राहुल कुमार ठाकुर, अररिया
अररिया जिले में 6 विधानसभा क्षेत्र है जिसमे अररिया , रानीगंज (सुरक्षित ),फारबिसगंज , नरपतगंज ,सिकटी और जोकीहाट।इन छह विधानसभा सीट में अररिया से जहां पूर्व आईपीएस शिवदीप वामनराव लांडे,पूर्व अररिया विधानसभा से डीएसपी और पटना साइंस कॉलेज के प्राध्यापक अखिलेश कुमार नरपतगंज विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।वहीं सिकटी से भाजपा के टिकट से आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री विजय कुमार मंडल,जोकीहाट से तीन पूर्व मंत्री जिसमें दो पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री तस्लीमुद्दीन के पुत्र जन सुराज के टिकट से सरफराज आलम,राजद से शाहनवाज आलम,जदयू से मंजर आलम एक दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में है।अररिया से पूर्व मंत्री मोइदुर्रहमान के बेटे और दो बार से विधायक रहे कांग्रेस के आबिदुर रहमान, पूर्व मंत्री मो. अजीमुद्दीन की बहू जदयू के टिकट से शगुफ्ता अजीम,फारबिसगंज विधानसभा से भाजपा के टिकट पर लगातार दो बार से जीत रहे विद्यासागर केशरी उर्फ मंचन केशरी,नरपतगंज से तीन पूर्व विधायक भाजपा के टिकट से देवंती यादव,जन सुराज से जनार्दन यादव,निर्दलीय अनिल यादव और दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्र संघ के नेता रहे राजद के टिकट से मनीष यादव और रानीगंज से विधायक जदयू उम्मीदवार अचमित ऋषिदेव के भाग्य का फैसला आज वोट कर करेगी।
अररिया विधानसभा
अररिया विधानसभा क्षेत्र से 2015 से 2020 और 2020 से 2025 तक लगातार कांग्रेस प्रत्याशी आबिदुर रहमान ने जीत दर्ज की और इस बार भी कांग्रेस ने उन पर भरोसा जताया है और वे फिर से तीसरी बार कांग्रेस की टिकट से चुनाव मैदान में है। बता दे कि 2020 के चुनाव में आबिदुर रहमान ने 103054 मत लाया था, वही जदयू की शगुफ्ता अज़ीम को 55118 मत मिले थे। जीत का अंतर 47936 था।अररिया सदर विधान सभा में पुरुष मतदाता 174840 है तो 159657 महिला मतदाता है वही थर्ड जेंडर 14 मतदाता है इस प्रकार कुल 334511 मतदाता है। अररिया सदर विधानसभा में इस बार भी जदयू और कांग्रेस आमने सामने है। वही AIMIM और जन सुराज भी चुनाव मैदान में है।इन दोनों पर भी निर्भर करता है की कितना वोट लाते है।क्योंकि कांग्रेस प्रत्याशी , AIMIM प्रत्याशी और जन सुराज के प्रत्याशी तीनो ही मुस्लिम में कुल्हैया बिरादरी से आते हैं। वही जदयू प्रत्याशी शगुफ्ता अज़ीम मुस्लिम में शेख बिरादरी से है। कुल मिलाकर देखा जाए तो अररिया सदर में मुकाबला बहुत ही रोमांचक है।क्योंकि पूर्व आईपीएस शिवदीप लांडे भी यहां से निर्दलीय प्रत्यशी के रूप में चुनाव मैदान में है।
विधानसभा का नाम- जोकीहाट
अररिया जिला का जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र किशनगंज जिला से सटा हुआ है और यह जिले का सबसे हॉट सीट भी बन गया है। क्योंकी यहां से तीन पूर्व मंत्री और पिछले दो टर्म से मुखिया आमने सामने है। साथ ही साथ पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री तस्लीमुद्दीन के दो पुत्र आमने सामने है।वर्तमान में तस्लीमुद्दीन के छोटे पुत्र पूर्व आपदा मंत्री शाहनवाज आलम राजद से मैदान में है तो तस्लीमुद्दीन के बड़े पुत्र पूर्व मंत्री व पूर्व सांसद सरफराज आलम जन सुराज से मैदान में है।वही जदयू से पूर्व अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मंजर आलम चुनाव मैदान में है। वही AIMIM से मुखिया मुर्शीद आलम चुनाव मैदान में है। जोकीहाट में मुकाबला इन चारो के बीच है। AIMIM की अच्छी पकड़ है, क्योंकी 2020 के विधानसभा चुनाव में AIMIM से तस्लीमुद्दीन के छोटे पुत्र पूर्व आपदा मंत्री शाहनवाज आलम ने अपने बड़े भाई पूर्व संसद सरफराज आलम को जो की राजद से थे,उन्हें हराया था। वही शाहनवाज आलम को 59596 मत मिले थे तो बड़े भाई राजद उम्मीदवार सरफराज आलम को 52213 मत मिले थे। इस तरह छोटा भाई शाहनवाज आलम 7383 मतों से विजय हुए थे और जितने के कुछ दिन के बाद ही AIMIM के और चार विधायकों को लेकर राजद में चले गये थे। जिसके बाद महागठबंधन की सरकार में इन्हें आपदा प्रबंधन मंत्री बनाया गया था।लोकसभा चुनाव में भी तेजस्वी ने इन पर भरोसा जताया था और इन्हें अररिया लोकसभा क्षेत्र से राजद ने अपना प्रत्याशी बनाया गया था जिसमे लगभग 20 हजार के मतों से भाजपा के प्रदीप कुमार सिंह से हार गए थे।जोकीहाट विधानसभा का मुकाबला बहुत ही दिलचस्प होगा,क्योंकि तस्लीमुद्दीन के दो पुत्र आमने सामने है।जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र पूर्व केंदीय मंत्री तस्लीमुद्दीन का गृह विधानसभा है और यहां पहले तस्लीमुद्दीन लगातार जीतते रहे थे। वही कभी बड़े बेटे सरफराज आलम तो अब छोटा बेटा शाहनवाज आलम। एक तरह से कहा जाय तो यहां की राजनीती तस्लीमुद्दीन या उनके परिवार के हाथो ही रही है। जोकीहाट में पुरुष मतदाता 160534 है तो महिला मतदाता 143244 है।वही
थर्ड जेंडर 15 है। इस तरह कुल मतदाता 303793 है। जोकीहाट में बाढ़ और पलायन बहुत बड़ा मुद्दा है।
सिकटी विधानसभा
सिकटी विधानसभा क्षेत्र भारत नेपाल सीमा से सटा हुआ विधानसभा है।यहां का सुन्दरनाथ धाम मंदिर काफी प्राचीन है।कहा जाता है कि महाभारत काल में जब पांडवो को अज्ञातवास हुआ था तब माता कुंती ने यहां भगवान शिव की पूजा की थी तब से यहां पूजा हो रही है और उसी मंदिर का नाम सुन्दरनाथ धाम रखा गया है।जहां काफी संख्या में भक्त नेपाल से भी पूजा करने आते है। नेपाल की तराई से हो बहने वाली नदियों के कारण हर साल बाढ़ आता है।2020 के चुनाव में यहां भाजपा से विजय कुमार मंडल चुनाव जीते थे और उन्होंने राजद के शत्रुघ्न मंडल को हराया था।जिसके बाद दूसरी बार NDA सरकार बनने पर इन्हें आपदा प्रबंधन मंत्री बनाया गया।2020 में भाजपा के विजय कुमार मंडल को कुल 84128 मत मिले थे वही राजद के शत्रुघ्न मंडल को 70518 मत मिले थे। इस प्रकार विजय कुमार मंडल 13610 मतों से विजय हुए थे और 5 वी बार विधायक बने। इस विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने इन्हें उम्मीदवार बनाया है।लेकिन इस बार राजद नहीं मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी ने अपना उम्मीदवार हरी नारायण प्रमाणिक को बनाया है।वही जन सुराज ने मुस्लिम उम्मीदवार पर दाव खेला है और मुखिया रागिब बबलू को उम्मीदवार बनाया है। यहां भाजपा और VIP में सीधी टक्कर है।
रानीगंज (सुरक्षित) विधानसभा
रानीगंज विधान सभा सुरक्षित क्षेत्र है वर्तमान में यहां जदयू से अचमित ऋषिदेव विधायक है, जो 2015 से लगातार जीत रहे है इस बार भी जदयू ने इन पर भरोसा जताया है और ये जदयू से उम्मीदवार है।वही 2020 के चुनाव में राजद ने अविनाश मंगलम को टिकट दिया था और इस बार भी राजद ने अविनाश मंगलम को ही टिकट दिया है। 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू के अचमित ऋषिदेव को 81901 मत मिले थे तो राजद के अविनाश मंगलम को 79597 मत मिले थे। मात्र 2304मतों से जदयू के अचमित ऋषिदेव ने जीत दर्ज की थी।इस चुनाव में भी मुकाबला काटे का है।वही रानीगंज में पुरुष वोटर की संख्या 177219 है तो महिला वोटर की संख्या 165183 है।वही 25 थर्ड जेंडर वोटर है कुल 342427 मतदाता रानीगंज विधानसभा क्षेत्र में है।
नरपतगंज विधानसभा
नरपतगंज विधानसभा सुपौल और मधेपुरा जिला के साथ ही नेपाल के सीमा से सटा है।नरपतगंज के बारे में यह उक्ति प्रचलित है कि रोम पोप का और नरपतगंज गोप का।कारण नरपतगंज पहली बार 1962 में अस्तित्व में आया।1962 में यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था।1967 में यह सामान्य सीट बन गया और तब से अभी तक हुए चौदह बार के विधानसभा चुनाव में यादव जाति के लोगों को ही कामयाबी मिली।नरपतगंज विधानसभा चुनाव में इस बार तीन पूर्व विधायक आमने सामने हैं।जिसमें भाजपा के टिकट पर 2010 में विधायक बनी देवंती यादव मैदान में हैं।भाजपा ने अपने सीटिंग विधायक जयप्रकाश यादव का टिकट काटकर इस बार देवती यादव को टिकट दिया है।वहीं जन सुराज से नरपतगंज से चार बार भाजपा के टिकट पर विधायक बने जनार्दन यादव को चुनावी मैदान में उतारा है।जनार्दन यादव पार्टी में उपेक्षा से कुछ दिन पूर्व ही भाजपा को छोड़कर जन सुराज ज्वाइन किया था और ज्वाइनिंग के साथ ही जन सुराज ने उन्हें टिकट दे दिया।वहीं राजद से टिकट न मिलने पर राजद के टिकट पर दो बार विधायक बने अनिल यादव ने पार्टी से बगावत करते हुए निर्दलीय चुनावी मैदान में ताल ठोके हुए है।जबकि राजद ने इस बार के विधानसभा चुनाव में युवा चेहरा और पार्टी के तत्कालीन जिलाध्यक्ष मनीष यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है।वहीं युवाओं के आइकॉन पूर्व डीएसपी और पटना साइंस कॉलेज के प्राध्यापक डॉ अखिलेश कुमार भी निर्दलीय चुनावी मैदान में ताल ठोके हुए है।अखिलेश कुमार पटना में पढ़ने वाले युवाओं को मुफ्त में शिक्षा दान के साथ ही फारबिसगंज और नरपतगंज के कोचिंग में युवाओं को मुफ्त में पढ़ाने और कैरियर काउंसलिंग करने के कारण युवाओं में लोकप्रिय है।पिछले विधानसभा 2020 की चुनाव की बात करे तो भाजपा के जयप्रकाश यादव ने राजद के अनिल यादव को 28 हजार 610 मतों से पराजित किया था.भाजपा के जयप्रकाश यादव को 98397 और राजद के अनिल कुमार यादव को 69787 मत प्रात हुए थे।नरपतगंज विधानसभा में मतदाताओं की बात करे तो कुल मतदाताओं की संख्या 336234 हैं,जिसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 177752,महिला मतदाताओं की संख्या 158648 और अन्य 14 मतदाता हैं।नरपतगंज विधानसभा नरपतगंज और भरगामा प्रखंड के 29 पंचायतों को मिलाकर है।यहां के लोगों के जीवन बसर का मुख्य कार्य कृषि और पशुपालन ही है।नरपतगंज प्रखंड का कई इलाका हरेक साल बाढ़ का दंश झेलने को मजबूर रहा है। बावजूद इसके बाढ़ नियंत्रण और कृषि आधारित उद्योग धंधों का अभाव किसानों और आमजनों के लिए परेशानी का सबब रहा है।ऐसे में तीन पूर्व विधायक के साथ राजद के नए चेहरे पर दांव खेले जाने से फिलहाल मुकाबला चतुष्कोणीय नजर आ रहा है
फारबिसगंज विधानसभा
फारबिसगंज विधानसभा भारत नेपाल सीमा पर स्थित है।फारबिसगंज का इलाका औद्योगिक क्षेत्र है और यहां के लोगों के जीविका का मुख्य साधन कृषि के साथ उद्योग धंधे हैं।फारबिसगंज विधानसभा पूरी तरह फारबिसगंज प्रखंड है,जिसमें 31 पंचायत के साथ दो नगर परिषद क्षेत्र फारबिसगंज और जोगबनी आता है।फारबिसगंज क्षेत्र शुरू से ही कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है।आजाद भारत में हुए पहली बार 1952 में हुए चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बोकाई मंडल विधायक बने थे।उसके बाद डूमर लाल बैठा और शीतल प्रसाद गुप्ता।1962 में पहली बार प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से सरयू मिश्रा चुनाव जीते,लेकिन अगले चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट से जीत दर्ज करते हुए लगातार सात बार विधानसभा चुनाव जीतने का रिकॉर्ड उनके नाम है।सरयू मिश्रा के मरणोपरांत 1990 में भाजपा ने कांग्रेस से यह सीट छीन ली और 1990 और 1995 में लगातार दो बार मायानंद ठाकुर चुनाव जीत दर्ज की।2000 में बहुजन समाज पार्टी से जाकिर हुसैन खान के जितने के बाद 2005 से लगातार पांच चुनाव से भाजपा के खाते में फारबिसगंज सीट है।फारबिसगंज के वर्तमान विधायक विद्यासागर केशरी उर्फ मंचन केशरी है और लगातार दो बार से वह चुनाव जीत रहे हैं और इस बार हैट्रिक लगाने को लेकर भाजपा ने विश्वास जताते हुए पुनः उन्हें भाजपा का उम्मीदवार बनाया है।जबकि इस महागठबंधन की ओर से कांग्रेस ने मनोज विश्वास को टिकट देकर मैदान में उतारा है।दोनों के बीच आमने सामने की लड़ाई है और फारबिसगंज विधानसभा चुनाव में कंटेस्ट हार्ड है।पिछले 2020 के चुनाव परिणाम की बात करे तो भाजपा के विद्यासागर केशरी को 102212 मत प्राप्त हुए थे,जबकि कांग्रेस के जाकिर हुसैन खान को 82510 मत प्राप्त हुआ था।वहीं 2015 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के विद्यासागर केशरी को 85929 और उनके निकटतम प्रतिद्वंदी राजद के कृत्यानंद विश्वास को 60691 मत प्राप्त हुआ था।फारबिसगंज विधानसभा के उत्तर में जहां नेपाल है,वहीं भारत नेपाल के बीच के सुगौली संधि और पारगमन संधि के तहत तीसरे देश से आने वाले आयातित समानों को भारतीय बंदरगाह से नेपाल ले जाने के लिए प्रयुक्त जोगबनी फारबिसगंज विधानसभा में ही आता है।यहां के लोगों का मुख्य धंधा कृषि के साथ उद्योग धंधे हैं।फारबिसगंज औद्योगिकीकरण के मामले में शुरू से ही धनी रहा है।कई राइस मिल्स के साथ अन्य छोटे बड़े उद्योग धंधे शुरू से स्थापित रहे हैं।बिहार सरकार के औद्योगिक क्षेत्र बियाडा फारबिसगंज में ही हैं, जहां प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज के साथ ही छोटे बड़े कई उद्योग आज भी चल रहे हैं।फारबिसगंज का मंडी बिहार के प्रमुख मंडियों में से एक रहा है।लेकिन कालांतर में अपराध और आपराधिक वारदातों के कारण कई घराना अपने कारोबार को समेटकर फारबिसगंज से पलायन कर गए हैं।ऐसे में विधि व्यवस्था और व्यापारियों की सुरक्षा के साथ बाढ़ से निजाद फारबिसगंज की प्रमुख मुद्दे हैं।फारबिसगंज विधानसभा के मतदाताओं की बात करे तो यहां कुल मतदाता 359823 है,जिसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 187531 और महिला मतदाताओं की संख्या 172283 और अन्य मतदाता 9 हैं।
अररिया जिला :
- जिले के छह विधानसभा नरपतगंज,रानीगंज(अजा),फारबिसगंज,अररिया,जोकीहाट और सिकटी के लिए मतदान शुरू
- जिले में बनाए गए कुल 2358 मतदान केन्द्र
- जिले के छह विधानसभा में कुल 61 प्रत्याशी,जिसमें नरपतगंज में 15,रानीगंज (अजा) में 7,फारबिसगंज में 13,अररिया में 10, जोकीहाट में 8 और सिकटी में 8 प्रत्याशी चुनावी मैदान में
- जिले में कुल मतदाता 1979502,पुरुष मतदाता 1036882,महिला मतदाता 942531 और अन्य 89 मतदाता हैं
- कुल 2358 बूथों में पिंक बूथ 20,यूथ बूथ 8, आदर्श बूथ 13,पीडब्ल्यूडी बूथ 6 हैं
- जिले को 295 सेक्टर 18 सुपर जोन में बांटा गया
- शांतिपूर्ण मतदान को लेकर 18 चेकपोस्ट,54 एसएसटी पोस्ट और 54 उड़नदस्ता टीम गठित
- सीएपीएफ की 66 कंपनी के साथ बीएएसपी,बिहार होमगार्ड के जवान और जिला पुलिस की तैनाती
- नरपतगंज विधानसभा में 398,रानीगंज(अजा) में 412,फारबिसगंज में 420,अररिया में 397,जोकीहाट में 353 और सिकटी में 378 मतदान केंद्रों पर मतदान
































