सोना : बढ़ती कीमतों के बीच भी क्यों है हर परिवार की पहली पसंद? बता रहे हैं एक्सपर्ट विशाल वर्मा

आज जब वैश्विक आर्थिक हालात अनिश्चितता से घिरे हैं और नीतिगत बदलावों का सीधा असर बाजार पर दिख रहा है, तब भी एक चीज है जिस पर लोगों का भरोसा कम नहीं हुआ, सोना। हाल ही में आयात शुल्क में हुई भारी बढ़ोतरी के कारण सोने की कीमतें नई ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। ऐसे में कई लोग यह सोच रहे हैं कि क्या अभी खरीदारी टाल देनी चाहिए। लेकिन सराफा बाजार के जानकार इस सोच को अधूरा मानते हैं। वे बताते हैं कि सोना खरीदना खर्च नहीं, भविष्य की तैयारी है। भागलपुर, देवघर और पूर्णिया में अपनी विश्वसनीय पहचान बना चुके हरिओम लक्ष्मीनारायण ज्वेलर्स के प्रोपराइटर विशाल वर्मा बताते हैं कि सोने को सिर्फ गहनों के नजरिए से देखना एक बड़ी भूल है।

विशाल बताते हैं, सोना एक ऐसा एसेट है जो समय के साथ खुद को साबित करता है। सही समय का इंतजार करने से ज्यादा जरूरी है, समय पर शुरुआत करना। वे एक उदाहरण देते हैं, 2003 में भागलपुर के एक डॉक्टर को ₹10,000 का गिफ्ट वाउचर मिला, जिसे उन्होंने सोने में निवेश किया। आज वही निवेश कई गुना बढ़ चुका है। यह सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि सोने की दीर्घकालिक क्षमता का प्रमाण है। वे बताते हैं कि कीमतें बढ़ती हैं लेकिन भरोसा नहीं घटता। सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जरूर आता है, लेकिन लंबी अवधि में इसका ट्रेंड हमेशा ऊपर की ओर रहा है। आज जो कीमत ऊंची लग रही है, वही आने वाले समय में सामान्य लगने लगती है। इसलिए ‘सही समय’ का इंतजार अक्सर निवेश को महंगा बना देता है।

संकट में सबसे पहले याद आता है सोना
चाहे मेडिकल इमरजेंसी हो, व्यवसायिक संकट या वैश्विक अनिश्चितता, सोना हमेशा सबसे पहले काम आता है। इसे तुरंत नकदी में बदला जा सकता है। यह पूरी तरह आपके नियंत्रण में रहता है। किसी भी परिस्थिति में इसकी उपयोगिता बनी रहती है। यही कारण है कि इसे केवल आभूषण नहीं, बल्कि “फाइनेंशियल बैकअप” माना जाता है।

सरकारी नीति और निवेश की समझ
आयात शुल्क में बढ़ोतरी का उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखना है, लेकिन इसका असर कीमतों पर साफ दिख रहा है। फिर भी बाजार संकेत देता है कि निवेशकों का भरोसा बरकरार है। गोल्ड ETF जैसे विकल्पों में जारी तेजी यह बताती है कि सोना आज भी एक मजबूत निवेश विकल्प बना हुआ है। सही तरीका यह है कि सोने में निवेश धीरे-धीरे लेकिन लगातार करना चाहिए। विशाल वर्मा के अनुसार, “सोने में सबसे समझदारी भरा तरीका है, छोटे-छोटे निवेश की आदत।” हर महीने थोड़ा-थोड़ा सोना खरीदें।
एकमुश्त बड़ी राशि लगाने से बचें। समय के साथ औसत लागत संतुलित रखें। यह रणनीति न सिर्फ सुरक्षित है, बल्कि लंबे समय में बेहतर रिटर्न देने वाली भी साबित होती है।

परिवार की जरूरत, भविष्य की सुरक्षा
भारतीय समाज में सोना केवल निवेश नहीं, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक जरूरत भी है। शादी, शिक्षा या किसी भी बड़ी जिम्मेदारी के समय, पहले से किया गया निवेश ही सबसे बड़ा सहारा बनता है। आज की छोटी खरीदारी, कल के बड़े खर्च को आसान बना सकती है। यानी स्पष्ट समझ लीजिए कि हर भाव में सोना, हर समय का सहारा है। सोना केवल एक धातु नहीं, बल्कि भरोसे का नाम है। कीमतें चाहे जितनी बदलें, इसकी अहमियत कभी कम नहीं होती। इसलिए बाजार के उतार-चढ़ाव को देखकर रुकने के बजाय, एक स्पष्ट रणनीति के साथ निवेश करना ही समझदारी है।