंप्यूटरीकृत प्रति मरीज या उसके परिजनों को दी जाएगी। इसके अलावा, जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी इस पूरी व्यवस्था की निगरानी करेगी, जिससे गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।

सात निश्चय-3 के तहत ‘सुलभ स्वास्थ्य’ का संकल्प
स्वास्थ्य विभाग ने यह विस्तृत दिशानिर्देश राज्य सरकार के ‘सात निश्चय – 3’ के तहत संचालित ‘सुलभ स्वास्थ्य, सुरक्षित जीवन’ के संकल्प को पूरा करने के लिए जारी किया है। सभी सिविल सर्जनों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि रेफरल व्यवस्था की व्यवस्था और निगरानी में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राज्य स्तर पर भी एक नोडल पदाधिकारी तैनात किया गया है जो इसकी रोज़ाना समीक्षा करेगा।