न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, भागलपुर
एनटीपीसी कहलगांव परिसर स्थित अंग भवन शनिवार को उस समय ऊर्जा नवाचार का केंद्र बन गया, जब यहां बायोमास को-फायरिंग विषय पर एक दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह आयोजन विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार के सम्राठ मिशन के सहयोग से किया गया, जिसका उद्देश्य तापीय विद्युत संयंत्रों में बायोमास के सुरक्षित और व्यापक उपयोग को गति देना है।
दीप प्रज्वलन से हुई शुरुआत, पर्यावरण – कृषि – ऊर्जा को जोड़ा गया एक सूत्र में
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि डॉ. नवल किशोर चौधरी (IAS), समाहर्ता एवं जिला दंडाधिकारी, भागलपुर ने कहा कि बायोमास को-फायरिंग न सिर्फ प्रदूषण कम करने का सशक्त उपाय है, बल्कि यह किसानों की आय बढ़ाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नया सहारा देता है। उन्होंने कहा – ‘ऐसी कार्यशालाएं किसानों, उद्योगों और प्रशासन के बीच पुल का काम करती हैं और पराली जलाने की समस्या के स्थायी समाधान का मार्ग प्रशस्त करती हैं।’
SAMARTH Mission के विशेषज्ञों का संदेश: ‘ऊर्जा संक्रमण में बायोमास बनेगा मुख्य आधार’
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े श्री रवि प्रकाश अग्रवाल, मिशन निदेशक – SAMARTH Mission, और जितेश श्रीवास, उप निदेशक (TE&TD), CEA ने देशभर में बायोमास को-फायरिंग की प्रगति, तकनीकी मानकों और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि बायोमास का समुचित उपयोग भारत को कार्बन उत्सर्जन में कमी और ऊर्जा संक्रमण के लक्ष्यों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसी क्रम में श्री विजय गोयल, क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक, ईस्ट-1 भी बैठक से जुड़े और पहल की सराहना की।
एनटीपीसी की प्रतिबद्धता – ऊर्जा के साथ पर्यावरण और ग्रामीण विकास
एनटीपीसी कहलगांव के परियोजना प्रमुख श्री रविन्द्र पटेल ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि एनटीपीसी ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास के प्रति उतनी ही प्रतिबद्ध है।
उन्होंने विश्वास जताया कि बायोमास को-फायरिंग जैसा कदम भारत को स्वच्छ, हरित और आत्मनिर्भर ऊर्जा की दिशा में मजबूती देगा।
तकनीकी व आर्थिक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा, किसानों में उत्साह
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि बायोमास से को-फायरिंग कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाती है। किसानों को फसल अवशेषों का उचित मूल्य मिलता है। स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के नए अवसर पैदा होते हैं।
भागलपुर और गोड्डा जिलों से आए किसान, कृषि पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, एनटीपीसी के वरिष्ठ अधिकारी और उद्यमियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को एक व्यापक संवाद मंच बना दिया।

































