परबत्ता: उमानाथ मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन परीक्षित प्रसंग का हुआ वर्णन

परबत्ता। प्रखंड अंतर्गत पिपरालतीफ पंचायत के कूढा धार स्थित उमानाथ मंदिर परिसर में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक श्री दुबे महाराज जी ने मुख्य रूप से राजा परीक्षित से जुड़े प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।कथा की शुरुआत परीक्षित जन्म प्रसंग से हुई। कथा वाचक ने बताया कि जब अश्वत्थामा ने क्रोधवश अभिमन्यु की गर्भवती पत्नी उत्तरा के गर्भ पर ब्रह्मास्त्र चलाया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से गर्भ में पल रहे बालक परीक्षित की रक्षा की। इस प्रकार परीक्षित जन्म से ही भगवान की विशेष कृपा के पात्र बने।इसके बाद परीक्षित का शाप प्रसंग का वर्णन किया गया। वन में प्यास और थकान से व्याकुल होकर राजा परीक्षित ऋषि शमीक के आश्रम पहुंचे। ऋषि के ध्यान में लीन रहने से क्रोधित होकर उन्होंने उनके गले में मरा हुआ साँप डाल दिया। इस घटना से क्रोधित ऋषि पुत्र श्रृंगी ने परीक्षित को शाप दिया कि सातवें दिन तक्षक नाग के डसने से उनकी मृत्यु होगी।कथा में आगे भागवत की रचना का कारण बताया गया। मृत्यु निकट जानकर परीक्षित ने राजपाट त्याग दिया और गंगा तट पर बैठकर मोक्ष का मार्ग पूछा। तब शुकदेव जी ने उन्हें सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा सुनाई, जिससे उन्हें आत्मज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति हुई।कथा-प्रवचन में हजारों की संख्या महिला पुरूष श्रोता मौजूद थै।