बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन को भागलपुर में कार्यशाला, विभागों के समन्वय पर दिया गया जोर

न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, भागलपुर
बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन के लिए राज्य रणनीति एवं कार्य योजना–2025 के तहत सभी संबंधित विभागों और हितधारकों के सतत संवेदनशीलकरण तथा क्षमता निर्माण के उद्देश्य से शुक्रवार को उप श्रमायुक्त कार्यालय, भागलपुर प्रमंडल के सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला सह सेमिनार का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के उप श्रमायुक्त सुधांशु कुमार, सहायक श्रमायुक्त निखिल रंजन तथा श्रम अधीक्षक (अधिनियम) कुमार नलिनीकांत मौजूद रहे। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग से बांका के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, शिक्षा विभाग से जिला शिक्षा पदाधिकारी बांका, समाज कल्याण विभाग से जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक, बाल संरक्षण पदाधिकारी बांका, भागलपुर और बांका के बाल कल्याण समिति के सदस्य, दोनों जिलों के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी तथा गैर सरकारी संगठन मुक्ति निकेतन के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
कार्यक्रम का उद्घाटन होने के बाद सहायक श्रमायुक्त निखिल रंजन ने राज्य रणनीति एवं कार्य योजना–2025 के विभिन्न प्रावधानों और उद्देश्यों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि बाल श्रम की समस्या को समाप्त करने के लिए स्रोत, पारगमन और गंतव्य स्तर पर सभी विभागों के बीच समन्वित कार्रवाई और बेहतर कार्य प्रणाली अपनाना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि बाल एवं किशोर श्रम के मामलों में दोषी नियोजकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई जाती है और एम.सी. मेहता बनाम तमिलनाडु सरकार मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में उनसे 20 हजार रुपये का जुर्माना वसूला जाता है। इसके अतिरिक्त न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 समेत अन्य श्रम कानूनों के तहत भी कार्रवाई की जाती है।
कार्यशाला में बताया गया कि मुक्त कराए गए बाल श्रमिकों को तत्काल 3 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है, जबकि मुख्यमंत्री राहत कोष से 25 हजार रुपये की राशि सावधि जमा कराई जाती है, ताकि उनके पुनर्वास और शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।
प्रतिवेदन के अनुसार भागलपुर जिला बाल श्रम की मध्यम घटना जबकि बांका जिला उच्च घटना की श्रेणी में आता है। इस चुनौती से निपटने के लिए कार्य योजना–2025 में विभिन्न विभागों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय की गई है।
इसके तहत श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग को नोडल विभाग बनाते हुए छापामार दल के माध्यम से बाल श्रमिकों को मुक्त कराने की जिम्मेदारी दी गई है। समाज कल्याण विभाग को किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 और मिशन वात्सल्य के तहत संस्थागत और गैर-संस्थागत सेवाओं की व्यवस्था करने का दायित्व सौंपा गया है।
वहीं शिक्षा विभाग को सभी बच्चों का विद्यालयों में नामांकन सुनिश्चित करने, स्वास्थ्य विभाग को मुक्त कराए गए बच्चों की चिकित्सीय जांच कराने, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग को छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को गरीब परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने अपने सुझाव भी साझा किए और बाल श्रम उन्मूलन के प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यशाला का समापन किया गया।