अस्तलगामी सूर्य को अर्घ्य देने छठ घाट पर उमड़ा आस्था का सैलाब

न्यूज स्कैन ब्यूरो, सुपौल

जिले के कई छठ घाटों पर सोमवार की शाम व्रतियों व श्रद्धालुओं ने अस्तलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। व्रतियों ने पति व संतान के लिए दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना की। सूप और बांस की टोकरियों में ठेकुआ, फल, गन्ना और अन्य पारंपरिक सामग्री सजाकर भगवान को भास्कर को अर्पित की गई। छठ व्रती मंगलवार की सुबह उदयगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे। इसके साथ ही चार दिवसीय छठ महापर्व का समापन होगा। छठ घाट पर तीन बजे से ही लोग पहुंचने लगे। लोग कंधे पर सूप, कोनिया, सहित अन्य छठ का डाला लेकर घाट तक पहुंचे। छठ घाटों को कई जगह लोगों ने लाइट, अन्य प्राकृतिक व अत्याधुनिक सामग्रियों से सजा रखा है। कई जगह प्रशासनिक मदद से लाइट सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। शहर के गांधी मैदान छठ घाट, प्रखंड व शनिदेव छठ घाट, विलियम्स स्कूल छठ घाट, बीआरसी, गजना, प्रखंड कार्यालय तालाब, चकला निर्मली, मलहद, कर्णपुर, सुखपुर, परसरमा, एकमा, वीणा बभनगामा, करिहो, पथरा , कोसी नदी के किनारे सहित जिले के कई छठ घाटों पर श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ दिखी। इसके अलावा श्रद्धालु अपने घर के छत और परिसर में अस्थायी घाट बनाकर पूजा अर्चना की। छठ घाट पर दंड प्रणाम करते श्रद्धालुओं की आस्था भी दिखी। हरिद्रा नदी (खेड़दाहा) नदी के तट पर लोगों ने छठ मनाया। एकमा, जगतपुर, बरुआरी सहित कई गांव के लोग हरिद्रा नदी के बहती जल में छठ मनाते हैं। कोसी नदी के किनारे कई जगह लोगों ने अस्तलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। कपिलेश्वर स्थान छठ घाट आस्था, आपसी सौहार्द व एकता का प्रतीक है। यहां एक साथ जगतपुर, बरुआरी और एकमा के ग्रामीण कई वर्षों से छठ मनाते हैं। छठ घाटों पर डाला में जलते दीपक की रोशनी कोसों दूर तक पहुंची। हालांकि कई छठ घाटों पर लोगों ने आपसी सहायता से लाइट सहित अन्य सुविधाओं की व्यवस्था किया है। पिछले चार दिनों से छठ गीतों से माहौल गूंज रहा है। जिले में लोग आस्था उत्साह और उमंग से शांतिपूर्ण माहौल में छठ महापर्व मना रहे हैं।