बिहार में 505 करोड़ का नया निवेश: टेक्सटाइल और लेदर के लगेंगे 26 कारखाने, 5 हजार नौकरियों का रास्ता साफ

रोजगार की कमी और पलायन बिहार की एक पुरानी हकीकत रही है। हर साल लाखों युवा काम की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। लेकिन इसी हकीकत के बीच राज्य के औद्योगिक क्षेत्र से एक बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आई है। बिहार में 505 करोड़ रुपये के निवेश से 26 नए कल-कारखाने लगने जा रहे हैं। गुरुवार को बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा) से इन परियोजनाओं को हरी झंडी मिल गई है। अगर ये योजनाएं कागजों से निकलकर तय समय पर जमीन पर उतरती हैं, तो सूबे के करीब 5,000 युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार मिल सकेगा।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
जानिए कि किन चीजों के लगेंगे कारखाने। इस बार जोर उन उद्योगों पर है, जिनमें स्थानीय कारीगरों और मजदूरों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इन 26 परियोजनाओं में मुख्य रूप से खाने-पीने की चीजों (फूड प्रोसेसिंग), कपड़े (टेक्सटाइल), चमड़े के उत्पाद (लेदर गारमेंट्स, बैग और बेल्ट) और पशुओं का चारा बनाने वाले कारखाने शामिल हैं।

505 करोड़ का निवेश, 5 हजार परिवारों को मिलेगा आसरा
बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा) ने राज्य में 26 नई औद्योगिक परियोजनाओं को अपनी हरी झंडी दिखा दी है। इसका सीधा सा मतलब है कि इन कारखानों को लगाने के लिए करीब 505.27 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इस निवेश से राज्य में रोजगार का एक बड़ा दरवाजा खुलेगा और लगभग 5,000 लोगों को अपने ही राज्य में नौकरी मिलने की संभावना है।

किन चीजों के लगेंगे कारखाने?
सबसे अच्छी बात यह है कि ये कारखाने उन चीजों से जुड़े हैं, जिनकी बाजार में हमेशा मांग रहती है और जिनमें काम करने के लिए स्थानीय हुनर की जरूरत होती है। इन 26 परियोजनाओं में मुख्य रूप से शामिल हैं:

खाने-पीने की चीजों के कारखाने (खाद्य प्रसंस्करण)

कपड़ा उद्योग (टेक्सटाइल)

चमड़े के कपड़े (लेदर गारमेंट्स), बैग और बेल्ट बनाने के कारखाने

मवेशियों के लिए चारा (पशु आहार) बनाने वाले प्लांट

इसके अलावा कुछ अन्य सामान्य विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) इकाइयां भी लगाई जाएंगी।

33 एकड़ जमीन और ‘रेडीमेड’ शेड्स
इन कारखानों को खड़ा करने के लिए बियाडा ने 33.08 एकड़ औद्योगिक भूमि आवंटित कर दी है। काम जल्द से जल्द शुरू हो सके, इसके लिए उद्योग सचिव कुंदन कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में ‘प्लग-एंड-प्ले’ शेड्स के आवंटन को भी मंजूरी दी गई है। ‘प्लग-एंड-प्ले’ का आसान मतलब है कि सरकार उद्योगपतियों को बनी-बनाई बिल्डिंग और शेड देगी, ताकि वे आएं, अपनी मशीनें लगाएं और बिना समय बर्बाद किए तुरंत उत्पादन शुरू कर दें।

क्या कहते हैं जिम्मेदार?
इस नई पहल पर राज्य की उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह का मानना है कि इन परियोजनाओं से राज्य में विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) की गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे रोजगार और कौशल विकास के नए मौके पैदा होंगे। वहीं, उद्योग सचिव कुंदन कुमार ने भरोसा जताया है कि बेहतर कनेक्टिविटी, आसान प्रक्रियाओं और अच्छी नीतियों के जरिए बिहार में उद्योग लगाने का एक शानदार माहौल तैयार किया जा रहा है।

आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब है?
यह अभी निवेश की पहली मंजूरी है। जैसे ही ये कारखाने कागजों से निकलकर जमीन पर धरातल पर काम करना शुरू करेंगे, इसका सीधा फायदा उन हजारों युवाओं को मिलेगा जो आज रोजगार की तलाश में हैं। जब अपने ही राज्य में काम मिलेगा, तो न सिर्फ पलायन रुकेगा बल्कि बिहार के स्थानीय संसाधनों का भी सही इस्तेमाल हो सकेगा।