भागलपुर शिक्षा विभाग में 98 लाख का गबन: फर्जी शिक्षिका के नाम पर सरकारी खजाने की लूट, डीपीओ और ऑपरेटर गिरफ्तार

कागजों पर फर्जी शिक्षिका की नियुक्ति कर एचआरएमएस प्रणाली का किया गया भारी दुरुपयोग, डीईओ सहित छह लोगों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज। सृजन घोटाले के बाद यह एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसमें सरकारी खजाने में फर्जी तरीके से सेंधमारी की गई है। क्या है पूरा मामला जानिए इस रिपोर्ट में

न्यूज स्कैन ब्यूरो, भागलपुर
बिहार के भागलपुर शिक्षा विभाग में 98 लाख 12 हजार रुपये से अधिक के गबन का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। सरकारी खजाने से फर्जी शिक्षिका के नाम पर लाखों रुपये की अवैध निकासी के आरोप में डीपीओ (स्थापना) शशि चंदन चौधरी और सेवामुक्त कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश राज को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) चंदन कुमार सहित छह लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस बड़े वित्तीय घोटाले ने शिक्षा विभाग के निगरानी तंत्र और विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फर्जीवाड़े का तरीका: कागजों पर नियुक्ति, सिस्टम में हेरफेर
जांच रिपोर्ट के अनुसार, ‘तनुश्री’ नाम की एक फर्जी शिक्षिका को केवल कागजों पर नियुक्त दिखाकर वेतन और एरियर के नाम पर सरकारी राशि की निकासी की गई। आरोप है कि सेवामुक्त कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश राज ने विभागीय लॉगिन आईडी और एचआरएमएस (HRMS) प्रणाली का दुरुपयोग कर इस फर्जी शिक्षिका को वेतन सूची में शामिल किया। अवैध निकासी की रकम बढ़ाने के लिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और सिटी ट्रांसपोर्ट अलाउंस (CTA) के आंकड़ों में भी तकनीकी हेरफेर की बात सामने आई है। फर्जी पहचान और जाली प्रान (PRAN) नंबर के जरिए बैंक खाते तैयार किए गए थे।

बैंक की सतर्कता से खुला राज
इस सुनियोजित घोटाले के तहत मई 2025 से जुलाई 2026 के बीच करीब 52 लाख रुपये की निकासी की जा चुकी थी। मामले का भंडाफोड़ तब हुआ, जब अगस्त 2026 में 46 लाख 96 हजार रुपये का एकमुश्त भुगतान करने का प्रयास किया गया। एक साथ इतनी बड़ी रकम के ट्रांसफर पर बैंक का सिस्टम अलर्ट हो गया और बैंक ने इस संदिग्ध लेनदेन पर होल्ड लगा दिया। इसके अलावा 73 लाख रुपये के एक और संदिग्ध ट्रांसफर को भी बैंक द्वारा रोके जाने की बात सामने आई है।

इन अधिकारियों और कर्मचारियों पर गिरी गाज
गबन का मामला संज्ञान में आते ही क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक (RDDE) सुभाष कुमार गुप्ता के आवेदन पर जोगसर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। आरोपियों में डीईओ और डीपीओ के अलावा लिपिक शिशिर कुमार झा, ऑपरेटर की पत्नी काजल और तनुजा देवी भी शामिल हैं। गिरफ्तारी के बाद पुलिस और प्रशासनिक महकमे ने कार्रवाई तेज कर दी है।

गहरी जांच के लिए चार सदस्यीय विशेष टीम गठित
डीडीसी रवि प्रकाश ने बताया कि अवैध निकासी की इस घटना के बाद अभिलेखों की जांच के लिए चार सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया गया है। टीम अब बैंक खातों, लेनदेन के रिकॉर्ड और सिस्टम में किए गए बदलावों की तकनीकी जांच कर रही है।

सुलगते सवाल:
इस मामले ने सिस्टम की सुरक्षा में एक बड़ी सेंध उजागर की है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिक्षकों के वेतन भुगतान के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे एक साल से अधिक समय तक यह खेल कैसे चलता रहा? दस्तावेजों का सत्यापन किसके स्तर पर हुआ और बिना किसी पड़ताल के 52 लाख रुपये कैसे जारी हो गए? फिलहाल पुलिस खातों की पड़ताल कर रही है कि निकाली गई राशि कहां-कहां ट्रांसफर की गई। जांच आगे बढ़ने पर कुछ अन्य विभागीय कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है।