सोना: खर्च नहीं, रणनीतिक निवेश; ज्वेलरी एक्सपर्ट ने सरकार की ‘खरीद न करने’ की अपील पर उठाए सवाल

आज जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है, सोना एक बार फिर निवेशकों के लिए सुरक्षित ठिकाने के रूप में उभरकर सामने आया है। हालिया नीतिगत बदलावों, खासतौर पर आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी ने घरेलू बाजार में सोने की कीमतों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। ऐसे में सवाल यह नहीं है कि सोना महंगा है, बल्कि यह है कि क्या इससे दूरी बनाना समझदारी होगी? विशाल स्वर्णिका ज्वेलर्स, भागलपुर के प्रोपराइटर विशाल आनंद बता करे हैं कि सोना आखिर है क्या और आपके निवेश की रणनीति क्या होनी चाहिए। विशाल सरकार से भी सवाल पूछ रहे हैं कि इकतरफा सोना नहीं खरीदने की अपील करना ठीक है क्या? 3-4 करोड़ लोग जो इस व्यवसाय से जुड़े हैं वे क्या झालमुढ़ी बेचें?

सबसे पहले आपत्ति को समझिए
सरकार स्थिति के हिसाब से चीजों को नियंत्रित कर सकती है। लेकिन सोना नहीं खरीदने की अपील का असर तो सीधे तौर पर इससे जुड़े तीन चार करोड़ लोगों पर पड़ता है। एक तरह से देखें तो ये अपील एक खास क्लास को टारगेट करता है। कम खरीदें इस तरह की अपील को समझा जा सकता है लेकिन नहीं खरीदने की बात कहना कुछ अजीब है। समझने की बात यह है कि अर्थव्यवस्था एक साइकिल है। इस तरह की अपील का असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। बड़े टेक्सपेयर्स में ज्वेलर्स भी हैं। तमाम बड़े हाउस आज ज्वेलर्स बिजनेस में हैं। व्यापार नहीं होगा तो ये वर्ग टेक्स भी तो नहीं दे सकेगा। समझना तो सरकार को इसे भी चाहिए।

सरकारी नीति का असर: कीमतों में तत्काल उछाल

सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए सोने पर आयात शुल्क में उल्लेखनीय वृद्धि की है। इस फैसले का सीधा असर बाजार पर दिखा, जहां कीमतों में तेज उछाल दर्ज हुआ। हालांकि आम उपभोक्ताओं से फिलहाल खरीदारी टालने की अपील की गई है, लेकिन निवेश के नजरिए से तस्वीर अलग है। बाजार संकेत दे रहा है कि सोने में रुचि बनी हुई है, और वैकल्पिक माध्यम जैसे गोल्ड ETF में भी सकारात्मक ट्रेंड कायम है। सोने को लेकर सबसे बड़ी गलती जो निवेशक करते हैं, वह है ‘सही समय’ का इंतजार। हकीकत यह है कि सोने में परफेक्ट एंट्री पॉइंट तय करना लगभग असंभव होता है। जो लोग कीमत गिरने की उम्मीद में खरीदारी टालते हैं, वे अक्सर बाद में ज्यादा ऊंचे दाम पर खरीदने को मजबूर होते हैं। इस लिहाज से, समय के बजाय निरंतरता ज्यादा महत्वपूर्ण फैक्टर बन जाती है।

संकट में व्यवहारिक उपयोगिता
सोने की सबसे बड़ी खासियत इसकी तरलता (liquidity) है। यह एक ऐसी संपत्ति है जिसे किसी भी समय, किसी भी परिस्थिति में आसानी से नकदी में बदला जा सकता है। चाहे वैश्विक संकट हो, आर्थिक मंदी, या व्यक्तिगत वित्तीय परेशानी, सोना एक बैकअप के रूप में हमेशा उपलब्ध रहता है। यह विशेषता इसे अन्य निवेश विकल्पों से अलग बनाती है। अगर ऐतिहासिक रुझानों और मौजूदा वैश्विक हालात को साथ रखकर देखा जाए, तो सोने की कीमतों में दीर्घकालिक मजबूती की संभावना बनी हुई है। वर्तमान स्तर से आगे भी कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी जा सकती है। ऐसे में आज की गई छोटी खरीद भविष्य में बड़े आर्थिक दबाव को कम कर सकती है, खासतौर पर उन जरूरतों के लिए, जो टाली नहीं जा सकतीं, जैसे विवाह या पारिवारिक जिम्मेदारियां।

सही रणनीति: एकमुश्त नहीं, चरणबद्ध निवेश ही है।
सोने में निवेश को लेकर सबसे संतुलित तरीका है, सिस्टमेटिक अप्रोच। एक बार में बड़ी रकम लगाने के बजाय, नियमित अंतराल पर छोटी-छोटी खरीदारी करना ज्यादा व्यावहारिक और सुरक्षित माना जाता है। यह रणनीति बाजार के उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करती है और औसत खरीद मूल्य को संतुलित बनाए रखती है। निष्कर्ष यही है कि सोना ही सुरक्षा का स्थायी विकल्प है। सोने को केवल उपभोग की वस्तु मानना एक सीमित सोच है। वास्तविकता यह है कि यह एक दीर्घकालिक सुरक्षा कवच है, जो अनिश्चित समय में सबसे ज्यादा काम आता है। इसलिए बाजार की चाल को देखकर निर्णय टालने के बजाय, एक स्पष्ट रणनीति के साथ नियमित निवेश करना ज्यादा समझदारी भरा कदम है।