न्यूज स्कैन रिपाेर्टर, भागलपुर
कोशकी नाथ झा लेन स्थित ऐतिहासिक व्यायाम कला केंद्र (VKK) ने सोमवार को अपने स्थापना के 100वें वर्ष में प्रवेश करते हुए भव्य शताब्दी महोत्सव का आयोजन किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में टीएमबीयू के कुलपति प्रो. बिमलेंदु शेखर झा, विशिष्ट अतिथि बीएन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा के कुलसचिव डॉ. अशोक कुमार ठाकुर, एलआईसी भागलपुर मंडल के वरिष्ठ मंडल प्रबंधक अभिजीत भट्टाचार्य, विक्रय प्रबंधक जय नन्दन कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
जे. चन्द्रशेखर की प्रतिमा का अनावरण
महोत्सव की शुरुआत वीकेके के संस्थापक जे. चन्द्रशेखर की प्रतिमा के अनावरण के साथ हुई। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया गया।
अतिथियों का स्वागत केंद्र के प्रमुख सजय कुमार झा उर्फ बंटू झा ने किया। विषय प्रवेश परिमल ठाकुर तथा मंच संचालन अविरल झा और मंजीत झा ने किया।
सजय कुमार झा का स्वागत भाषण
उन्होंने कहा कि वीकेके का शतक वर्ष पूरे समाज के लिए गर्व का विषय है। “स्वस्थ जीवन के लिए अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण है। योग को केवल चिकित्सा पद्धति की तरह न अपनाएं, बल्कि उसे दैनिक दिनचर्या में शामिल करें,” — उन्होंने कहा।
कुलपति ने केंद्र की परंपरा और इसके संस्थापक को नमन करते हुए कहा—“यह 100 वर्षों की गौरवशाली यात्रा है। जिस प्रकार यहां विलुप्त हो रही कलाओं को संरक्षित किया जा रहा है, वह अद्वितीय है। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में व्यायाम कला पर एक विशेष ‘चेयर’ की स्थापना करने की इच्छा है।”
उन्होंने कहा कि शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ समाज के लिए ऐसे केंद्रों का प्रसार आवश्यक है।
विशिष्ट अतिथि अभिजीत भट्टाचार्य का वक्तव्य
उन्होंने कहा कि परंपरागत कलाओं को संरक्षित व प्रसारित करने की आज सबसे अधिक आवश्यकता है।
“हम मोबाइल पर जितना समय देते हैं, उतना यदि स्वास्थ्य पर दें तो डॉक्टर की जरूरत ही नहीं पड़ेगी,” — उन्होंने कहा।
शानदार सांस्कृतिक व पारंपरिक प्रस्तुतियों ने जीता दिल
कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई।
बच्चों की पीटी, मशाल पीटी एवं लेजियम ड्रिल को खूब सराहना मिली। 60–80 वर्ष की महिलाओं द्वारा सीनियर लेजियम ड्रिल की प्रस्तुति विशेष आकर्षण रही।
खुशी प्रखर की सेमी-क्लासिकल नृत्य प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कराटे विधा के बच्चों ने वंदे मातरम पर शानदार पिरामिड बनाकर तालियों की गड़गड़ाहट बटोरी।
अजीत झा, दिगंत झा, अविरल झा और जिनित झा द्वारा पन्नों पर खींची गई आड़ी-तिरछी रेखाओं से जीवंत आकृतियाँ बनाना लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा।
पारंपरिक युद्ध कलाओं का प्रदर्शन
डॉ. संजय कुमार झा के जंजीरा प्रदर्शन ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। 12 लठिया, भाला, छुरा और लाठी की प्रस्तुतियाँ कामना ठाकुर, सदय झा, सुदर्शन, अंशुमान, प्रीता मिश्रा, चेतना मिश्रा आदि ने दीं।
किलकारी के बच्चों द्वारा एक से एक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं।
बॉडी बिल्डिंग में युवाओं का दमखम
भरोसी यादव, जय, राजा, राकेश, विवेक साह, अविनाश और कारगिल सहित अन्य प्रतिभागियों ने बॉडी बिल्डिंग प्रदर्शन कर कार्यक्रम में जोश भर दिया।
पूर्ववर्ती छात्रों ने साझा किए अनुभव
सूबेदार मंजीत कुमार, संजीव कुमार सहित कई पूर्व छात्र मंच पर आए और अपने अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम में चिंतन झा, मधुसूदन झा, शरजानंद राय, पुतुल राजहंस, प्रेरित झा, संकेत, अंश झा, उत्सव झा, अनुज झा, श्वेत झा, रक्षित झा सहित बड़ी संख्या में छात्र व स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
100 वर्षों की गौरवगाथा का साक्षी बना चंपानगर
शताब्दी महोत्सव ने व्यायाम कला केंद्र की ऐतिहासिक विरासत, परंपरागत कलाओं के संरक्षण और स्वस्थ समाज निर्माण के संकल्प को नए सिरे से रेखांकित किया। कार्यक्रम का समापन तालियों की गूंज और उत्साहपूर्ण माहौल के साथ हुआ।
व्यायाम कला केंद्र का शताब्दी महोत्सव धूमधाम से सम्पन्न: परंपरागत कलाओं और शारीरिक प्रशिक्षण की अनूठी विरासत को मिला नया आयाम

































