बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनना अब और चुनौतीपूर्ण: बदला नियुक्ति का पैटर्न, अब लिखित परीक्षा तय करेगी मेरिट

बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया में ऐतिहासिक बदलाव किया गया है। राजभवन (राज्यपाल सह कुलाधिपति) ने नई नियमावली के ड्राफ्ट पर अपनी सहमति दे दी है। अब बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) के माध्यम से होने वाली नियुक्तियाँ पूरी तरह से लिखित परीक्षा और साक्षात्कार पर आधारित होंगी।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
जानिए नियुक्ति का नया ‘ब्लूप्रिंट’ क्या है। नई नियमावली के अनुसार, चयन प्रक्रिया को दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया है:

लिखित परीक्षा (160 अंक): यह परीक्षा 3 घंटे की होगी। इसका पाठ्यक्रम पूरी तरह से राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) के अनुरूप होगा।

साक्षात्कार (40 अंक): लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों का इंटरव्यू तीन सदस्यीय विशेषज्ञ कमेटी द्वारा लिया जाएगा।

प्रमुख बदलाव और महत्वपूर्ण शर्तें
NET/CSIR अनिवार्य: लिखित परीक्षा में वही अभ्यर्थी शामिल हो सकेंगे जिन्होंने NET या CSIR की परीक्षा उत्तीर्ण की है।

पासिंग मार्क्स: सामान्य श्रेणी के लिए न्यूनतम उत्तीर्ण अंक 50% अनिवार्य है। हालांकि, SC/ST और दिव्यांग अभ्यर्थियों को इसमें 5% की छूट दी गई है।

आयु सीमा: आवेदन के लिए न्यूनतम आयु 23 वर्ष और अधिकतम 45 वर्ष निर्धारित की गई है।

आरक्षण: नियुक्ति में बिहार राज्य की वर्तमान आरक्षण नीति का पूरी तरह पालन होगा।

अभ्यर्थियों को क्या होगा फायदा?
प्रतिभा को प्राथमिकता: पहले केवल एकेडमिक रिकॉर्ड और इंटरव्यू के आधार पर चयन होता था, जिसमें अक्सर पक्षपात के आरोप लगते थे। अब लिखित परीक्षा से केवल योग्य और विषय के जानकार अभ्यर्थी ही आगे आ पाएंगे।

पारदर्शिता: UGC के मानकों के अनुरूप तैयार यह नियमावली चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाएगी।

समान अवसर: NET उत्तीर्ण सभी अभ्यर्थियों को अपनी काबिलियत साबित करने के लिए एक समान मंच (Level Playing Field) मिलेगा।