बिहार में एक ऐसा महाघोटाला सामने आया है, जिसने पूरी प्रशासनिक और शिक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सरकारी खजाने को चूना लगाने के लिए भ्रष्ट अधिकारियों और क्लर्कों ने एचआरएमएस (HRMS) और सीएफएमएस (CFMS) पोर्टल में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया है। इस घोटाले में मृत शिक्षकों के नाम पर वेतन निकाला गया, मकान किराया भत्ता (HRA) 2000 फीसदी तक बढ़ा दिया गया और फर्जी कर्मचारियों की आईडी बनाकर सरकारी पैसा रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की जांच में हुए खुलासे के बाद, करीब 9 लाख शिक्षकों और 1.30 लाख पुलिसकर्मियों के अगले वेतन भुगतान पर रोक लगा दी गई है।
न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
जानिए कि आखिर कैसे हुआ करोड़ों का खेल? डिजिटल भुगतान और पारदर्शिता के लिए बनाए गए HRMS और CFMS पोर्टल का ही दुरुपयोग कर ऑपरेटरों ने सिस्टम में सेंध लगाई। कुछ कर्मियों का मूल वेतन और भत्ते उनकी वास्तविक पात्रता से कई गुना अधिक दर्ज किए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सिस्टम में मकान किराया भत्ता (HRA) 200% से लेकर 2000% तक बढ़ाकर फर्जी बिल पास करा लिए गए। गड़बड़ी उजागर होने के बाद स्कूल क्लर्क विजय कृष्ण विद्यार्थी और परिचारी संजू कुमारी को निलंबित किया गया है, जबकि जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के क्लर्क मनीष कुमार और तत्कालीन लिपिक अमित कुमार पर 12 अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज की गई है।
जिलेवार घोटाले की परतें:
सुपौल: यहां शिक्षा विभाग के एक लिपिक ने 11 शिक्षकों की फर्जी पे-आईडी बनाई और 1.83 करोड़ रुपये का अवैध भुगतान अपनी मां, सास और बहन के खातों में ट्रांसफर कर दिया। एक मृत और सेवानिवृत्त शिक्षक के नाम पर भी वेतन उठाया गया। डीईओ से प्रभार छीनकर 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
भागलपुर: संविदा कर्मी अविनाश राज ने तत्कालीन डीईओ की अटैच लॉगिन आईडी का दुरुपयोग कर ‘तनुश्री’ नाम की फर्जी शिक्षिका की प्रोफाइल बनाई। अप्रैल 2025 की बैकडेट से एंट्री कर फरीदाबाद के बैंक खाते में 6.74 लाख रुपये भेजे गए। कुल मिलाकर 98 लाख रुपये से अधिक की अवैध निकासी की गई।
सहरसा: सौर बाजार प्रखंड के एक स्कूल में तैनात शिक्षिका 10 साल से दिल्ली में रह रही थी। वह कभी स्कूल नहीं गई, फिर भी उसकी हाजिरी बनती रही और उसे लगातार वेतन मिलता रहा।
औरंगाबाद, गया और मुजफ्फरपुर: औरंगाबाद के सिविल सर्जन कार्यालय में एक क्लर्क एक ही अवधि में दो अलग-अलग सरकारी संस्थानों से वेतन ले रहा था। वहीं गया और मुजफ्फरपुर में पुलिस विभाग के वेतन और HRA में भारी हेराफेरी पकड़ी गई है, जहां वास्तविक पात्रता से दो-तीन गुना अधिक भत्ते दर्ज किए गए।
वेतन पर संकट और डेटा सत्यापन का अल्टीमेटम
इस महाघोटाले के सामने आने के बाद वित्त विभाग ने सख्ती दिखाते हुए 22 अक्टूबर 2026 तक सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को HRMS डेटा का शत-प्रतिशत सत्यापन पूरा करने का सख्त निर्देश दिया है। अतिरिक्त भुगतान की गई 76.71 लाख रुपये की राशि नौ चेक के माध्यम से सरकारी कोष में वापस जमा करा ली गई है, लेकिन जब तक पूरे डेटा की बारीकी से जांच और सत्यापन नहीं हो जाता, तब तक बाकी कर्मचारियों का वेतन जारी नहीं होगा। सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह खजाने की लूट करने वाले दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे और लाखों ईमानदार शिक्षकों और पुलिसकर्मियों को बिना अनावश्यक देरी के उनका जायज वेतन उपलब्ध कराए।
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