न्यूज स्कैन ब्यूरो, नई दिल्ली/पटना
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के परिणाम घोषित होते ही खुशियों के बीच एक हैरान कर देने वाला विवाद खड़ा हो गया है। मामला रैंक 301 का है, जिस पर दो अलग-अलग राज्यों की युवतियों ने अपना दावा ठोक दिया है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों का नाम आकांक्षा सिंह है, लेकिन ‘असली’ सफल उम्मीदवार कौन है, इसे लेकर सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक बहस छिड़ गई है।
वाराणसी बनाम आरा: दावों की जंग
इस विवाद ने तब तूल पकड़ा जब उत्तर प्रदेश के वाराणसी और बिहार के आरा की दो आकांक्षा सिंह एक ही रैंक पर अपनी सफलता का जश्न मनाने लगीं।
वाराणसी की आकांक्षा का पक्ष: यूपी की आकांक्षा सिंह ने अपने दावे को मजबूती देने के लिए सोशल मीडिया पर एडमिट कार्ड और इंटरव्यू लेटर जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज साझा किए हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि रोल नंबर और अन्य विवरण उनके ही हैं, और कोई दूसरा उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल कर रहा है।
बिहार की आकांक्षा का आत्मविश्वास: दूसरी ओर, बिहार के आरा की आकांक्षा सिंह भी अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं। उन्होंने मीडिया के सामने न सिर्फ अपनी सफलता की बात कही, बल्कि अपना अगला लक्ष्य आईपीएस बनना भी बताया है। ये रणवीर सेना वाले ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती है।
सिस्टम पर सवाल या पहचान की चोरी?
UPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में एक ही रैंक पर दो दावेदारों का होना विरला ही है। अब सवाल यह उठता है कि क्या यह रोल नंबर के कन्फ्यूजन का मामला है या किसी एक पक्ष द्वारा गलत दावा पेश किया जा रहा है? फिलहाल, दोनों उम्मीदवारों के समर्थक अपने-अपने तर्क दे रहे हैं, लेकिन अंतिम पुष्टि आयोग के आधिकारिक डेटा के मिलान के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।































