जाली नोटों पर ‘डिजिटल’ प्रहार : भारत-नेपाल सीमा के बैंकों में लगेंगी नोट सॉर्टिंग मशीनें

भारत-नेपाल की खुली सीमा का फायदा उठाकर भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाने वाले जाली नोटों (Fake Indian Currency Notes) के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए बिहार सरकार और बैंक अब हाई-टेक होने जा रहे हैं। हाल ही में हुई 40वीं राज्य स्तरीय समन्वय समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों के बैंकों में अत्याधुनिक नोट सॉर्टिंग मशीनें अनिवार्य रूप से लगाई जाएंगी।

न्यूज स्कैन ब्यूरो, पटना
यह जानना आवश्यक है कि यह कदम क्यों जरूरी है। पिछले कुछ समय में बिहार के रास्ते जाली नोटों की तस्करी के मामलों में भारी वृद्धि देखी गई है। जाली नोट अब नेपाल और बांग्लादेश के रास्ते बिहार के विभिन्न जिलों जैसे पटना, चंपारण और भागलपुर तक पहुँच रहे हैं। हाल के महीनों में मधुबनी और समस्तीपुर जैसे इलाकों में लाखों रुपये के जाली नोट पकड़े गए हैं, जिनमें नेपाल के रास्ते पाकिस्तान से कनेक्शन भी सामने आया है। जाली नोट न केवल अर्थव्यवस्था को कमजोर करते हैं, बल्कि टेरर फंडिंग और अवैध गतिविधियों को भी बढ़ावा देते हैं।

सीधे होने वाले मुख्य फायदे
इस नई पहल से आम जनता और बैंकिंग सिस्टम को निम्नलिखित लाभ मिलेंगे:
तत्काल पहचान (Instant Detection): ये मशीनें सिर्फ नोट गिनती नहीं हैं, बल्कि ये ‘करेंसी सॉर्टर’ के रूप में काम करती हैं। ये पलक झपकते ही असली और नकली नोट के बीच का अंतर बता देती हैं, जिससे जाली नोट बैंकिंग सिस्टम में प्रवेश नहीं कर पाएंगे।
करेंसी एक्सचेंज की सुविधा: सीमावर्ती इलाकों में अधिक ‘करेंसी एक्सचेंज केंद्र’ स्थापित किए जाएंगे। इससे यात्रियों और व्यापारियों को वैध तरीके से मुद्रा बदलने की सुविधा मिलेगी, जिससे वे बिचौलियों या अवैध धंधेबाजों के चंगुल से बच सकेंगे।
स्वच्छ मुद्रा (Clean Note Policy): ये मशीनें पुराने, गंदे और कटे-फटे नोटों को अलग करने का काम भी करती हैं, जिससे बाजार में अच्छी क्वालिटी की करेंसी बनी रहती है।
आम जनता की सुरक्षा: आरबीआई अब बैंकों से आने वाली कॉल्स के लिए 1600 से शुरू होने वाले नंबरों का उपयोग करेगा। इससे जनता असली बैंक कॉल और फ्रॉड कॉल के बीच अंतर कर पाएगी, जिससे वित्तीय धोखाधड़ी में कमी आएगी।

सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाना और तकनीकी रूप से सक्षम होना समय की मांग है। इस पहल से न केवल जाली नोटों के परिचालन पर रोक लगेगी, बल्कि आम नागरिकों की मेहनत की कमाई भी सुरक्षित रहेगी।