बिहार में नई सरकार के गठन और हालिया कैबिनेट फेरबदल के बाद मंत्रियों की वास्तविक पृष्ठभूमि को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और बिहार इलेक्शन वॉच की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के मौजूदा मंत्रिमंडल में ‘धनबल’ और ‘बाहुबल’ का पुराना दबदबा पूरी तरह बरकरार है। रिपोर्ट के आंकड़े चौंकाने वाले हैं… सूबे के लगभग आधे मंत्रियों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जबकि 90 फीसदी मंत्री करोड़पति की श्रेणी में आते हैं।
न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
यह विश्लेषणात्मक रिपोर्ट कैबिनेट के कुल 35 मंत्रियों में से 31 मंत्रियों द्वारा चुनाव के वक्त दिए गए स्व-घोषित शपथ पत्रों (Affidavits) के गहन विश्लेषण पर आधारित है। आइए विस्तार से समझते हैं कि नीति-निर्माण करने वाली इस नई कैबिनेट का वास्तविक स्वरूप कैसा है।
बाहुबल का बोलबाला: 47% मंत्रियों पर आपराधिक मामले, 9 पर हत्या के प्रयास जैसे गंभीर केस
राजनीति को अपराध मुक्त करने के तमाम दावों और न्यायिक कड़ाई के बावजूद बिहार कैबिनेट में दागी चेहरों की भरमार है। विश्लेषित किए गए 31 मंत्रियों में से 15 मंत्रियों (47%) ने अपने हलफनामे में खुद पर आपराधिक मामले दर्ज होने की बात स्वीकार की है।
गंभीर अपराध की स्थिति: कुल मंत्रियों में से 9 मंत्री (29%) ऐसे हैं, जो हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) जैसे बेहद गंभीर और गैर-जमानती आरोपों का सामना कर रहे हैं।
किस पार्टी में कितने दागी
भारतीय जनता पार्टी (BJP): बीजेपी के विश्लेषित 15 मंत्रियों में से 7 मंत्री (47%) आपराधिक मामलों में नामजद हैं, जिनमें से 5 पर बेहद गंभीर धाराएं हैं।
जनता दल यूनाइटेड (JDU): मुख्यमंत्री के दल जदयू के 13 मंत्रियों में से 5 मंत्री (38%) दागी छवि के हैं।
अन्य सहयोगी दल: लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के दोनों विश्लेषित मंत्री और ‘हम’ (HAM) पार्टी के एकमात्र मंत्री संतोष कुमार सुमन पर भी आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
धनबल का दबदबा
बिहार कैबिनेट के मंत्रियों की आर्थिक स्थिति आम जनता की औसत आय के मुकाबले एक अलग ही दुनिया बयां करती है। रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रिमंडल के 90% सदस्य (28 मंत्री) करोड़पति हैं और पूरी कैबिनेट की औसत संपत्ति 6.32 करोड़ रुपये है।
कैबिनेट का ‘अमीर बनाम गरीब’ ग्राफ:
सबसे अमीर मंत्री: भाजपा की (औराई विधानसभा से) रमा निषाद 31.86 करोड़ रुपये की अकूत संपत्ति के साथ कैबिनेट में सबसे शीर्ष पर हैं।
दूसरे स्थान पर: शिवहर से आने वाली श्वेता गुप्ता हैं, जिनकी घोषित संपत्ति 28.40 करोड़ रुपये है।
सबसे कम संपत्ति वाले मंत्री: लोजपा (रामविलास) के बखरी से मंत्री संजय कुमार के पास सबसे कम 22.30 लाख रुपये की संपत्ति है।
इन 4 मंत्रियों का डेटा शामिल नहीं
तकनीकी कारणों से 4 मंत्रियों का विवरण इस रिपोर्ट में शामिल नहीं है। इनमें अशोक चौधरी (जदयू) और प्रमोद कुमार (भाजपा) विधान परिषद के मनोनीत सदस्य होने के कारण शपथ पत्र के दायरे से बाहर थे। वहीं दीपक प्रकाश (RLM) और निशांत कुमार (JDU) वर्तमान में किसी भी सदन के सदस्य नहीं होने के कारण डेटा में शामिल नहीं हो सके।
युवाओं पर भारी ‘अनुभव’
- उम्र में बुजुर्गों का दबदबा
कैबिनेट के गठन में नए या युवा चेहरों के बजाय उम्रदराज और अनुभवी नेताओं को तरजीह दी गई है। मंत्रिमंडल के 81% मंत्री (25 सदस्य) 51 से 80 वर्ष की आयु वर्ग के हैं। वहीं, 30 से 50 वर्ष के बीच के युवा या मध्य-आयु वर्ग के केवल 6 मंत्री (19%) ही शामिल हैं। यह साफ करता है कि सूबे की राजनीति में युवाओं के लिए शीर्ष पायदान की राह अब भी आसान नहीं है। - शैक्षणिक स्तर में अव्वल
राहत की बात यह है कि नई कैबिनेट का शैक्षणिक स्तर काफी मजबूत है। मंत्रिमंडल के 71% (22 मंत्री) ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट हैं। वहीं, 8 मंत्री (26%) ऐसे हैं जो 10वीं या 12वीं कक्षा तक पढ़े हैं, जबकि एक मंत्री के पास डिप्लोमा की डिग्री है। - महिला प्रतिनिधित्व में भारी कमी
महिला सशक्तिकरण और ‘आधी आबादी’ को हक देने के बड़े-बड़े राजनीतिक नारों के बीच जमीनी हकीकत निराशाजनक है। 35 मंत्रियों के इस बड़े कुनबे में महिलाओं को महज 14% हिस्सेदारी मिली है। पूरी कैबिनेट में सिर्फ 5 महिलाएं ही मंत्री पद तक पहुंच पाई हैं।
ADR की यह रिपोर्ट इस कड़वी राजनीतिक सच्चाई को एक बार फिर उजागर करती है कि चुनावी सुधारों के तमाम दावों के बीच राजनीतिक दलों का पूरा ध्यान केवल चुनाव जीतने की क्षमता पर टिका है। जब तक राजनीतिक दल टिकट बंटवारे और कैबिनेट गठन में धन और बाहुबल को पैमाना बनाते रहेंगे, तब तक साफ-सुथरी राजनीति का सपना अधूरा ही रहेगा। 90% करोड़पति और करीब आधे दागी मंत्रियों का यह समीकरण आम नागरिक की राजनीतिक पहुंच पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
































