क्या पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर दुनिया में शांति स्थापित करने के सबसे बड़े दूत बन गए हैं? यह सवाल सोशल मीडिया पर तब चर्चा का विषय बन गया जब बिहार के पूर्णिया जिले के प्रख्यात शिक्षाविद राजेश मिश्रा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया सोशल मीडिया पोस्ट पर एक गहरी व्यंग्यात्मक टिप्पणी की।
न्यूज स्कैन ब्यूरो, पूर्णिया
राजेश मिश्रा ने फेसबुक पर लिखा कि यदि ट्रंप और पाकिस्तान के सहयोग से ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति स्थापित होती है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल को मिल जाए। उनके इस पोस्ट ने एक नई बहस छेड़ दी है।
दरअसल, यह पूरा मामला डोनाल्ड ट्रंप के उस चौंकाने वाले पोस्ट से शुरू हुआ जिसमें उन्होंने ईरान पर होने वाले बड़े हमले को टालने की घोषणा की। ट्रंप के मुताबिक, पाकिस्तान की भूमिका: ट्रंप ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने उनसे संपर्क कर ईरान पर होने वाले ‘विनाशकारी हमले’ को रोकने का अनुरोध किया था। दो हफ्ते का सीजफायर: ईरान द्वारा ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को पूरी तरह खोलने की शर्त पर अमेरिका ने 14 दिनों के लिए हमले स्थगित कर दिए हैं। ट्रंप ने बताया कि ईरान की ओर से एक 10-पॉइंट का प्रस्ताव मिला है, जिसे उन्होंने शांति समझौते का एक मजबूत आधार माना है।

राजेश मिश्रा का कटाक्ष: “पाकिस्तान और नोबेल शांति पुरस्कार?”
राजेश मिश्रा ने अपनी पोस्ट के जरिए पाकिस्तान की इस कथित ‘शांतिदूत’ वाली भूमिका पर तंज कसा है। उन्होंने लिखा, “अगर इससे दीर्घकालिक शांति स्थापित होती है, तो इस बात की प्रबल संभावना है कि 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल को जाए… वहीं भारतीय नेता अब भी स्थिति का आकलन कर रहे हैं।” मिश्रा का यह व्यंग्य उस विरोधाभास की ओर इशारा करता है जहाँ पाकिस्तान, जो खुद आंतरिक और आर्थिक संकटों से जूझ रहा है, अचानक वैश्विक ‘पीसमेकर’ के रूप में प्रोजेक्ट किया जा रहा है। उनके पोस्ट के अंत में “Meanwhile, Leaders in India…” लिखकर उन्होंने भारतीय कूटनीति और प्रतिक्रिया पर भी एक बड़ा सवालिया निशान छोड़ दिया है।
































