बिहार में ‘स्मार्ट ट्रैफिक’ का नया खाका: यातायात थानों में 35 पार के सिपाही नहीं होंगे तैनात, महिलाओं को 33% आरक्षण

बिहार की सड़कों पर बढ़ती ट्रैफिक समस्याओं से निपटने और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए पुलिस मुख्यालय ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी नए निर्देशों के तहत अब राज्य के ट्रैफिक थानों में 35 वर्ष से अधिक उम्र के सिपाहियों की तैनाती नहीं की जाएगी। इसके साथ ही, स्मार्ट ट्रैफिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए हर जिले के ट्रैफिक बल में न्यूनतम एक तिहाई (33%) पद महिला पुलिसकर्मियों के लिए आरक्षित रहेंगे।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
पुलिस मुख्यालय ने राज्य के सभी 40 पुलिस जिलों में इस व्यवस्था को कड़ाई से लागू करने के लिए पुलिस अधीक्षकों (SPs) को निर्देश जारी कर दिया है।

तैनाती के लिए उम्र का नया पैमाना तय
यातायात प्रबंधन के बढ़ते दबाव और सड़कों पर चुस्त-दुरुस्त जवानों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए हर पद के लिए अधिकतम उम्र सीमा निर्धारित की गई है:
सिपाही (Constable): अधिकतम 35 वर्ष।
दारोगा (Sub-Inspector): अधिकतम 40 वर्ष।
एएसआई व हवलदार (ASI & Head Constable): अधिकतम 55 वर्ष।
इंस्पेक्टर (Inspector): अधिकतम 50 वर्ष।
कार्यकाल की सीमा: ट्रैफिक थानों में तैनात सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों का कार्यकाल न्यूनतम 3 वर्ष का होगा। किसी भी परिस्थिति में एक जिले में उनका कार्यकाल 3 वर्ष से अधिक विस्तारित नहीं किया जा सकेगा।

स्क्रीनिंग कमेटी करेगी चयन, कंप्यूटर ज्ञान वालों को प्राथमिकता
यातायात थानों के लिए योग्य और सक्रिय पुलिसकर्मियों का चयन करने के लिए हर जिले में एसपी की अध्यक्षता में तीन पुलिस पदाधिकारियों की एक ‘जिला स्क्रीनिंग कमेटी’ गठित की जाएगी। यह कमेटी प्रतिवर्ष शारीरिक फिटनेस, स्वच्छ आचरण और ट्रैफिक नियमों के ज्ञान के आधार पर चयन करेगी। चयनित पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा और उसमें उत्तीर्ण होने पर ही अंतिम पदस्थापना होगी। डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग और ऑटोमेटेड प्रणाली को सुचारू रूप से चलाने के लिए अंग्रेजी व हिन्दी कंप्यूटर टाइपिंग तथा ट्रैफिक नियमों का सामान्य ज्ञान रखने वाले जवानों को प्राथमिकता दी जाएगी।

स्मार्ट ट्रैफिक के लिए किए गए विशेष इंतजाम
ई-डिटेक्शन पोर्टल: टोल प्लाजा पर वाहनों की स्वतः जांच व ई-चालान की व्यवस्था होगी।
डेटा संग्रह प्रणाली: सड़क दुर्घटनाओं के विश्लेषण के लिए आई-राड (iRAD) और ई-डार (e-DAR) का उपयोग किया जाएगा।
नए पद स्वीकृत: पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर एवं बिहारशरीफ के लिए 485 नए पदों की स्वीकृति दी गई है।
गठन और वाहन: सभी 40 जिलों में ट्रैफिक पुलिस स्टेशन और डीएसपी ट्रैफिक का पद सृजित किया गया है। 28 जिलों में 4,215 नए ट्रैफिक बल की स्वीकृति के बाद कुल संख्या 8,771 हो गई है। इसके अतिरिक्त ट्रैफिक स्टेशनों को 86 और ट्रैफिक डीएसपी को 43 वाहन उपलब्ध कराए गए हैं।

आखिर क्यों लिया गया यह फैसला?
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, इस नए नियम से शहरों में बढ़ती ट्रैफिक जाम की चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सकेगा। तकनीक के बढ़ते उपयोग के कारण युवा और कंप्यूटर के जानकार पुलिसकर्मियों की उपयोगिता बढ़ेगी। इसके अलावा, 33% महिला बल की तैनाती से महिला यात्रियों की सुरक्षा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और सड़क पर सामुदायिक संपर्क बेहतर होगा। गौरतलब है कि नवंबर 2023 से ही राज्य में मैनुअल चालान को पूरी तरह बंद कर हैंडहोल्ड डिवाइसेज से जुर्माना वसूलने की व्यवस्था प्रभावी है।