सुपौल: सभी पांच विधानसभा सीटों को बरकरार रखना एनडीए के लिए चुनौती

  • जिले में सुपौल, पिपरा, त्रिवेणीगंज, छातापुर व निर्मली विधानसभा हैं शामिल
  • द्वितीय चरण के तहत 11 नवंबर को होगा मतदान
  • प्रशासन की तैयारी पूरी, एड़ी-चोटी का पसीना बहा रहे हैं प्रत्याशी

विनय कुमार मिश्र, सुपौल

जिले में बिहार विधानसभा आम निर्वाचन 2025 के दूसरे चरण में 11 नवंबर को मतदान होगा। जिला प्रशासन चुनाव की तैयारी में जुटी है। सुपौल, पिपरा, त्रिवेणीगंज (अजा) निर्मली और छातापुर विधानसभा क्षेत्र की जनता 11 नवंबर को मतदान करेंगे। जिले में मतदाता पुनरीक्षण के बाद कुल 15 लाख 39 हजार 242 मतदाता हैं। इनमें 8 लाख 8795 पुरुष और 7 लाख 30 हजार 433 महिला मतदाता शामिल हैं। गौरतलब है कि जिले की सभी पांच विधानसभा सीटों पर अभी एनडीए का कब्जा है। 2020 के विधानसभा चुनाव में सुपौल, पिपरा, त्रिवेणीगंज और निर्मली में जदयू के प्रत्याशी विजयी हुए थे। जबकि छातापुर विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी विजयी हुए थे।

छातापुर विधानसभा में दो प्रत्यशियों के बीच कड़ा मुकाबला :

छातापुर विधानसभा में मतदाताओं के बीच भाजपा के प्रत्याशी व वर्तमान विधायक नीरज कुमार सिंह बबलू और राजद के प्रत्याशी बिपीन कुमार के बीच कड़ा मुकाबला की चर्चा है। भाजपा विधायक नीरज कुमार सिंह बबलू वर्तमान राज्य सरकार में मंत्री के पद पर काबिज हैं । श्री सिंह ने पिछले विधानसभा चुनाव में अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी राजद के विपीन कुमार को करीब 20 हजार मतों से पराजित किया था। श्री सिंह को कुल 93755 एवं श्री कुमार को 73120 मत प्राप्त हुए थे। वर्तमान चुनाव में भी श्री सिंह का मुकाबला एक बार फिर से राजद प्रत्याशी विपीन कुमार से है।

सुपौल विधानसभा में चुनावी दंगल पर टिकी है मतदाताओं की नजर :
सुपौल विधानसभा का चुनावी दंगल अबकी बार रोचक है। 1990 से लगातार चुनाव जीत रहे जदयू प्रत्याशी, विधायक व ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव को महागठबंधन के कांग्रेस प्रत्याशी मिन्नतुल्लाह रहमानी एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं। इसके अलावा जनसुराज के प्रत्याशी अनिल सिंह भी मैदान में हैं। वर्तमान विधायक व ऊर्जा मंत्री अपने विकास के कार्य की बदौलत मतदाताओं के बीच हैं। सुपौल विधानसभा क्षेत्र से बिहार सरकार के कद्दावर मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव बीते 35 वर्षों से लगातार प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। बीते विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस प्रत्याशी मिन्नतुल्लाह रहमानी को करीब 28 हजार मतों से हराया था। श्री यादव को 86174 और श्री रहमानी को 58075 मत प्राप्त हुए थे। आसन्न विधानसभा चुनाव में श्री रहमानी कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में फिर जदयू के बिजेंद्र प्रसाद यादव से टक्कर ले रहे हैं। वहीं जनसुराज के प्रत्याशी अनिल सिंह दोनों में खुद को सबसे बेहतर विकल्प के तौर पर मतदाताओं से जनसंपर्क कर रहे हैं।

किला बचाने की कोशिश में जुटे हैं वर्तमान विधायक :

पिपरा विधानसभा क्षेत्र से वर्तमान में जदयू के राम विलास कामत विधायक हैं। उन्होंने विगत विधानसभा चुनाव में राजद के विश्व मोहन को करीब 19 हजार मतों से पराजित किया था। श्री कामत को 82388 और विश्व मोहन को 63143 मत प्राप्त हुए थे। वर्तमान चुनाव में श्री कामत फिर से जदयू के उम्मीदवार हैं। जबकि महागठबंधन ने यहां से सीपीआई-एमएल के अनील कुमार को अपना प्रत्याशी बनाया है। किला बचाने के लिए वर्तमान विधायक पुरजोर कोशिश में जुटे हैं।

निर्मली में एनडीए और महागठबंधन के बीच चुनावी लड़ाई :

निर्मली विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व लंबे समय से जदयू के अनिरुद्ध प्रसाद यादव करते आ रहे हैं। उन्होंने विगत विधानसभा चुनाव में राजद के प्रत्याशी यदुवंश कुमार यादव को करीब 44 हजार मतों के बड़े अंतर से हराया था। जदयू प्रत्याशी को 92439 और राजद उम्मीदवार श्री यादव को 48517 वोट प्राप्त हुए थे। वर्तमान चुनाव में एनडीए की ओर से फिर जदयू प्रत्याशी अनिरुद्ध प्रसाद यादव हैं। जबकि महागठबंधन ने यहां राजद के बैद्यनाथ मेहता को अपना उम्मीदवार बनाया है। जन सुराज से राम प्रवेश यादव ने भी चुनावी मैदान में डटे है।

एनडीए ने वर्तमान विधायक का टिकट काटा, मैदान में नया चेहरा :

त्रिवेणीगंज विधानसभा क्षेत्र आरक्षित है। यहां बीते चुनाव में जदयू की वीणा भारती ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी राजद के संतोष सरदार को करीब 3 हजार मतों से हराया था। वीणा भारती को 79458 और संतोष सरदार को 76427 मत प्राप्त हुए थे। हालांकि इस बार एनडीए ने यहां उम्मीदवार बदल कर जदयू की ही सोनम रानी सरदार को प्रत्याशी बनाया है। जिन्हें राजद के संतोष सरदार से मुकाबला होगा। हालांकि इस बार जन सुराज पार्टी ने सभी सीटों पर अपना उम्मीदवार उतारा हैं। जाहिर तौर पर मतदान की तिथि करीब आते ही सभी उम्मीदवार मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। विकास की बड़ी बड़ी बातें की जा रहीं हैं। जातीय समीकरण को भी बरकरार रखने का प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान में जिले की पांचों विधानसभा सीट पर एनडीए का कब्जा है। जाहिर तौर पर एनडीए के लिए सभी पांचों सीटों को बरकरार रखना कितना आसान होगा, यह 14 नवंबर को स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल सभी प्रत्याशी मतदाताओं के बीच जीत का दावा कर रहे हैं।