न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार की नदियों में अब सिर्फ नावें ही नहीं, बल्कि बड़े मालवाहक जहाज और क्रूज भी दौड़ते नजर आएंगे। राज्य सरकार ने गंगा के साथ-साथ गंडक, कोसी, घाघरा, कर्मनाशा, पुनपुन और सोन नदी को राष्ट्रीय जलमार्ग (National Waterway) के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
खबर के मुख्य बिंदु:
कुल नेटवर्क: बिहार में कुल 7 राष्ट्रीय जलमार्ग (NW) घोषित हैं, जिनकी कुल लंबाई 1187 किलोमीटर है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर: 17 नई सामुदायिक जेटी (Jetty) बनाई जा रही हैं। वर्तमान में 21 जेटी पहले से मौजूद हैं।
माल ढुलाई में उछाल: वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 12.22 लाख टन माल की ढुलाई हो चुकी है, जो पिछले वर्षों के मुकाबले एक बड़ी छलांग है।
कनेक्टिविटी: सोनपुर के कालुघाट में मल्टीमोडल टर्मिनल तैयार है, जहाँ सड़क, रेल और जल मार्ग एक साथ जुड़ते हैं।

आम लोगों को इससे क्या सीधा लाभ होगा?
इस परियोजना का आम नागरिक के जीवन और जेब पर सीधा असर पड़ेगा:
सस्ता होगा सामान (Cost Effective): सड़क परिवहन की तुलना में जल मार्ग से माल ढुलाई काफी सस्ती पड़ती है। जब सीमेंट, बालू, पत्थर, कोयला और अनाज जैसे भारी सामान पानी के रास्ते आएंगे, तो उनकी लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी, जिससे बाजार में इनके दाम कम हो सकते हैं।
रोजगार के नए अवसर: 17 नई जेटियों और टर्मिनल के निर्माण से स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा होगा। घाटों के व्यावसायिक विकास से दुकानों, गोदामों और ट्रांसपोर्ट सेवाओं में स्थानीय युवाओं को काम मिलेगा।
ट्रैफिक जाम से मुक्ति: भारी ट्रकों का बोझ सड़कों से हटकर नदियों पर शिफ्ट हो जाएगा। इससे नेशनल हाईवे और शहरों की सड़कों पर ट्रैफिक कम होगा, दुर्घटनाएं घटेंगी और सड़कों की उम्र भी बढ़ेगी।
पर्यटन और धार्मिक सुविधाओं में सुधार: सिमरिया घाट, अयोध्या घाट और बटेश्वर नाथ जैसे धार्मिक स्थलों पर सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। इससे न केवल श्रद्धालुओं को आसानी होगी, बल्कि रिवर क्रूज (River Cruise) के जरिए पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
किसानों को सीधा फायदा: सोन, गंडक और कोसी जैसे जलमार्गों के विकसित होने से किसान अपनी उपज (खाद, चावल, अनाज) कम खर्चे में बड़ी मंडियों तक पहुँचा सकेंगे।

































