बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव के बीच सूबे की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। मोकामा से सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधायक और बाहुबली नेता अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जेडीयू के आधिकारिक प्रत्याशी नीरज कुमार का विरोध करते हुए, अनंत सिंह ने जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में पूरी ताकत झोंक दी है। उनका यह कदम न केवल जेडीयू के भीतर की गुटबाजी को उजागर कर रहा है, बल्कि पटना स्नातक सीट के चुनावी समीकरणों को भी बेहद दिलचस्प बना दिया है।
न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
जन सुराज प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह के पक्ष में माहौल बनाने के लिए अनंत सिंह ने शनिवार को पटना से नवादा तक करीब 200 किलोमीटर लंबी ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ निकाली। जब उनका काफिला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा पहुंचा, तो वहां उनके समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया। इस दौरान ‘अनंत सिंह जिंदाबाद’ और ‘छोटे सरकार जिंदाबाद’ के नारों से इलाका गूंज उठा। युवाओं में उनके साथ सेल्फी लेने की होड़ दिखी। इस सियासी यात्रा में भीड़ को आकर्षित करने के लिए भोजपुरी गायक और अभिनेता गुंजन सिंह भी उनके साथ गाड़ी की पिछली सीट पर मौजूद रहे, जो इस यात्रा को एक बड़े ‘शक्ति प्रदर्शन’ का रूप दे रहा था।
नीरज कुमार से पुरानी अदावत है बगावत की असली वजह
अनंत सिंह की इस बगावत के पीछे जन सुराज से वैचारिक जुड़ाव कम और जेडीयू प्रत्याशी नीरज कुमार से उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक अदावत ज्यादा नजर आती है। पटना से रवाना होने से पहले मीडिया से बातचीत में अनंत सिंह ने अपने इरादे बिल्कुल स्पष्ट कर दिए। पार्टी के दबाव में पीछे हटने के सवाल को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने कहा, “पीछे हटने का सवाल ही नहीं है।” बिना नाम लिए नीरज कुमार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “उन्होंने मेरे लिए क्या किया है, सब जानते हैं।” यह स्पष्ट संकेत है कि अनंत सिंह इस चुनाव को नीरज कुमार से हिसाब बराबर करने के मौके के रूप में देख रहे हैं।
जेडीयू के लिए असहज स्थिति, जन सुराज को मिला ‘बाहुबल’ का साथ
इस पूरे घटनाक्रम के दो बड़े राजनीतिक मायने हैं:
सत्ताधारी दल में अनुशासनहीनता: एक मौजूदा विधायक का अपनी ही पार्टी के घोषित उम्मीदवार के खिलाफ 200 किलोमीटर की यात्रा निकालना और खुलेआम दूसरे दल (जन सुराज) के प्रत्याशी के लिए वोट मांगना, जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व के लिए बेहद असहज करने वाली स्थिति है। यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी आलाकमान इस खुली बगावत पर क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई करता है।
जन सुराज को संजीवनी: प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज, जो बिहार में खुद को एक नए विकल्प के रूप में पेश कर रही है, उसे मगध क्षेत्र में अनंत सिंह जैसे कद्दावर और ‘बाहुबली’ नेता का जमीनी समर्थन मिलना एक बड़ा फायदा पहुंचा सकता है। हालांकि सैद्धांतिक तौर पर प्रशांत किशोर छोटे सरकार टाइप राजनीति के खिलाफ रहे हैं।
पटना स्नातक विधान परिषद सीट का चुनाव अब केवल राजनीतिक दलों की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह अनंत सिंह बनाम नीरज कुमार की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। अनंत सिंह द्वारा अनुज के लिए नालंदा से नवादा तक जोता गया यह ‘सियासी खेत’ चुनाव के नतीजों पर कितना असर डालेगा, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन फिलहाल इसने बिहार के सियासी पारे को चरम पर पहुंचा दिया है।
































