नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ श्रद्धा, भक्ति व आध्यात्मिक चेतना का बना केंद्र, यज्ञ परिसर में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

न्यूज स्कैन ब्यूरो, सुपौल

सदर प्रखंड के ग्राम पंचायत बरूआरी पश्चिम गांव में 19 जनवरी से 27 जनवरी तक आयोजित नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ इन दिनों श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का विराट केंद्र बना हुआ है। बक्सर से पधारे प्रख्यात आचार्य कृष्णानंद जी महाराज के श्रीमुख से प्रतिदिन अपराह्न 3 बजे से सायं 7 बजे तक चल रही श्रीदेवीभागवत कथा ने समूचे क्षेत्र को भक्तिरस से सराबोर कर दिया है। कथा-पंडाल में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात की साक्षी है कि भगवती की कृपा से जन-जन के हृदय में आस्था का दीप प्रज्वलित हो उठा है।प्रवचन के दौरान आचार्य श्री ने भावपूर्ण शब्दों में देवीमाहात्म्य की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह कथा त्रिमूर्ति, सत्यम्, ऋतम् तथा मोक्ष की दिव्य साधना से जुड़ी है। सृष्टि के रहस्य केवल भौतिक दृष्टि से नहीं, बल्कि शक्ति-तत्त्व के माध्यम से समझे जा सकते हैं। ब्रह्मा, विष्णु और महेशइन तीनों के कार्य सृजन, पालन और संहार
तीन महाशक्तियों के संयोग से ही सम्पन्न होते हैं। देवी पुराण में इसी आध्यात्मिक प्रक्रिया को सर्ग और विसर्ग कहा गया है।आचार्य ने बताया कि सृष्टि की तीन प्रधान देवियाँ महा सरस्वती, महा काली और महा लक्ष्मी का संयुक्त स्वरूप ही महादेवी है, जिनका वास मणिद्वीप में माना गया है। इन्हीं की अखण्ड शक्ति से समस्त ब्रह्माण्ड का निर्माण, संचालन और संतुलन संभव है। देवी ब्रह्मा के साथ सृष्टि, विष्णु के साथ पालन और शिव के साथ संहार का कार्य करती हैं अतः समस्त देव-देवियों का आधार शक्ति ही है।उन्होंने कहा कि पुराण का अर्थ है जो नित्य नवीन हो, जिसमें श्रेष्ठ प्राचीन ज्ञान समाहित हो। पुराण ईश्वरीय ज्ञान का अक्षय भंडार हैं और इनके श्रवण-मनन से ही परमात्मा की भक्ति का बोध होता है। मनुष्य का परम कर्तव्य है कि वह स्वयं को जानने और जीवन को सार्थक बनाने के लिए देवीभागवत पुराण का अध्ययन करे। इसके बिना जीवन की पूर्णता संभव नहीं।आचार्य श्री ने सरल शब्दों में समझाया कि स्वर्ग और भोग की प्राप्ति के लिए सद्गुण आवश्यक हैं, जबकि मोक्ष के लिए दिव्य ज्ञान। यह सम्पूर्ण ज्ञान देवीभागवत पुराण में निहित है। श्रद्धा और भक्ति से एक बार भी इसका श्रवण करने मात्र से भगवती की कृपा प्राप्त होती है और मनुष्य चतुर्वर्ग फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का अधिकारी बन जाता है। उसका जीवन धन्य हो जाता है और अंततः वह मोक्ष को प्राप्त करता है।
शतचंडी महायज्ञ के अवसर पर हो रहे इन भक्ति-प्रवचनों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। हर श्वास में ‘जय माता दी’ की गूंज है और हर हृदय में भगवती के चरणों में समर्पण की भावना। यह आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि समाज को आध्यात्मिक दिशा देने वाला महापर्व बन गया है। एक को सफल बनाने में युवा एवं ग्रामीण के समस्त लोगों के द्वारा अपनी सहभागती दे रही है।