न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार के ज्वेलरी शोरूम्स में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करते हुए एक बड़ा फैसला लिया गया है। ‘ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्ड फेडरेशन’ के निर्देश पर अब राज्य भर की आभूषण दुकानों में बिना चेहरा दिखाए प्रवेश नहीं मिलेगा। सुरक्षा के मद्देनजर अब ग्राहक बुर्का, हिजाब, नकाब या हेलमेट पहनकर दुकान के अंदर दाखिल नहीं हो सकेंगे।
फिलहाल यह व्यवस्था राज्य भर के ज्वेलरी शोरूम्स में लागू कर दी गई है। फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि इसका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि दुकानदारों और ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
सुरक्षा के लिए कड़े नियम, दुकानों के बाहर लगे पोस्टर
फेडरेशन के अनुसार, प्रदेश में बढ़ती लूट और चोरी की घटनाओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। राजधानी पटना सहित कई जिलों में दुकानों के बाहर इस आशय के पोस्टर चस्पा कर दिए गए हैं।
नए नियमों के मुताबिक:
दुकान में प्रवेश से पहले ग्राहकों को अपनी पहचान सुनिश्चित करनी होगी।
चेहरा पूरी तरह साफ दिखना अनिवार्य होगा।
सीसीटीवी कैमरों में पहचान स्पष्ट हो सके, इसके लिए सिर और चेहरे को ढकने वाली चीजों पर पाबंदी रहेगी।
व्यापारियों का तर्क: यह सिर्फ ‘व्यापारिक सुरक्षा’ है
व्यापारियों का कहना है कि सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों के बीच सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है। लुटेरे अक्सर अपनी पहचान छिपाने के लिए नकाब या हेलमेट का सहारा लेते हैं। दुकानदारों ने स्पष्ट किया है कि यह कोई सरकारी आदेश नहीं है, बल्कि व्यापारिक सुरक्षा पहल है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
राजनीतिक गलियारों में गरमाया मुद्दा
इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
राजद (RJD) का विरोध: पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने इसे असंवैधानिक और धार्मिक आजादी का हनन बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा के नाम पर एक खास समुदाय को टारगेट किया जा रहा है और इसके पीछे भाजपा व आरएसएस का एजेंडा काम कर रहा है।
भाजपा (BJP) का पलटवार: भाजपा प्रवक्ता नीरज कुमार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह सुरक्षा से जुड़ा मसला है और इसे सांप्रदायिक रंग देना गलत है। बढ़ते अपराधों के बीच व्यापारियों को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का पूरा अधिकार है।
































