न्यूज स्कैन ब्यूरो, काठमांडू
नेपाल के ऐतिहासिक नगर जनकपुर में समर्थगुरु धारा के तत्वावधान में त्रिदिवसीय भव्य अध्यात्मिक आयोजन ‘निरति योग’ का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम का नेतृत्व समर्थगुरु धारा के अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ आचार्यश्री अंशु जी महाराज ने किया। आचार्यश्री अंशु जी, टेक्नो मिशन इंटरनेशनल स्कूल, भागलपुर के निदेशक हैं। वे शिक्षा और अध्यात्म दोनों क्षेत्रों में अपने योगदान के लिए जाने जाते हैं। देश और विदेश में अध्यात्मिक चेतना के प्रसार हेतु वे निरंतर सक्रिय रहते हैं।
आत्मा के प्रकाश स्वरूप का अनुभव
तीन दिनों तक चले इस ‘निरति योग’ कार्यक्रम में देश-विदेश से बड़ी संख्या में साधक शामिल हुए। आचार्यश्री अंशु जी ने साधकों को आत्मा के विभिन्न आयामों, विशेषकर प्रकाश स्वरूप के अनुभव की साधना कराई।
उनका कहना था कि “मानव जीवन की पूर्णता तब संभव है जब मनुष्य अपने भीतर छिपे प्रकाश को पहचान सके। निरति योग उस पहचान की यात्रा है।”
कार्यक्रम में प्रतिदिन प्रातः ध्यान साधना, प्राण ऊर्जा विस्तार सत्र, और संध्या के समय आत्मसंवाद और सत्संग का आयोजन किया गया।
सह आचार्य विश्वलाल जी और प्रभुशरण जी ने साधकों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि योग केवल आसन या प्राणायाम नहीं, बल्कि आत्मबोध की निरंतर प्रक्रिया है।

सांस्कृतिक व आध्यात्मिक संगम
कार्यक्रम के दौरान साधकों ने मां जानकी मंदिर, स्वर्ग द्वार, गंगासागर और जनकपुरी के अन्य ऐतिहासिक स्थलों का समूह भ्रमण किया।
इस अवसर पर लोहना स्थित नव-निर्मित समर्थगुरु आश्रम में एक संगीत संध्या का भी आयोजन किया गया, जिसमें भारत और नेपाल के कलाकारों ने भक्ति संगीत प्रस्तुत किया।
आचार्यश्री अंशु जी ने इस अवसर पर कहा कि “जनकपुर की धरती केवल माता जानकी का जन्मस्थान नहीं, बल्कि अध्यात्म का वह केन्द्र है जहाँ से समर्पण, प्रेम और आत्मज्ञान की धारा प्रवाहित होती है।”
सम्मान और समर्पण का क्षण
कार्यक्रम के अंतिम दिन नेपाल के श्रद्धालुओं एवं मित्रों द्वारा आचार्यश्री अंशु जी को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। साधकों ने इस आयोजन को आत्मिक उत्थान का अनुपम अनुभव बताया।
कार्यक्रम का समापन शांति मंत्र के उच्चारण और सामूहिक ध्यान के साथ हुआ। वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का स्पंदन देर तक महसूस किया जाता रहा।
































