राहुल कुमार ठाकुर, अररिया
नरपतगंज की बीपीएससी शिक्षिका शिवानी कुमारी वर्मा हत्या कांड का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा कर दिया है। मामला उतना सरल नहीं था जितना प्रारंभ में दिखाई दे रहा था। पुलिस की जांच में सामने आया है कि शिवानी की हत्या दरअसल गलत पहचान के कारण हुई। असली निशाना कोई और महिला शिक्षिका थी। इसी चूक ने उत्तर प्रदेश की रहने वाली होनहार शिक्षिका की जान ले ली।
पति पर अवैध संबंध का शक, महिला बनी साज़िशकर्ता
सुपारी देकर कराना चाहती थी दूसरी शिक्षिका की हत्या
पुलिस ने हत्याकांड में शामिल पेशेवर अपराधी मो. मारूफ व मो. सोहेल के साथ मुख्य साजिशकर्ता हुशनन उर्फ हुस्न आरा को गिरफ्तार कर लिया है। हुस्न आरा को अपने पति मो. साकिर पर खाबदह स्थित प्राथमिक विद्यालय की एक महिला शिक्षिका से अवैध संबंध होने का शक था। इसी शक के आधार पर उसने राजा और छोटू नामक दो व्यक्तियों के साथ मिलकर उस महिला शिक्षिका की हत्या की पूरी योजना बनाई।
राजा और छोटू ने इस हत्या को अंजाम देने के लिए तीन लाख रुपये में मारूफ और सोहेल को सुपारी दी। उन्हें लक्ष्य महिला शिक्षिका की पहचान, स्कूटी, रोजाना का मार्ग और समय तक बताया गया था। हत्या से एक दिन पहले दोनों सुपारी किलरों ने घटनास्थल की रेकी भी की थी।
मौत की वजह बनी ‘गलतफहमी’, अवकाश पर थी असली टारगेट शिक्षिका
घटना वाले दिन असली टारगेट शिक्षिका अवकाश पर थी। संयोग से मृतका शिवानी वर्मा भी उसी मार्ग से स्कूटी पर स्कूल जा रही थीं और रास्ता, समय व स्कूटी—तीनों बातें टारगेट महिला से मेल खा रही थीं। इसी कारण अपराधियों ने शिवानी को ही लक्ष्य समझकर गोली मार दी।
घटना को कैसे दिया गया अंजाम
3 दिसंबर की सुबह करीब साढ़े 8 बजे शिवानी वर्मा जैसे ही कन्हैली शिव मंदिर के पास पहुँचीं, दो बाइक सवार अपराधियों ने उन्हें रोककर पीछे से गर्दन पर गोली मार दी। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना को अंजाम देने के बाद दोनों अपराधी खाबदह–दरगाहीगंज रोड होते हुए NH मार्ग से फरार हो गए और प्रयुक्त यामाहा FZ बाइक को शाहनवाज़ नामक युवक को वापस कर दिया।
हथियार, बाइक और अपराधियों के कपड़े बरामद
एसपी अंजनी कुमार ने बताया कि मारूफ की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त देशी कट्टा, यामाहा एफजेड बाइक तथा अपराधियों द्वारा घटना के समय पहने गए कपड़े व जूते बरामद कर लिए गए हैं।
पूर्व मुखिया की भूमिका संदिग्ध
एसपी ने बताया कि फारबिसगंज के रामपुर दक्षिण के पूर्व मुखिया की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। उन पर कांट्रैक्ट किलरों को संरक्षण देने का आरोप है। पुलिस इस कड़ी में भी जांच कर रही है।
इस तरह टूटा केस… CCTV, तकनीकी जांच और SIT की सक्रियता
मामले की गंभीरता को देखते हुए फारबिसगंज एसडीपीओ के नेतृत्व में SIT गठित की गई थी। CCTV फुटेज, तकनीकी विश्लेषण और जमीनी जांच के आधार पर पुलिस एक–एक कड़ी जोड़ती गई और अंततः पूरे मामले का खुलासा हुआ।

गिरफ्तार आरोपी— मो. मारूफ (22 वर्ष, रामपुर, वार्ड 1), मो. सोहेल (फारबिसगंज रेफरल रोड से गिरफ्तार), हुशनन उर्फ हुस्न आरा (मुख्य साजिशकर्ता)। पुलिस बाकी फरार अभियुक्तों के ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है।

































