किसानों के लिए अलर्ट : बिहार में पैक्स का बनेगा ‘डाटा बैंक’, सरकारी योजनाओं और सब्सिडी के लिए ये जानकारी देना हुआ अनिवार्य

बिहार में सरकारी योजनाओं, कृषि सब्सिडी और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ उठाने के लिए अब पैक्स (PACS) से जुड़े किसानों को अपना विस्तृत ब्यौरा देना होगा। सिस्टम में पारदर्शिता लाने और फर्जीवाड़े पर लगाम कसने के लिए राज्य सरकार सभी 1.4 करोड़ पैक्स सदस्यों का ‘डाटा बैंक’ तैयार कर रही है। इसके तहत अब हर सदस्य के लिए अपनी जमीन, आधार कार्ड और उत्तराधिकारी (नॉमिनी) की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि योजनाओं का सीधा फायदा असली किसानों तक पहुंच सके।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार के किसानों और पैक्स (PACS) सदस्यों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर है। राज्य सरकार अब सभी 8,463 पैक्सों और उनसे जुड़े 1 करोड़ 40 लाख सदस्यों का एक विस्तृत और पारदर्शी ‘डाटा बैंक’ तैयार कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य सिस्टम से फर्जीवाड़े को खत्म करना और यह सुनिश्चित करना है कि केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं, सब्सिडी और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ सीधे और बिना किसी रुकावट के असली किसानों तक पहुंचे। इसके लिए अब पैक्स सदस्यों को अपनी जमीन, आधार कार्ड और उत्तराधिकारी (Nominee) से जुड़ी जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है।

आम आदमी और किसानों के लिए 5 सबसे जरूरी बातें:

  1. क्यों मांगा जा रहा है आपका ब्यौरा? समझिए कि आपको क्या फायदा होगा

सब्सिडी और योजनाओं का सीधा लाभ: नया डाटाबेस बनने से सदस्यों को उनकी योग्यता के अनुसार कृषि, पशुपालन और ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं का लाभ आसानी से मिलेगा।

फसल का सही दाम: डाटा अपडेट होने से किसानों को उनके धान और गेहूं जैसी फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचने में आसानी होगी।

फर्जीवाड़े पर रोक: जानकारी ऑनलाइन होने से पैक्स में होने वाली गड़बड़ियों पर लगाम लगेगी और सब्सिडी की राशि सीधे सही लाभार्थी को भेजी जा सकेगी।

  1. उत्तराधिकारी (Nominee) का नाम बताना हुआ अनिवार्य
    अब तक कई पैक्स सदस्य अपने वारिस का नाम दर्ज नहीं कराते थे, लेकिन अब पैक्स सदस्यों को अपने उत्तराधिकारी का नाम और उसके साथ अपना संबंध बताना पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है।
  2. आपको कौन-कौन सी जानकारी देनी होगी?
    किसानों को फॉर्म में अपना सटीक ब्यौरा देना होगा। जो जानकारी देना अनिवार्य है, उनमें शामिल हैं:

सदस्य का नाम, सदस्यता का प्रकार, और पैक्स में प्रवेश की तिथि।

आधार कार्ड संख्या, जन्म तिथि, लिंग, धर्म, जाति श्रेणी और वैवाहिक स्थिति।

मकान संख्या, नॉमिनी की जानकारी (प्रवेश संख्या और संबंध)।

जमीन का ब्यौरा: सर्वे संख्या, कुल भूमि, कुल भूमि का मूल्य, खेती योग्य भूमि, स्वामित्व का प्रकार, मिट्टी का प्रकार और सिंचाई का प्रकार।

(नोट: रक्त समूह, शैक्षणिक योग्यता, पेशा, वार्षिक आय, बैंक खाता विवरण आदि जैसी जानकारियां किसान अपनी इच्छा के अनुसार भर सकते हैं।)

  1. कैसे जमा होगा आपका डाटा? (ऑनलाइन और ऑफलाइन)

ऑनलाइन: राज्य के 4,476 कम्प्यूटरीकृत पैक्सों से जुड़े लगभग 80 लाख सदस्यों का डाटा ऑनलाइन माध्यम से सीधे विभाग को मिल जाएगा।

ऑफलाइन (हार्ड कॉपी): जिन पैक्सों में अभी कंप्यूटर की व्यवस्था नहीं है, वहां के करीब 60 लाख सदस्यों को अपना ब्यौरा एक निर्धारित फॉर्मेट में हार्ड कॉपी (कागज) पर भरकर प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी या पैक्स को देना होगा।

  1. अगर जानकारी नहीं दी तो क्या होगा?
    सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह के स्पष्ट निर्देश हैं कि जो किसान अपने खेत या अन्य जरूरी जानकारी साझा नहीं करेंगे, उन्हें योजनाओं का लाभ मिलने में परेशानी हो सकती है। सही आंकड़ों के आधार पर ही भविष्य में लाभुकों की पहचान की जाएगी।

यदि आप बिहार में पैक्स के सदस्य हैं, तो बिना देरी किए अपने पैक्स अध्यक्ष या प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी से संपर्क करें और अपना डाटा (खासकर आधार, जमीन के कागजात और नॉमिनी की डिटेल) निर्धारित फॉर्मेट में अपडेट कराएं ताकि आप किसी भी सरकारी लाभ से वंचित न रहें।