नगर निगम की नाक के नीचे कानून की धज्जियां! रोक के आदेश के बावजूद जिला विधिज्ञ संघ परिसर में धड़ल्ले से अवैध निर्माण

न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, भागलपुर
नगर निगम, अनुमंडल प्रशासन और पुलिस महकमे के स्पष्ट आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए जिला विधिज्ञ संघ, भागलपुर परिसर में अवैध भवन निर्माण खुलेआम जारी है। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा निर्माण नगर निगम कार्यालय की दीवार से सटे इलाके में हो रहा है, जहां प्रशासनिक निगरानी सबसे अधिक होनी चाहिए।
अवैध निर्माण वाद संख्या 04/2025-26 में सुनवाई प्रक्रियाधीन रहने के बावजूद संबंधित पक्ष ने निर्माण कार्य और तेज कर दिया है। जबकि नगर निगम भागलपुर द्वारा कई बार निर्माण कार्य पर रोक लगाई जा चुकी है, पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति भी की गई, फिर भी आदेशों की खुलेआम अवहेलना हो रही है।

तीसरी मंजिल तक पहुंचा अवैध निर्माण

प्रशासनिक दस्तावेज़ों के मुताबिक, बिना नक्शा पास कराए, बिहार बिल्डिंग बाय-लॉ का खुला उल्लंघन करते हुए निर्माण कार्य तीसरी मंजिल तक पहुंच चुका है। सहायक टाउन प्लानर एवं अमीन की स्थल जांच में यह साफ हो चुका था कि निर्माण पूरी तरह अवैध है।
नगर निगम के पत्रांक 916 दिनांक 21.06.2025 और पत्रांक 1862 दिनांक 2.09.2025 के माध्यम से पुलिस बल एवं दंडाधिकारी की तैनाती कर कार्य रोकने का आदेश दिया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि रोक के बावजूद निर्माण कार्य बेरोकटोक चलता रहा।

अनुमंडल प्रशासन भी बेअसर

अनुमंडल पदाधिकारी, सदर, भागलपुर द्वारा भी स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि नोटिस की अवधि में निर्माण कार्य पूर्णतः बंद रखा जाए। बावजूद इसके निर्माण जारी रहना प्रशासनिक नियंत्रण पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

संघर्ष समिति का आरोप

जिला विधिज्ञ संघ बचाओ संघर्ष समिति के महासचिव कपिलदेव कुमार ने आरोप लगाया है कि यह पूरा मामला प्रशासनिक संरक्षण और मिलीभगत की आशंका को जन्म देता है। उन्होंने कहा कि यदि नगर निगम और प्रशासन के आदेशों का यही हश्र होना है, तो आम नागरिक कानून का पालन क्यों करे? कानून का मज़ाक या प्रशासन की चुप्पी?

सुलगते सवाल

  • क्या नगर निगम के आदेश सिर्फ कागज़ों तक सीमित हैं?
  • क्या पुलिस प्रतिनियुक्ति सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है?
  • क्या शहर में रसूखदारों के लिए कानून अलग है?

जिला विधिज्ञ संघ बचाओ संघर्ष समिति के महासचिव कपिलदेव कुमार ने एक बार फिर से नगर आयुक्त को पत्र लिखा है। इसमें संघर्ष समिति ने मांग की है कि अवैध निर्माण पर तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई, निर्माण को ध्वस्त करने की प्रक्रिया और आदेशों की अवहेलना करने वालों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए। अब देखना यह है कि नगर निगम और जिला प्रशासन इस खुली चुनौती पर कार्रवाई करता है या फिर भागलपुर में कानून यूं ही दीवार से सटकर गिरता रहेगा।