- भारत सरकार के मानकों के अनुसार हो रही गणना, तीन आधुनिक तरीकों से होगा वन्य जीवों का आकलन
न्यूज स्कैन ब्यूरो, कैमूर
कैमूर पहाड़ी के घने जंगलों में रहने वाले वन्य प्राणियों की संख्या जानने के लिए लगभग 19 वर्षों बाद एक बार फिर व्यापक गणना अभियान की शुरुआत की गई है। यह गणना 90 दिनों तक चलेगी और इसकी विस्तृत रिपोर्ट भारत सरकार को सौंपी जाएगी। यह सर्वे भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार किया जा रहा है, जिससे पहली बार कैमूर क्षेत्र के वन्य जीवों की वास्तविक और वैज्ञानिक स्थिति सामने आ सकेगी।
वन विभाग द्वारा यह गणना ऑल इंडिया टाइगर एस्टिमेशन के अंतर्गत की जा रही है, जिसमें वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का सहयोग लिया जा रहा है। कैमूर क्षेत्र को छह सर्किल में विभाजित कर गणना कार्य प्रारंभ किया गया है।
तीन तरीकों से होगी वन्य प्राणियों की गणना
वन विभाग द्वारा वन्य प्राणियों की गणना के लिए तीन आधुनिक तरीकों को अपनाया जा रहा है—
साइन सर्वे – जानवरों के पैरों के निशान, मल-मूत्र और अन्य संकेतों के आधार पर
ट्रांजेक्ट वॉक – तय रास्तों पर पैदल चलकर प्रत्यक्ष अवलोकन
कैमरा ट्रैप – जंगल में लगाए गए स्वचालित कैमरों के माध्यम से
इन तरीकों से यह आकलन किया जाएगा कि कैमूर पहाड़ी के जंगलों में वन्य प्राणियों की संख्या बढ़ रही है या घट रही है। यदि संख्या में वृद्धि पाई जाती है तो संरक्षण को और मजबूती दी जाएगी, वहीं गिरावट की स्थिति में उसके कारणों की पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
2007 के बाद पहली बार हो रही मानक आधारित गणना
गौरतलब है कि इससे पहले 2007 में कैमूर पहाड़ी क्षेत्र में वन्य प्राणियों की गणना हुई थी, लेकिन वह भारत सरकार के मानकों के अनुरूप नहीं थी। इस कारण कैमूर क्षेत्र को अब तक आधिकारिक रूप से टाइगर रिजर्व के रूप में आगे बढ़ाने में कठिनाई आ रही थी। वर्तमान गणना से इस दिशा में ठोस पहल की उम्मीद की जा रही है।
वन कर्मियों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण
गणना को प्रभावी बनाने के लिए कैमूर के वन कर्मियों को हैदराबाद, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व और कैमूर में विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षित वन कर्मी पूरे 90 दिनों तक जंगलों में रहकर सर्वे कार्य को अंजाम देंगे।
डीएफओ संजीव रंजन का बयान
इस संबंध में कैमूर के डीएफओ संजीव रंजन ने बताया कि “कैमूर पहाड़ी के जंगलों में 2007 के बाद पहली बार भारत सरकार के मानकों के अनुसार वन्य प्राणियों की गणना शुरू की गई है। इस गणना से जंगल में मौजूद वन्य जीवों की वास्तविक संख्या सामने आएगी। उसी आधार पर भविष्य की संरक्षण योजना बनाई जाएगी और कैमूर को वन्य प्राणी आवासीय टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया को गति मिलेगी।”
टाइगर रिजर्व की दिशा में अहम कदम
यह गणना अभियान कैमूर पहाड़ी क्षेत्र को वन्य प्राणी आवासीय टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा आगे की रणनीति तय की जाएगी।
































