बिहार के किसानों के लिए बड़ी राहत: केंद्र ने गेहूं खरीद का लक्ष्य 10 गुना बढ़ाया, अब ₹2585 की दर से होगी रिकॉर्ड खरीदारी

बिहार के गेहूं उत्पादक किसानों के लिए केंद्र सरकार ने राहत का बड़ा पिटारा खोल दिया है। राज्य में गेहूं खरीद की सुस्त रफ्तार और किसानों की बढ़ती चिंताओं को देखते हुए केंद्र ने खरीद के लक्ष्य में ऐतिहासिक 10 गुना बढ़ोतरी कर दी है। पहले जहाँ राज्य के लिए महज 18 हजार मीट्रिक टन का मामूली लक्ष्य रखा गया था, उसे अब बढ़ाकर सीधे 1.80 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
सरकार के इस फैसले से राज्य के हजारों किसानों को सीधे तौर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ मिलना तय हो गया है।

बिचौलियों के चंगुल से बचेंगे किसान
वर्तमान में खुले बाजार में गेहूं की कीमतें ₹2200 से ₹2400 प्रति क्विंटल के आसपास बनी हुई हैं, जबकि सरकार ने गेहूं के लिए ₹2585 प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य तय किया है। लक्ष्य कम होने के कारण अब तक पैक्स (PACS) और व्यापार मंडल किसानों से गेहूं खरीदने में हिचकिचा रहे थे, जिसका फायदा उठाकर बिचौलिये किसानों से कम कीमत पर अनाज खरीद रहे थे। अब लक्ष्य में बड़ी वृद्धि होने से सभी 4645 क्रय केंद्रों पर खरीदारी तेज होगी, जिससे किसानों को प्रति क्विंटल ₹200 से ₹300 तक का सीधा मुनाफा होगा।

48 घंटे में भुगतान और व्यापक पहुंच
सहकारिता विभाग ने नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए कमर कस ली है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि गेहूं बेचने के 48 घंटे के भीतर किसानों का भुगतान उनके बैंक खातों में सुनिश्चित किया जाए। नए लक्ष्य के तहत सहकारिता विभाग को 1.30 लाख मीट्रिक टन और भारतीय खाद्य निगम (FCI) को 50 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विशेष रूप से मगध और शाहाबाद जैसे इलाकों के किसानों को इसका सबसे अधिक लाभ मिलेगा, जहाँ अभी फसल की कटनी का काम जोरों पर है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी खरीद का दायरा बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा। राज्य में इस वर्ष लगभग 75 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन का अनुमान है। ऐसे में खरीद का लक्ष्य बढ़ाना उन छोटे किसानों के लिए संजीवनी जैसा है जो अपनी उपज को सुरक्षित और उचित दाम पर बेचना चाहते थे। हालांकि, गेहूं उत्पादकों के लिए स्थिति साफ हो गई है, लेकिन मसूर की सरकारी खरीद में आ रही तकनीकी अड़चनों को दूर करना अब भी एक चुनौती बनी हुई है, जिस पर किसानों की नजरें टिकी हैं।