बिहार बोर्ड का बड़ा डिजिटल कदम: अब प्रमाण पत्र सत्यापन पूरी तरह ऑनलाइन, 1 जनवरी से लागू होगी नई व्यवस्था

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने प्रमाण पत्र सत्यापन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने नया डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन सिस्टम (DVS) सॉफ्टवेयर लॉन्च किया है, जिसके जरिए अब मैट्रिक और इंटर के प्रमाण पत्रों का सत्यापन पूरी तरह ऑनलाइन किया जाएगा। यह नई व्यवस्था 1 जनवरी से प्रभावी होगी।
बोर्ड अधिकारियों के अनुसार, इस सिस्टम के लागू होने से न सिर्फ सत्यापन की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि वर्षों से लंबित मामलों में भी बड़ी कमी आने की उम्मीद है।

1980 से अब तक के प्रमाण पत्र ऑनलाइन अपलोड
बिहार बोर्ड ने 1980 तक के प्रमाण पत्रों को डिजिटल फॉर्मेट में अपलोड कर दिया है। इससे देश-विदेश की सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाएं अब सीधे ऑनलाइन माध्यम से प्रमाण पत्रों की जांच और सत्यापन कर सकेंगी। बोर्ड का कहना है कि पहले से जारी प्रमाण पत्रों को भी चरणबद्ध तरीके से इस डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जाएगा।

अब डाक से आवेदन नहीं, सब कुछ पोर्टल से
नई व्यवस्था के तहत सत्यापन के लिए आवेदन, शुल्क भुगतान, दस्तावेज अपलोड और सत्यापन रिपोर्ट सब कुछ ऑनलाइन होगा। अब डाक के माध्यम से सत्यापन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। बोर्ड इस प्रक्रिया में AI आधारित तकनीक का भी उपयोग करेगा, ताकि फर्जीवाड़े की संभावना न्यूनतम हो।

सत्यापन प्रक्रिया कैसे होगी
संबंधित संस्थानों को एक बार ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा
सत्यापन के लिए प्रमाण पत्र का विवरण पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा
निर्धारित शुल्क ऑनलाइन जमा होगा
तय समय-सीमा में सत्यापन पूरा कर दिया जाएगा
बार-बार रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं होगी।
लंबित मामलों का बोझ कम होगा

बिहार बोर्ड में फिलहाल सत्यापन से जुड़े 72 हजार से अधिक मामले लंबित हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले खुद बिहार बोर्ड के हैं। इसके अलावा मदरसा बोर्ड और कई विश्वविद्यालयों में भी हजारों आवेदन लंबित हैं। बोर्ड का मानना है कि नई ऑनलाइन प्रणाली से इन लंबित मामलों का तेजी से निपटारा होगा।

छात्रों और संस्थानों को बड़ी राहत
हर साल बिहार बोर्ड से 28 से 30 लाख छात्र पास होते हैं। नौकरी, उच्च शिक्षा और अन्य प्रक्रियाओं में प्रमाण पत्र सत्यापन में होने वाली देरी छात्रों के लिए बड़ी समस्या रही है।
बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर के अनुसार, नई प्रणाली से सत्यापन तेज होगा और संस्थानों को सीधे पोर्टल से प्रमाणिक जानकारी मिल सकेगी।