सम्राट कैबिनेट के 25 बड़े फैसले: जमीन मापी शुल्क हुआ दोगुना, सामाजिक सुरक्षा के लिए ₹3662 करोड़ और चार शहरों को सीवरेज-जलापूर्ति का तोहफा। जानिए कि इन तमाम फैसलों का आम आदमी पर कैसा और क्या रहेगा सीधा असर। सरकार के इन कदमों की वजह भी जानिए।
न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी नीतिगत खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की बैठक में कुल 25 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई है। इस बैठक का सबसे बड़ा और दूरगामी फैसला राज्य में जारी ‘बिहार राज्य फसल सहायता योजना’ को बंद कर उसकी जगह केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)’ को पुनर्जीवित करना है। इसके साथ ही सरकार ने राजस्व बढ़ाने के लिए जमीन मापी शुल्क में भारी बढ़ोतरी की है और सामाजिक सुरक्षा व शहरी बुनियादी ढांचे के लिए खजाने का मुंह खोल दिया है।
जानिये कि क्या हैं सरकार के फैसले और आप पर उसका क्या प्रभाव रहेगा
- फसल सहायता से ‘फसल बीमा’ की ओर वापसी: एक बड़ा नीतिगत बदलाव
बिहार सरकार ने खरीफ 2018 मौसम से केंद्र की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) से किनारा कर लिया था और उसके स्थान पर अपनी खुद की ‘बिहार राज्य फसल सहायता योजना’ लागू की थी। अब करीब 8 साल बाद, रबी मौसम 2026-27 से राज्य सरकार पुनः प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लागू करने जा रही है।
इस फैसले का सबसे बड़ा प्रभाव ‘सीमारहित सुरक्षा’ के रूप में दिखेगा। पुरानी राज्य योजना में बीमित भूमि की एक निश्चित सीमा तय थी, जिससे बड़े और मध्यम किसानों को पूरा लाभ नहीं मिल पाता था। अब नई व्यवस्था में बीमित भूमि की कोई अधिकतम सीमा (अधिसीमा) नहीं होगी, जिससे राज्य के बड़े जोत वाले किसानों को सीधा फायदा मिलेगा। कैबिनेट विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी के अनुसार, इस योजना के तहत किसानों को उनकी कृषि लागत के समतुल्य फसल क्षति का वास्तविक और वैज्ञानिक मूल्यांकन के आधार पर भुगतान सुनिश्चित हो सकेगा, जिससे केंद्रीय वित्तीय मदद का रास्ता भी साफ होगा। - आम जनता पर वित्तीय बोझ: जमीन मापी का शुल्क हुआ दोगुना से अधिक
आम जनता की जेब पर सीधा असर डालने वाले एक अन्य फैसले में कैबिनेट ने शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में रैयती भूमि की मापी (नापी) के लिए लगने वाले सरकारी शुल्क में भारी वृद्धि कर दी है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
संशोधित नियमों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों (नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत) में अब प्रति खेसरा मापी के लिए न्यूनतम शुल्क 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये कर दिया गया है, जबकि इसके लिए अधिकतम शुल्क की सीमा 8,000 रुपये तय की गई है। इसी प्रकार, ग्रामीण क्षेत्रों में यह न्यूनतम शुल्क 500 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये और अधिकतम सीमा 4,000 रुपये कर दी गई है। तत्काल (इमरजेंसी) मापी की व्यवस्था में शहरी क्षेत्रों में प्रति खेसरा शुल्क 4,000 रुपये (अधिकतम सीमा 16,000 रुपये) और ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल मापी शुल्क 2,000 रुपये (अधिकतम सीमा 8,000 रुपये) निर्धारित किया गया है। इस शुल्क वृद्धि से जहां एक तरफ राज्य सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी, वहीं ग्रामीण इलाकों के छोटे भूमि विवादों को कानूनी रूप से सुलझाने में आम जनता पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा। - सामाजिक सुरक्षा पेंशनर्स को बड़ी राहत: ₹3,662 करोड़ की अग्रिम राशि स्वीकृत
कैबिनेट ने राज्य के सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारकों के लिए बड़ा बजटीय आवंटन किया है। इसके तहत मई, जून और जुलाई 2026 के त्रैमासिक भुगतान के लिए कुल 3,662 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि बिहार आकस्मिकता निधि (Bihar Contingency Fund) से स्वीकृत की गई है।
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि अब हर महीने की 10 तारीख को लाभार्थियों के खाते में पेंशन राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे ट्रांसफर कर दी जाएगी। इस फैसले से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय निशक्तता पेंशन, लक्ष्मीबाई सामाजिक सुरक्षा पेंशन, बिहार निशक्तता पेंशन और मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के तहत लाभ पा रहे लाखों बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों को समय पर ₹1,100 की मासिक राशि मिल सकेगी। - शहरी कायाकल्प (AMRUT 2.0): 4 बड़े शहरों के लिए ₹736 करोड़
केंद्र प्रायोजित ‘अटल नवीकरण एवं शहरी परिवर्तन मिशन’ (AMRUT 2.0) के तहत नगर विकास एवं आवास विभाग के माध्यम से बिहार के चार प्रमुख शहरों में जलापूर्ति और सीवरेज नेटवर्क (STP) के लिए कुल ₹736.82 करोड़ की प्रशासनिक मंजूरी दी गई है।
इसके तहत सबसे बड़ी राशि बेगुसराय को मिली है, जहां सीवरेज नेटवर्क और एसटीपी निर्माण पर ₹375.86 करोड़ खर्च किए जाएंगे। वहीं, हाजीपुर में जलापूर्ति परियोजना के लिए ₹131.88 करोड़, सहरसा जलापूर्ति परियोजना के लिए ₹127.45 करोड़, तथा बिहारशरीफ में आईडी और एसटीपी निर्माण के लिए ₹101.63 करोड़ की योजनाओं को हरी झंडी दी गई है। इसके अलावा, मंत्रिमंडल ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए 1 जुलाई से लागू होने वाली “विकसित भारत-जी राम जी योजना (बिहार-2026)” को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ग्रामीणों को 125 दिनों की विस्तारित मजदूरी रोजगार गारंटी प्रदान की जाएगी।
बिहार कैबिनेट के ये फैसले स्पष्ट करते हैं कि राज्य सरकार इस समय दोहरे मोर्चे पर काम कर रही है। पहला- केंद्र सरकार की योजनाओं (जैसे पीएम फसल बीमा और अमृत 2.0) के साथ पूरी तरह तालमेल बिठाना, जिससे केंद्रीय फंड का अधिकतम लाभ उठाया जा सके। दूसरा- जमीन मापी जैसे शुल्कों में वृद्धि कर राज्य का आंतरिक राजस्व मजबूत करना। फसल बीमा योजना में जमीन की अधिकतम सीमा हटाना सीधे तौर पर मंझोले और बड़े किसानों को साधने की कोशिश है। वहीं, समय पर पेंशन और अतिरिक्त रोजगार गारंटी के जरिए ग्रामीण मोर्चे पर असंतोष को थामने का सीधा प्रयास किया गया है।
































