लोकतंत्र बचाने मैदान में उतरे जेपी सेनानी, NDA को हटाने का लिया संकल्प

न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, भागलपुर

होटल आमंत्रण, सूजागंज में आज नागरिक अभियान और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक अभियान की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी रामशरण ने की। इस अवसर पर बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर देशभर के गांधीवादी, समाजवादी और जेपी आंदोलन से जुड़े स्वतंत्र कार्यकर्ता एकजुट दिखे।
बताया गया कि यह वही जमात है, जिसने आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी की कांग्रेस सरकार के खिलाफ संघर्ष किया था और जेल भी गए थे। इस नागरिक अभियान के तहत एक्टिविस्टों की एक टोली 30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक भागलपुर प्रवास पर रही।
जेपी आंदोलन में सक्रिय रहे पंकज (बेतिया), कारू (गया), सुशील (आरा) और मंथन (टाटा) ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक अभियान के बैनर तले भागलपुर जिला के कहलगांव, गोपालपुर, बिहपुर और भागलपुर विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया।
भागलपुर के स्थानीय उदय ने बताया कि इस दौरान कहलगांव के मछुआ बस्ती कागजी टोला, नवगछिया के मक्खातकिया और बिहपुर के झंडापुर में जनसंपर्क एवं बैठकें की गईं।
बैठक में बताया गया कि छात्र युवा संघर्ष वाहिनी समन्वय समिति, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक निर्माण अभियान, सर्वोदय मंडल, गांधी स्मारक निधि, राष्ट्र सेवा दल, हम भारत के लोग और भारत जोड़ो अभियान सहित लगभग 30 संगठनों ने मिलकर बिहार चुनाव में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और आजादी आंदोलन की भावना को सशक्त करने का संकल्प लिया है।
वरिष्ठ जेपी सेनानी पंकज ने कहा, “हमने संकल्प लिया था कि जाति सूचक उपनाम नहीं रखेंगे, धार्मिक प्रतीक नहीं धारण करेंगे और चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन जनता के सवालों पर हमेशा लड़ेंगे और उन्हें संगठित करेंगे। आज भी हम उसी मार्ग पर चल रहे हैं।”
सुशील कुमार ने कहा, “हम कांग्रेस के खिलाफ लड़ते हुए इमरजेंसी में जेल गए थे। आज हमारी सबसे बड़ी चिंता लोकतंत्र को बचाने की है। वर्तमान NDA सरकार लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं को ध्वस्त कर रही है — अब तो सुप्रीम कोर्ट भी निशाने पर है।”
कारू ने कहा, “हम गैर-दलीय हैं, पर गैर-राजनीतिक नहीं। नीतीश सरकार ने अफसरराज को बढ़ावा देकर लोकराज को खत्म कर दिया है।”
वहीं मंथन ने कहा कि “आजादी आंदोलन के मूल्यों पर बीजेपी इसलिए हमला कर रही है क्योंकि उसने स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों का साथ दिया था और उनसे माफी मांगी थी।”
बैठक की अध्यक्षता कर रहे रामशरण ने कहा कि “बिहार का विधानसभा चुनाव राष्ट्रीय महत्व का है। बिहार वह राज्य है जहां बीजेपी अपने दम पर कभी सरकार नहीं बना सकी। 2020 में भी जोड़-तोड़ से सत्ता में आई थी। बिहार समाजवाद और लोकतंत्र की धरती है — यहां संविधान की मूल भावना पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि भागलपुर जिले की सभी विधानसभा सीटों पर INDIA गठबंधन और NDA के बीच सीधा मुकाबला है, जिनमें कम से कम चार सीटें महागठबंधन के पक्ष में जाने की संभावना बताई गई।
मछुआ समुदाय ने इस दौरान फ्री फिशिंग एक्ट की मांग दोहराई। उनका कहना था कि 1991 में नदियों में मुक्त मत्स्य पालन का अधिकार मिला था, जिसे NDA सरकार ने चालाकी से छीन लिया। इसलिए मछुआ समाज इस बार महागठबंधन के समर्थन में वोट करेगा।
बैठक में सुनील सहनी, गौतम कुमार, लक्ष्मी सहनी, विनोद सहनी, रविंद्र कुमार सिंह, रोहित कुमार, सूरज कुमार और अनिरुद्ध सहित कई स्थानीय कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।