बिहार के नगर निकायों में टेंडर माफिया और सीनियर अफसरों की साठगांठ का एक ऐसा सनसनीखेज सिंडिकेट सामने आया है, जिसने प्रशासनिक महकमे को हिलाकर रख दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और निगरानी विभाग की समानांतर जांच में यह साफ हुआ है कि टेंडर किंग रिशुश्री का रसूख सिर्फ ठेके लेने तक नहीं था, बल्कि वह मोटी रकम के दम पर मनचाहे अफसरों को नगर आयुक्त की कुर्सी पर बैठवाता था और फिर उन्हीं के जरिए करोड़ों के फर्जी भुगतान का खेल खेलता था।
न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
भ्रष्टाचार के जांच की आंच अब सीतामढ़ी और मधुबनी से होते हुए सहरसा नगर निगम तक पहुंच चुकी है। जांच एजेंसियों के हाथ लगे दस्तावेजों के मुताबिक, इस सिंडिकेट का सबसे बड़ा मोहरा बिहार प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी मुमुक्षु चौधरी बने। ईडी की छापेमारी और पूछताछ में यह बात सामने आई है कि रिशुश्री ने मुमुक्षु चौधरी को नगर निगम सीतामढ़ी के नगर आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार दिलवाने के लिए पटना में बैठे उच्चाधिकारियों को कथित तौर पर 25 लाख रुपए की घूस दी थी। इस निवेश की भरपाई के लिए एक शातिर फार्मूला अपनाया गया। सीतामढ़ी में रिशुश्री को दिए गए स्वच्छता टेंडर से जो भारी मुनाफा हुआ, उसी से इस 25 लाख रुपए की घूस राशि को एडजस्ट किया गया। मुमुक्षु चौधरी के अलग-अलग पोस्टिंग के दौरान सीतामढ़ी में 4 करोड़, सहरसा में 5 करोड़ और मधुबनी में 34 लाख रुपए के सफाई ठेके रिशुश्री के सिंडिकेट को बांटे गए।
सहरसा नगर निगम में बैन कंपनियों को भी करोड़ों का फर्जी भुगतान
इधर, पटना से सहरसा पहुंची निगरानी विभाग की टीम ने नगर निगम के दफ्तर में धावा बोलकर कई महत्वपूर्ण फाइलें जब्त की हैं और उन्हें जांच के लिए पटना मुख्यालय मंगवा लिया है। निगरानी की जांच में यह गंभीर वित्तीय अनियमितता सामने आई है कि साल 2025 में जिन कंपनियों के खिलाफ केस दर्ज था और जिन्हें ब्लैकलिस्ट कर भुगतान रोकने की सख्त सलाह दी गई थी, उन्हें भी अफसरों ने आंख मूंदकर करोड़ों का भुगतान कर दिया। वर्तमान नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा के कार्यकाल में भी रिशुश्री की कंपनी ‘मातृश्वा इंफ्रा सर्विसेज प्रा. लि.’ को छठ घाट की साफ-सफाई के नाम पर करीब 98 लाख रुपए का संदिग्ध भुगतान किया गया, जिसकी फाइलें अब विजिलेंस के पास हैं।
मेयर के पूर्व पीए की पत्नी के खाते में जाता था रिश्वत का पैसा
यह सिंडिकेट सिर्फ अफसरों और ठेकेदार तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें स्थानीय जन प्रतिनिधियों के करीबी भी शामिल थे। सहरसा में मुमुक्षु चौधरी के कार्यकाल के दौरान रिशुश्री की सिंडिकेट कंपनी ‘एआईएम ऑफ पीपल कंसोर्टियम’ को 1 करोड़ 48 लाख रुपए का सफाई ठेका बेहद बढ़ा-चढ़ाकर दिया गया। इस खेल का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इस ठेकेदार कंपनी द्वारा हर महीने सहरसा नगर निगम के मेयर के पूर्व निजी सचिव राजीव झा की पत्नी की शेल कंपनी ‘नारी शक्ति इन्फ्राटेक’ के बैंक खाते में मोटी रकम कमीशन के तौर पर ट्रांसफर की जाती थी। इस खेल में मेयर, उप-मेयर और सशक्त कमेटी के सदस्यों की भूमिका की भी जांच हो रही है।
तीन नगर आयुक्तों की भूमिका संदिग्ध, 1999 से अब तक के कार्यकाल की जांच शुरू
निगरानी और ईडी की रडार पर इस वक्त सहरसा के तीन नगर आयुक्त—अनुभूति श्रीवास्तव, मुमुक्षु चौधरी और प्रभात कुमार झा आ चुके हैं। इसके साथ ही ईडी अब मुमुक्षु चौधरी के साल 1999 में सरकारी सेवा ज्वाइन करने के बाद से लेकर अब तक के पूरे ट्रैक रिकॉर्ड को खंगाल रही है, जिसमें वे डिप्टी कलेक्टर, बीडीओ, कार्यपालक पदाधिकारी और डीआरडीए निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। जांच एजेंसियां इस बात का सुराग लगा रही हैं कि नगर विकास विभाग की तरह रिशुश्री के इस सिंडिकेट ने ग्रामीण विकास और सामान्य प्रशासन विभाग में भी तो अपनी जड़ें नहीं जमा रखी थीं। आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़ी गिरफ्तारियां संभावित हैं।
































