उपेंद्र सिंह हत्याकांड में तीन दोषी को उम्रकैद, दो बरी- भभुआ अदालत का बड़ा फैसला

न्यूज स्कैन ब्यूरो, कैमूर

वर्ष 2019 के चर्चित उपेंद्र सिंह हत्याकांड में भभुआ व्यवहार न्यायालय ने मंगलवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए तीन अभियुक्तों को धारा 302 में आजीवन कारावास तथा ₹25,000 के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड की राशि अदा नहीं करने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने धारा 149 के तहत भी तीनों को दो वर्ष के साधारण कारावास की सजा दी है।
यह फैसला माननीय एडीजे–3 विनय प्रकाश तिवारी की अदालत ने सुनाया। मामले में दो अभियुक्तों का रिकॉर्ड पृथक कर दिया गया, जबकि दो अन्य को संदेह का लाभ देते हुए रिहा कर दिया गया।
घटना — 16 जून 2019, कुंज गांव
प्राप्त विवरण के अनुसार, यह मामला भभुआ थाना कांड संख्या 340/19 से संबंधित है। कुंज गांव निवासी उपेंद्र सिंह की 16 जून 2019 को सुबह लगभग आठ बजे हत्या कर दी गई थी।
परिवादी राजकुमार सिंह ने थाने में आवेदन देकर बताया था कि उनके भतीजे उपेंद्र को गांव के दैतरा बाबा के पास सात लोगों ने बुलाया। जब उपेंद्र के चाचा पीछे पहुंचे तो देखा कि सभी आरोपियों ने चाकू और छुरा से लगातार वार कर उपेंद्र को मौत के घाट उतार दिया।
अभियुक्तों में गुंजन सिंह, शेषमुनि सिंह, शैलेश सिंह, सुशील सिंह, घुरा सिंह, देवमुनि सिंह और राम इकबाल सिंह के नाम शामिल थे।
नौ गवाहों की गवाही, दो अभियुक्तों का रिकॉर्ड पृथक
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल नौ साक्षियों का बयान दर्ज कराया गया।
अदालत ने अभियुक्त धीरज सिंह और राम इकबाल सिंह का रिकॉर्ड अलग कर दिया। इसके बाद शेष पांच अभियुक्तों पर ट्रायल चला।
दो को संदेह का लाभ, तीन को कठोर सजा
ट्रायल के दौरान उपलब्ध साक्ष्य और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने गुंजन सिंह और सुशील सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
वहीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने तीन अभियुक्तों सुमन सिंह, शैलेश सिंह, देवमुनि सिंह को हत्या का दोषी पाया। अदालत ने तीनों को धारा 302, 147 और 149 के अंतर्गत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
विशेष लोक अभियोजक सतीश कुमार सिंह ने बताया कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहों की स्पष्ट गवाही के आधार पर अदालत ने यह निर्णय दिया है।