परीक्षा परिणाम के अंक नहीं, बच्चों का प्रयास और उनके सपनों का मूल्यांकन करें

ब्राइट कैरियर स्कूल, पूर्णिया के निदेशक गौतम सिन्हा का बच्चों और अभिभावकों के नाम ये एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश है

सीबीएसई 10वीं के परीक्षा परिणाम घोषित हो चुके हैं। सबसे पहले उन सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई जिन्होंने अपनी मेहनत से सफलता प्राप्त की है। इस वर्ष के परिणाम (93.70% कुल पास प्रतिशत) यह दर्शाते हैं कि हमारे बच्चे चुनौतियों के बीच भी बेहतर प्रदर्शन करना जानते हैं। विशेषकर छात्राओं का 94.99% सफलता दर यह बताता है कि ‘बेटी पढ़ाओ’ अभियान केवल एक नारा नहीं, बल्कि धरातल पर एक मज़बूत सच्चाई बन चुका है।

अंकों की दौड़ में पीछे न छूट जाए बचपन
पटना और आसपास के क्षेत्रों के परीक्षा परिणामों में आंशिक गिरावट देखी गई है, जो हम शिक्षकों और अभिभावकों के लिए एक चिंतन का विषय है। लेकिन यहाँ एक बात समझना बहुत जरूरी है… अंक पत्र (Mark Sheet) किसी बच्चे की योग्यता का अंतिम प्रमाण पत्र नहीं होता। 99.06% अंक लाने वाली डोयल प्रभा ने निश्चित रूप से गौरव बढ़ाया है, लेकिन वे बच्चे भी कम प्रतिभावान नहीं हैं जो किन्हीं कारणों से 90% की श्रेणी में नहीं आ पाए।

अभिभावकों से मेरी अपील
अभिभावक होने के नाते आपकी भूमिका आज सबसे महत्वपूर्ण है। यदि आपके बच्चे के अंक उसकी या आपकी अपेक्षा से कम हैं, तो उसे तुलना (Comparison) की अग्नि में न झोंकें। 10वीं का परिणाम एक पड़ाव है, मंज़िल नहीं। बच्चों को उनकी रुचि पहचानने में मदद करें। आज दुनिया बदल रही है; करियर के विकल्प केवल डॉक्टर या इंजीनियर तक सीमित नहीं हैं। संगीत, खेल, डिजिटल आर्ट्स और सोशल साइंसेज में भी अपार संभावनाएं हैं।

दो शब्द प्यारे स्टूडेंट्स के लिए
जिन 1.47 लाख विद्यार्थियों को कंपार्टमेंट मिला है या जो अपने स्कोर से खुश नहीं हैं, उनके लिए 15 मई से शुरू होने वाला ‘सेशन-2’ एग्जाम एक शानदार मौका है। बोर्ड की नई ‘दो बोर्ड परीक्षा’ नीति आपकी मदद के लिए है। निराश होने के बजाय अपनी कमियों का विश्लेषण करें और दुगने उत्साह से जुट जाएं। याद रखें, गिरकर संभलने वाले को ही बाजीगर कहते हैं।

आइए, हम सब मिलकर एक ऐसा वातावरण बनाएं जहाँ बच्चे अंकों के दबाव में नहीं, बल्कि सीखने के आनंद में बड़े हों।