स्मार्ट सिटी का पैसा जा कहाँ रहा है? सिल्क सिटी आज बदहाली की पहचान क्यों बन गई? देखिए कैसे समाजसेवी विशाल आनंद का ‘कलर कोड’ और ‘डिजिटल सर्वे’ वाला विजन भागलपुर को जाम से मुक्ति दिला सकता। उन्होंंने चेतावनी दी है कि सिस्टम भागलपुर के आम लोगों के धैर्य की परीक्षा न ले। अगर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो सत्याग्रह होगा।
न्यूज स्कैन ब्यूरो, भागलपुर
हमारा शहर रेशम नगरी भागलपुर आज अपनी पहचान के लिए नहीं, बल्कि अपनी बदहाली के लिए चर्चाओं में है। लेकिन क्या भागलपुर की सूरत बदल सकती है? समाजसेवी और भारतीय विश्वकर्मा महासंघ के अध्यक्ष विशाल आनंद का जवाब है, “हाँ, अगर नीयत और नीति सही हो।” विशाल आनंद ने शहर की जर्जर व्यवस्थाओं को केवल मुद्दा नहीं बनाया, बल्कि एक व्यापक ‘रोडमैप’ तैयार किया है जो प्रशासन को एक रास्ता तो दिखाता ही है। उन्होने कहा है कि, हमारा मकसद केवल सवाल पूछना नहीं, बल्कि भागलपुर को फिर से गौरवशाली बनाना है।”
अतिक्रमण का समाधान: ‘वेंडिंग जोन’ और ‘मल्टीलेवल पार्किंग’
विशाल आनंद का कहना है कि अतिक्रमण हटाने का मतलब केवल डंडा चलाना नहीं, बल्कि व्यवस्था देना है।
रोडमैप: शहर के उन 10 मुख्य हॉटस्पॉट्स को चिन्हित किया जाए जहाँ सबसे ज्यादा फुटपाथी दुकानें हैं।
प्रशासन उन दुकानों को पास की सरकारी जमीन पर ‘स्मार्ट वेंडिंग जोन’ में शिफ्ट करे।
पार्किंग: खलीफाबाग और वेराइटी चौक जैसे इलाकों के आसपास ‘वर्टिकल मल्टीलेवल पार्किंग’ बनाई जाए ताकि सड़कों पर खड़े वाहनों से जाम न लगे।
- ट्रैफिक कंट्रोल: ‘ई-रिक्शा का जोन निर्धारण’ और ‘स्मार्ट सिग्नल’
भागलपुर में ट्रैफिक जाम की सबसे बड़ी वजह ई-रिक्शा की अनियंत्रित संख्या है।
रोडमैप: शहर को अलग-अलग कलर कोड वाले ट्रैफिक जोन्स में बांटा जाए। एक जोन का ई-रिक्शा दूसरे जोन में न जाए।
इस तरह की योजना छिटपुट बनी तो जरूर लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकी।
मुख्य बाजारों में ‘वन-वे ट्रैफिक’ को कड़ाई से लागू किया जाए और हर चौराहे पर ‘स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल’ केवल शोपीस न रहें, बल्कि काम करें। - जलभराव और ड्रेनेज: ‘इंटीग्रेटेड नाला नेटवर्क’
हल्की बारिश में भागलपुर का ‘वेनिस’ बन जाना यहाँ की नियति बन चुकी है।
रोडमैप: विशाल आनंद का सुझाव है कि टुकड़ों में नाले बनाने के बजाय पूरे शहर का ‘डिजिटल टोपोग्राफिकल सर्वे’ हो।
पुराने ब्रिटिश कालीन नालों की गाद निकाली जाए और उन्हें बड़े आउटलेट से जोड़ा जाए। सड़क बनाने से पहले नाले का लेवल तय करना अनिवार्य हो। - दक्षिण भागलपुर की उपेक्षा का अंत: ‘स्मार्ट सिटी 2.0’
विशाल आनंद के रोडमैप में दक्षिण भागलपुर का विकास सबसे ऊपर है।
रोडमैप: स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के फंड का 40% हिस्सा दक्षिण भागलपुर की बुनियादी सुविधाओं (स्ट्रीट लाइट, चौड़ी सड़कें, पार्क) पर खर्च होना चाहिए।
लोहिया पुल के समानांतर एक नए फ्लाईओवर की योजना बने ताकि दक्षिण से उत्तर की कनेक्टिविटी सुगम हो। - जन-सुविधाएं: ‘सार्वजनिक शौचालय और पिंक बूथ’
बाजारों में महिलाओं और बुजुर्गों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
रोडमैप: हर 500 मीटर पर ‘ई-टॉयलेट’ और महिलाओं के लिए सुरक्षित ‘पिंक रेस्ट रूम’ बनाए जाएं।
रात के समय सुरक्षा के लिए पूरे बाजार क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों का जाल और हाई-मास्ट लाइटें लगाई जाएं।
और अंत में… इच्छाशक्ति की जरूरत
विशाल आनंद का यह रोडमैप स्पष्ट करता है कि भागलपुर की समस्याएं लाइलाज नहीं हैं।
जरूरत है तो बस प्रशासन की ईमानदार इच्छाशक्ति और जन-भागीदारी की।
विशाल आनंद ने हुंकार भरी है कि यदि प्रशासन इन बुनियादी सुधारों की दिशा में कदम नहीं उठाता, तो यह आंदोलन ‘सत्याग्रह’ का रूप लेगा।
































