बिहार सरकार ने राज्य के शहरीकरण को व्यवस्थित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। उपमुख्यमंत्री सह नगर विकास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट कर दिया है कि अब शहरों के बाहरी इलाकों में अपनी मर्जी से ‘बेतरतीब निर्माण’ (Unplanned Construction) करना मुमकिन नहीं होगा। सरकार ने राज्य के 43 आयोजना क्षेत्रों (Planning Areas) के लिए मास्टर प्लान लागू करने का फैसला लिया है, जो बिहार के शहरी विकास की दिशा बदल सकता है।
न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
अब तक शहरों के बाहरी इलाकों (Periphery) में लोग बिना किसी नक्शे या सरकारी अनुमति के मकान और व्यावसायिक इमारतें खड़ा कर लेते थे, जिससे जल निकासी और चौड़ी सड़कों का भविष्य में संकट पैदा हो जाता है।
नया नियम: एक साल के भीतर सभी जिला मुख्यालयों सहित 43 शहरों में मास्टर प्लान लागू होगा। इसके बाद किसी भी निर्माण के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी।
फायदा: इससे शहरों में आधारभूत संरचना (Infrastructure), चौड़ी सड़कें, व्यवस्थित पार्क और सीवरेज सिस्टम का विकास सुनियोजित ढंग से हो सकेगा।
पटना मेट्रो: भूतनाथ से मलाही पकड़ी तक जल्द दौड़ेगी ट्रेन
राजधानी पटना के निवासियों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि पटना मेट्रो के ‘प्रायोरिटी कॉरिडोर’ (भूतनाथ रोड से खेमनीचक होते हुए मलाही पकड़ी खंड) पर एक महीने के भीतर परिचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि पूरे भूमिगत खंड के 2030 तक पूरा होने की संभावना है, लेकिन इस छोटे खंड के शुरू होने से दक्षिण पटना में यातायात का दबाव कम होगा।
भ्रष्टाचार पर नकेल: नगर निकायों की CAG से ऑडिट
बिहार के प्रशासनिक इतिहास में पहली बार नगर निकायों की ऑडिट महालेखाकार (CAG) से कराने का निर्णय लिया गया है।
पारदर्शिता: अब तक यह ऑडिट चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) के माध्यम से होता था। अब सरकारी ऑडिट होने से निकायों में होने वाले भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और गड़बड़ी पाए जाने पर ईओ (EO) व अभियंताओं पर सीधी कार्रवाई होगी।
कचरा प्रबंधन और ऑनलाइन सेवाएं
कूड़े के पहाड़ का अंत: अगले दो साल में सभी शहरों से कचरे के ढेर खत्म कर शत-प्रतिशत वैज्ञानिक निस्तारण का लक्ष्य है।
23 सेवाएं ऑनलाइन: अगले छह महीने में 23 सरकारी सेवाएं (जैसे नक्शा पास कराना) ऑनलाइन हो जाएंगी। इससे आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे।
बिना लाइसेंस मांस बिक्री पर रोक: स्वच्छता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बिना लाइसेंस मांस बेचने वालों पर अब सख्ती बरती जाएगी।
मंत्री विजय कुमार सिन्हा द्वारा घोषित ये सुधार बिहार के शहरों को ‘कंक्रीट के जंगल’ बनने से बचाने की एक गंभीर कोशिश हैं। यदि मास्टर प्लान के अनुसार निर्माण की अनुमति और ऑनलाइन नक्शा पास करने की प्रक्रिया पारदर्शी रहती है, तो यह बिहार के रियल एस्टेट सेक्टर को भी एक विश्वसनीय आधार प्रदान करेगा।
































