नाथनगर विधानसभा सीट पर कांटे की टक्कर : आरजेडी के जेड हसन और लोजपा (आर) के मिथुन यादव आमने-सामने, मिथुन की ‘माया’ या जेड हसन की ‘काया’, किस पर फिदा होगी जनता?

  • नाथनगर का गरमाया सियासी पारा—आरजेडी का किला बचा पाएंगे जेड हसन या ढाह देंगे मिथुन यादव?

मदन, भागलपुर

नाथनगर विधानसभा सीट इस बार राजनीतिक रूप से सबसे दिलचस्प मुकाबलों में से एक बन गई है। भागलपुर जिले की सातों विधानसभा सीटों में से सबसे ज्यादा नाथनगर में कुल 15 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 4 प्रत्याशियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि 11 प्रत्याशी बेदाग छवि वाले माने जा रहे हैं।

आपराधिक मामले वाले उम्मीदवार

इन चार उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं-मिथुन कुमार (लोजपा–आर, एनडीए), जयकरण पासवान (निर्दलीय), मोहम्मद इस्माइल (एआईएमआईएम), अजय कुमार राय (जन सुराज)।

बेदाग छवि वाले उम्मीदवार

वहीं 11 उम्मीदवार ऐसे हैं जिनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं है —आरजेडी के जेड हसन, बीएसपी के रविश कुमार रवि कुशवाहा, निर्दलीय सुधीर कुमार, शारदा देवी, शानिज कुमार, दयाराम मंडल, जयप्रकाश मंडल, चेतन राम, अरविंद मंडल, सुशील प्रसाद यादव और मोहम्मद मंज़र आलम शामिल हैं।

 मुख्य मुकाबला : महागठबंधन बनाम एनडीए

नाथनगर सीट पर इस बार सीधा मुकाबला महागठबंधन से आरजेडी के जेड हसन और एनडीए से लोजपा (आर) के मिथुन यादव के बीच माना जा रहा है। दोनों ही उम्मीदवार अपने-अपने सामाजिक समीकरण और जनाधार पर भरोसा कर मैदान में डटे हैं। मुकाबला कांटे का बताया जा रहा है — क्योंकि दोनों उम्मीदवार अपने समुदाय में मजबूत पकड़ रखते हैं और स्थानीय स्तर पर अच्छी पहचान भी रखते हैं।

एनडीए के समीकरण और चुनौतिया

लोजपा (आर) के उम्मीदवार मिथुन यादव, वर्तमान में जिला परिषद अध्यक्ष हैं। वे यादव समाज से आते हैं और अपने क्षेत्र में सामाजिक पहुंच के लिए ‘मायावी ’ कहे जाते हैं। हालांकि उनके वोट बैंक में कुछ सेंधमारी की आशंका जताई जा रही है —जयप्रकाश मंडल और सुधीर कुमार (दोनों गंगोता समाज से) एनडीए के घटक दल जदयू के परंपरागत वोट बैंक में कटौती कर सकते हैं। जन सुराज के अजय कुमार राय धानुक समाज के वोटों में सेंध लगा सकते हैं। वहीं, बीएसपी के रविश कुमार रवि कुशवाहा और अरविंद मंडल भी अपने समुदाय में असर डाल सकते हैं।

इसके अलावा, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी गर्म है कि पिछले चुनाव में लोजपा (आर) ने जेडीयू के वोटों को नुकसान पहुंचाया था, ऐसे में इस बार जेडीयू का वोट बैंक उनके साथ जाएगा या नहीं — यह अब भी संशय का विषय बना हुआ है। इसके अलावा लोजपा आर के अमर कुशवाहा और विजय यादव का कितना साथ मिलता है या भीतरघात होता है, यह सवाल भी खड़ा है।

महागठबंधन के समीकरण और संभावित चुनौतियां

महागठबंधन से आरजेडी के जेड हसन मैदान में हैं। वे सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में आए हैं और कहा जाता है कि नौकरी के दौरान उन्होंने हर समाज और जाति वर्ग के लिए मददगार की भूमिका निभाई है। अब उनके उस मददगार चेहरे पर वोट कितना मिलेगा, यह जनता के मन की बात है और यह अभी राज है।

आरजेडी का पारंपरिक मुस्लिम–यादव समीकरण इस बार भी उनके समर्थन में माना जा रहा है। हालांकि, AIMIM के मोमोहम्मद इस्माइल मुस्लिम वोटों में सेंध लगा सकते हैं। नाथनगर विधानसभा क्षेत्र के पुरैनी से वो आते हैं और वहां मुस्लिम वोटरों की संख्या अच्छी खासी है।

इसके साथ ही, दो स्तर पर और जेड हसन को नुकसान की आशंका जताई जा रही है — पिछले राजद विधायक अली अशरफ सिद्दीकी के कार्यकाल में यादव समुदाय में नाराजगी बनी हुई है, क्योंकि विकास कार्यों में इस वर्ग की अनदेखी की गई।

लोजपा (आर) के मिथुन यादव, खुद यादव समाज से आते हैं, जिससे कुछ यादव वोट उनके पक्ष में जा सकते हैं। इसके अलावा राजद से जो मुस्लिम उम्मीदवार दावेदार थे, जिनको टिकट नहीं मिला, उनका कितना साथ मिलता है, यह सवाल भविष्य के गर्भ में है।

आंकड़ों में राजनीतिक समीकरण

जानकारी के मुताबिक,  इस इलाके में मुस्लिम (25%) और यादव (20%) मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। AIMIM मुस्लिम वोटों को प्रभावित कर सकती है। अति पिछड़ा वर्ग और गंगोता समाज में लोजपा (आर) व निर्दलीयों की सक्रियता बढ़ी है। जेडीयू का रुख तय करेगा कि एनडीए वोट कितना समेकित रहता है।

माहौल और मतदाताओं की नब्ज़

चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही नाथनगर का राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। हर मोहल्ले और चौक-चौराहे पर चर्चा यही है — “क्या इस बार भी आरजेडी की परंपरा बरकरार रहेगी या मिथुन यादव की ‘माया’ चलेगी?” मतदाता अब भी सामाजिक समीकरण और स्थानीय विकास के बीच उलझे हुए हैं।

अब देखना दिलचस्प होगा कि नाथनगर की जनता का दिल किसके लिए धड़कता है —आरजेडी के जेड हसन के लिए या लोजपा (आर) के मिथुन यादव के लिए।